Earthquake: भूकंप आता कैसे है? जानिए कैसे बचें भूकंप के दौरान
आइए जानते हैं कि भूकंप क्यों आता है और भूकंप जब आए तो कैसे बचाव किया जा सकता है.

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. रिक्टर स्केल पर तीव्रता 4.5 मापी गई. भूकंप का केंद्र गुरुग्राम बताया जा रहा है. बता दें कि पिछले कुछ दिनों या महीनों से लगातार दिल्ली एनसीआर के लोगों को भूंकप के झटके लग रहे हैं.
दो जुलाई को आया था लद्दाख में भूकंप
देश में लगातार भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे हैं. दो जुलाई को लद्दाख में दोपहर 13:11 बजे भूकंप आया था. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया था कि रिक्टर स्केल पर इनकी तीव्रता 4.5 मापी गई है. भूकंप का केंद्र लद्दाख के नॉर्थ-नॉर्थवेस्ट में 119 किमी नीचे था, जिसकी वजह से जान-माल के किसी नुकसान की खबर नहीं आई है. इससे पहले 26 जून को भी लद्दाख में भूकंप आया था. तब भी इसकी तीव्रता 4.5 मापी गई थी. तब भूकंप का केंद्र जमीन के 25 किलोमीटर नीचे था.
27 जून को हरियाणा में भूकंप
27 जून को हरियाणा के रोहतक में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए, रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.4 दर्ज की गई है. भूकंप शनिवार रात 9 बजकर 11 मिनट पर आया था.म इससे पहले शुक्रवार को भी रोहतक में भूकंप के झटके मेहसूस किए गए थे. कल 2.8 तीव्रता का भूकंप आया था.
आइए जानते हैं कि भूकंर क्यों आता है और भूकंप जब आए तो कैसे बचाव किया जा सकता है.
भूकंप के दौरान सतर्कता से जुड़ी कुछ जरूरी बातें:
-अगर आप किसी इमारत के अंदर हैं तो फर्श पर बैठ जाएं और किसी मजबूत फर्नीचर के नीचे चले जाएं. यदि कोई मेज या ऐसा फर्नीचर न हो तो अपने चेहरे और सर को हाथों से ढंक लें और कमरे के किसी कोने में दुबककर बैठ जाएं. -अगर आप इमारत से बाहर हैं तो इमारत, पेड़, खंभे और तारों से दूर हट जाएं. -अगर आप किसी वाहन में सफर कर रहे हैं तो जितनी जल्दी हो सके वाहन रोक दें और वाहन के अंदर ही बैठे रहें. -अगर आप मलबे के ढेर में दब गए हैं तो माचिस कभी न जलाएं, न तो हिलें और न ही किसी चीज को धक्का दें. -मलबे में दबे होने की स्थिति में किसी पाइप या दीवार पर हल्के-हल्के थपथपाएं, जिससे कि बचावकर्मी आपकी स्थिति समझ सकें. अगर -आपके पास कोई सीटी हो तो उसे बजाएं. -कोई चारा न होने की स्थिति में ही शोर मचाएं. शोर मचाने से आपकी सांसों में दमघोंटू धूल और गर्द जा सकती है. -अपने घर में हमेशा आपदा राहत किट तैयार रखें.
भूकंप आता कैसे है?
पृथ्वी की बाहरी सतह सात प्रमुख और कई छोटी पट्टियों में बंटी होती है. 50 से 100 किलोमीटर तक की मोटाई की ये परतें लगातार घूमती रहती हैं. इसके नीचे तरल पदार्थ लावा होता है और ये परतें (प्लेटें) इसी लावे पर तैरती रहती हैं और इनके टकराने से ऊर्जा निकलती है, जिसे भूकंप कहते हैं.
भारतीय उपमहाद्वीप को भूकंप के खतरे के लिहाज से सीसमिक जोन 2,3,4,5 जोन में बांटा गया है. पांचवा जोन सबसे ज्यादा खतरे वाला माना जाता है. पश्चिमी और केंद्रीय हिमालय क्षेत्र से जुड़े कश्मीर, पूर्वोत्तर और कच्छ का रण इस क्षेत्र में आते हैं.
Source: IOCL























