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Explained: 2014 से 2026 तक कितने विधायक-सांसदों ने थामा बीजेपी का हाथ? PM मोदी ने कैसे बदली हवा, जानें क्या कहता एनालिसिस

Defection Leader: कांग्रेस सबसे बड़ी हारने वाली पार्टी रही, जबकि शिवसेना, TMC और AAP जैसी पार्टियों को भी झटके लगे. 'ऑपरेशन लोटस' के तहत बीजेपी ने अपनी संख्या बल को भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है.

बीजेपी ने 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनाने के बाद से देश की राजनीति में अपनी पकड़ लगातार मजबूत की है. इस दौरान पार्टी ने न सिर्फ चुनावी जीत हासिल की, बल्कि दूसरी पार्टियों के नेताओं, विधायकों और सांसदों को तोड़कर अपने साथ मिलाने की रणनीति को भी बखूबी अंजाम दिया. इस रणनीति को राजनीतिक गलियारों में 'ऑपरेशन लोटस' के नाम से जाना जाता है. तो आइए हम भी जानते हैं कि बीते 12 सालों में कितने सांसद और विधायकों ने बीजेपी जॉइन की...

बीते 12 कितने विधायक और सांसद बीजेपी में शामिल हुए?  

2014 के बाद बीजेपी की सबसे बड़ी कामयाबी विधानसभाओं में अपनी उपस्थिति बढ़ाना रही है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 में देशभर में बीजेपी के कुल 1,035 विधायक थे. यह संख्या लगातार बढ़ती गई और 2025 तक आते-आते यह 1,654 हो गई. यानी एक दशक में बीजेपी के विधायकों की संख्या में करीब 600 का इजाफा हुआ है.

सिर्फ विधायक ही नहीं, सांसदों के स्तर पर भी बीजेपी को बड़ा फायदा हुआ है. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2014 से 2021 के बीच हुए चुनावों में 500 सांसदों और विधायकों ने दल-बदल किया. इनमें से सबसे ज्यादा फायदा बीजेपी को हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 173 सांसद और विधायक दूसरी पार्टियों को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए. वहीं, बीजेपी से सिर्फ 33 सांसद-विधायक ही अलग हुए.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2022 से 2026 के बीच दल-बदल का जो आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, वह 168 सांसदों और विधायकों का है. इनमें से 82 फीसदी यानी करीब 138 लोग बीजेपी में शामिल हुए. इसका मतलब है कि हर चार में से तीन से ज्यादा दलबदलू नेताओं की मंजिल बीजेपी ही थी.

किस पार्टी को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ?

ADR की रिपोर्ट साफ बताती है कि दल-बदल का सबसे बड़ा खामियाजा कांग्रेस को भुगतना पड़ा. 2014 से 2021 के बीच 177 सांसदों और विधायकों ने कांग्रेस छोड़ी. इसके अलावा 222 उम्मीदवारों ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ा. दूसरे नंबर पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) रही, जिसके 20 सांसद-विधायक और 153 उम्मीदवारों ने पार्टी छोड़ी. समाजवादी पार्टी (SP) ने 18 सांसद-विधायक खोए, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) से 26 सांसद-विधायक अलग हुए थे.

2022 से 2026 के दौर में सबसे बड़ा झटका कांग्रेस को लगा. मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि बीजेपी में शामिल होने वालों में से 57 फीसदी पहले कांग्रेस में थे. यानी बीजेपी में गए 138 नेताओं में से करीब 79 कांग्रेस छोड़कर आए थे. हालांकि, यह आंकड़ा केवल एक रिपोर्ट का हिस्सा है. पूरी तस्वीर और भी बड़ी है. BJP.ORG के मुताबिक, 2026 तक आते-आते देशभर में बीजेपी के विधायकों की कुल संख्या 1,654 हो गई, जो 2019 में 1,364 थी. यानी, सिर्फ 7 सालों में बीजेपी को करीब 290 विधायकों का फायदा हुआ, जिसमें 2022-2026 का दौर भी शामिल है.

prsindia.org के मुताबिक, 2022-2026 के कुछ बड़े दल-बदल के उदाहरण पर नजर डालते हैं:

  • 2022: महाराष्ट्र में शिवसेना के करीब 40 विधायक एकनाथ शिंदे के साथ अलग हुए और बीजेपी समर्थित सरकार बनाई. गोवा में 8 कांग्रेस विधायक बीजेपी में शामिल हुए.
  • 2023: मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद बीजेपी के 10 सांसदों ने अपनी लोकसभा सीट से इस्तीफा दिया.
  • 2024: हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के 6 अयोग्य बागी विधायक बीजेपी में शामिल हो गए.
  • 2026: आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों ने बीजेपी जॉइन कर ली.

देशभर में 'ऑपरेशन लोटस' कहां-कहां चला?  

'ऑपरेशन लोटस' का नाम बीजेपी के चुनाव चिह्न 'कमल' से लिया गया है. यह रणनीति 2008 में कर्नाटक से शुरू हुई, लेकिन 2014 के बाद यह और तेज हो गई...

