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वन नेशन वन राशन कार्ड होता तो प्रवासी मजदूरों को नहीं होती दिक्कत, कहीं से भी मिल जाता राशन

वन नेशन वन राशन कार्ड होता तो शायद प्रवासी मजदूरों को दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता.अगर ये स्कीम होती तो उन्हें कहीं से भी राशन मिल सकता था.

नई दिल्ली: केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने इस साल 1 जून से पूरे देश में वन नेशन वन राशन कार्ड लागू करने का लक्ष्य तय किया है. पूरे देश में लागू होने के बाद कोई भी राशन कार्डधारी एक ही कार्ड से देश में कहीं से भी सरकारी राशन खरीद सकेगा. फिलहाल ये केेवल 12 राज्यों में ही लागू है.

रुक सकता था पलायन ?

कोरोना के खतरे को रोकने के लिए लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन के शुरुआती दिनों की सबसे मार्मिक तस्वीर तब देखने को मिली जब दिल्ली समेत अलग-अलग राज्यों से दिहाड़ी और गरीब मजदूरों ने पैदल ही अपने-अपने गांवों की ओर कूच करना शुरू कर दिया. इनमें से ज्यादा लोग वो थे जो रोज कमाते और खाते हैं.

काम बंद होने के चलते उनके पास अनाज खरीदने के भी लाले पड़ गए और उन्हें अपने गांवों की ओर जाना पड़ा. इनमें से ज्यादातर लोग उस श्रेणी में आते हैं जो सरकार की ओर से दिए जाने वाले सस्ते अनाज के अधिकारी हैं लेकिन उनका राशन कार्ड उनके अपने गांव का है लिहाजाअपना राशन नहीं ले सकते.  ऐसे में सवाल उठता है कि अगर देश में वन नेशन वन राशन कॉर्ड लागू हुआ होता तो क्या इन मजदूरों का पलायन रोका जा सकता था ? जवाब है हां.

क्या है वन नेशन वन राशन कॉर्ड

मोदी सरकार ने 1 जून से पूरे देश में वन नेशन वन राशन कॉर्ड योजना लागू करने का लक्ष्य रखा है. इसे राशन कॉर्ड पोर्टेबिलिटी भी कहा जाता है. योजना के पूरे देश में लागू होने के बाद कोई राशन कार्डधारी एक ही कार्ड से देश के किसी भी सरकारी राशन की दुकान से सरकारी राशन खरीद सकेगा. इस योजना से उन लोगों को ज्यादा फायदा होगा जो नौकरी या किसी अन्य वजह से एक जगह से दूसरी जगह आते जाते रहते हैं.

उदाहरण के लिए , अगर बिहार का कोई व्यक्ति दिल्ली में रहता गई और उसका राशन कार्ड उसके अपने गांव या शहर के पते का है तो वो उसी राशन कॉर्ड के आधार पर दिल्ली के किसी सरकारी राशन की दुकान से अपना अनाज खरीद सकेगा.

फिलहाल 12 राज्यों में लागू है योजना लेकिन यूपी , बिहार शामिल नहीं

फिलहाल देश के 12 राज्यों में ये योजना लागू की जा चुकी है लेकिन इन राज्यों में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य शामिल नहीं हैं. जिन राज्यों में ये योजना लागू हो गई है उनमें आंध्र प्रदेश , तेलंगाना , गुजरात , महाराष्ट्र , हरियाणा , राजस्थान, कर्नाटक , केरल , मध्य प्रदेश , गोवा , झारखंड और त्रिपुरा शामिल हैं. मतलब ये हुआ कि महाराष्ट्र में रहने वाला कोई व्यक्ति अगर सुदूर त्रिपुरा चला जाता है तो उसे नया राशनकार्ड बनवाने की जरूरत नहीं होगी और पुराने राशनकार्ड से ही त्रिपुरा में भी अपना सरकारी राशन खरीद सकेगा. इतना ही नहीं , महाराष्ट्र का उपभोक्ता अपने राज्य में किसी भी सरकारी राशन की दुकान से अपना राशन खरीद सकता है.

81 करोड़ लोगों को मिलता है सरकारी अनाज

खाद्य सुरक्षा योजना के तहत देश के 81 करोड़ लोग हर महीने सस्ती दरों पर अनाज लेने के पात्र हैं. जिनमें करीब 72 करोड़ लोग हर महीने प्रति व्यक्ति 5 किलो जबकि बाकी करीब 9 करोड़ लोग , जिन्हें अंत्योदय कहा जाता है , प्रति व्यक्ति 7 किलो सस्ता अनाज ले सकते हैं. इन अनाजों में चावल 3 रुपए प्रति किलो , गेहूं 2 रुपए प्रति किलो जबकि एक मोटा अनाज 1 रुपए प्रति किलो ले सकते हैं. हालांकि लॉकडाउन के बाद सरकार ने इन लोगों को तीन महीने तक हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज देने का भी एलान किया है. ये उन्हें सस्ती दरों पर मिलने वाले अनाज के अतिरिक्त दिया जाएगा.

कुछ दिक्कतें भी हैं

बाक़ी बचे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू करने के लिए इन राज्यों में राशन की दुकानों के कम्प्युटरीकरण , इन दुकानों में इलेक्ट्रॅानिक पॅाइंट आन सेल ( ePoS ) मशीनों को लगाने और उन्हें आधार से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है. इस योजना के सुचारू रूप से चलने में कुछ मुश्किलें भी आने की आशंका है. जैसे इस योजना में ePoS मशीनों का इस्तेमाल होता है जिसके संचालन के लिए कनेक्टिवीटी की शिकायतें आम हैं. कनेक्टिवीटी की समस्या के चलते सुदूर स्थानों में जिस उपभोक्ता को इसका फायदा लेना है उसकी पहचान करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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