  • कर्नाटक (2019): 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-JDS गठबंधन की सरकार बनी थी. 2019 में बीजेपी ने कई विधायकों को तोड़कर सरकार गिरा दी और BS येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री बनाया.
  • मध्य प्रदेश (2020): कमलनाथ की कांग्रेस सरकार को 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद गिरना पड़ा. इनमें से ज्यादातर विधायक बाद में बीजेपी में शामिल हो गए. शिवराज सिंह चौहान ने फिर से सत्ता संभाली.
  • गोवा (2022): कांग्रेस के 11 विधायकों में से 8 ने बीजेपी जॉइन कर ली. इससे कांग्रेस गोवा में लगभग खत्म हो गई.
  • महाराष्ट्र (2022): एकनाथ शिंदे ने शिवसेना के 40 विधायकों के साथ बगावत कर दी और बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाई. उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई.
  • महाराष्ट्र (2023): अजीत पवार ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में बगावत कर दी और शिंदे सरकार में शामिल हो गए.
  • हिमाचल प्रदेश (2024): कांग्रेस की सुखविंदर सुक्खू सरकार को बीजेपी ने ऑपरेशन लोटस के जरिए गिराने की कोशिश की, जब राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 6 विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की थी.

मीडिया रिपोर्ट्स और विपक्षी दलों के मुताबिक, 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए बीजेपी अब तक 6 राज्यों में सरकारें गिरा चुकी है.

सबसे बड़ा सवाल है कि मोदी के बाद क्यों बदली हवा?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 2014 से पहले बीजेपी भी एक बड़ी पार्टी थी, लेकिन मोदी के नेतृत्व में उसकी राजनीतिक ताकत कई गुना बढ़ गई. इसके पीछे 5 बड़े कारण हैं:

  • मजबूत नेतृत्व: नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और केंद्रित नेतृत्व ने बीजेपी को एक 'जीतती हुई पार्टी' का रूप दिया. नेताओं को लगने लगा कि बीजेपी में रहना राजनीतिक रूप से सुरक्षित और फायदेमंद है.
  • संगठनात्मक ताकत: अमित शाह की अगुआई में बीजेपी का संगठन मजबूत हुआ. पार्टी ने हर राज्य में मजबूत नेटवर्क बनाया और विपक्षी दलों के नेताओं को लुभाने की कारगर रणनीति अपनाई.
  • विपक्ष का कमजोर होना: 2014 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस लगातार कमजोर होती गई. नेतृत्व संकट और आंतरिक कलह के चलते कई नेताओं ने कांग्रेस छोड़ दी. वहीं, क्षेत्रीय दल भी बीजेपी के सामने टिक नहीं पाए.
  • 'विकास' का नारा: मोदी सरकार ने 'सबका साथ, सबका विकास' और 'गरीबी उन्मूलन' जैसे नारों के साथ एक मजबूत जनाधार बनाया. इससे नेताओं को लगा कि बीजेपी की नीतियां जनता के बीच मशहूर हैं.
  • कानूनी और प्रशासनिक दबाव: कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI जैसी एजेंसियों की कार्रवाई ने भी दल-बदल को बढ़ावा दिया. कई नेताओं ने कानूनी मामलों से बचने के लिए बीजेपी का दामन थामा.

मौजूदा हालात: लोकसभा और राज्यसभा में NDA की स्थिति

2026 के मध्य तक NDA की स्थिति काफी मजबूत हो चुकी है:

  • लोकसभा: TMC के 20 सांसदों के NDA का समर्थन करने के बाद, बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन की संख्या 314 हो गई है. हालांकि, संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत (360 सीटें) चाहिए. NDA इससे 46 सीटें पीछे है. DMK (22 सांसद) के INDIA ब्लॉक से बाहर निकलने पर NDA की स्थिति और मजबूत हो सकती है. शिवसेना (UBT) गुट के 6 सांसदों ने भी पार्टी से किनारा करके NDA को समर्थन देने की बात कही है. यानी अब लोकसभा में NDA की 319 सीटें हो जाएंगी.
  • राज्यसभा: NDA के पास 148 सांसद हैं. आगामी चुनावों और पश्चिम बंगाल में हुए उपचुनावों के बाद यह संख्या 155 तक पहुंच सकती है. राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 164 है. NDA को इसके लिए BJD (5 सांसद) और YSR कांग्रेस (7 सांसद) जैसी पार्टियों के समर्थन की जरूरत है.

हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों ने भी बीजेपी में विलय कर लिया है. इससे राज्यसभा में बीजेपी की ताकत और बढ़ गई है.

2022 से 2026 के बीच का दौर बीजेपी के लिए दल-बदल के मामले में बेहद फायदेमंद रहा. कांग्रेस इस दौर की सबसे बड़ी हारने वाली पार्टी रही, जबकि शिवसेना, TMC और AAP जैसी पार्टियों को भी बड़े झटके लगे. 'ऑपरेशन लोटस' के तहत बीजेपी ने न सिर्फ विपक्षी पार्टियों को कमजोर किया, बल्कि अपनी संख्या बल को भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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