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Exclusive: मनसुख हिरेन मौत मामले में अहम जानकारी, ATS ने 10 घंटे तक रिकॉर्ड किया सचिन वाजे का बयान

सूत्रों के मुताबिक, जिस दिन मनसुख हिरेन की मौत की जांच का केस एटीएस को सौंपा गया था उसी दिन सचिन वाजे एटीएस के दफ्तर गए थे. वहां दस घंटों तक एटीएस ने उनका बयान रिकॉर्ड किया. सूत्रों की मानें तो बयान दर्ज करने के बाद एटीएस ने सचिन वाजे को जाने दिया.

मुंबई: उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के नजदीक विस्फोटक भरा स्कॉर्पियो और मनसुख हिरेन की मौत के मामले में मुंबई एटीएस ने सचिन वाजे का दस घंटे तक स्टेटमेंट रिकॉर्ड किया. सूत्रों के मुताबिक, जिस दिन केस एटीएस को ट्रांसफर हुआ था उसी दिन वाज़े खुद एटीएस के दफ्तर गए थे. सचिन वाजे ने एटीएस को कहा कि वो अपना बयान दर्ज कराने आए है, अगर एटीएस को लगता है कि वो आरोपी हैं तो गिरफ्तार कर लिया जाए. एटीएस ने उनसे दस घंटे तक पूछताछ की और जाने दिया.

सूत्रों के मुताबिक, सचिन वाज़े से सबसे पहला सवाल यही पूछा गया कि क्या वो मनसुख हिरेन को जानते थे, इस पर उन्होंने हां में जवाब दिया. दूसरा सवाल ये था कि घटना के दिन वो कहां थे, इस पर उन्होंने बताया कि वो मुंबई सीआईयू के दफ्तर में थे और उसके बाद अपने घर गए.

चोरी हुई स्कार्पियो कार जिसमें जिलेटिन की छड़ें मिली थीं. सूत्रों के मुताबिक, उसको लेकर सचिन वाज़े ने बताया कि उन्होंने उस कार को कभी इस्तेमाल नहीं किया. वो ऑटोमेटिक गाड़िया चलाते हैं, उन्हें तो स्कॉर्पियो चलाने भी नहीं आती. चार महीने गाड़ी के इस्तेमाल का जो आरोप परिवार और पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस की तरफ से लगाया गया है उसे सचिन वाजे ने गलत बताया.

सचिन वाजे पर मनसुख की पत्नी द्वारा आरोप लगाया गया था कि वो मनसुख को गिरफ्तार होने और फिर जमानत पर छुड़ाने का दबाव बना रहे थे. इस पर सचिन वाजे ने बताया कि ये गलत आरोप है. कैब ड्राइवर के मुताबिक, मनसुख क्राफर्ड मार्केट से शिवाला होटल गए, क्यों गए, ये सब जानकारी उनके पास नहीं है.

सूत्रों के मुताबिक, वाजे ने बताया कि वो 25 फरवरी को घटनास्थल पर सबसे पहले नहीं पहुंचे थे. सबसे पहले एटीएस की टीम, बीट मार्शल, ट्रैफिक पुलिस और डीसीपी जोन-2 और लोकल पुलिस की टीम पहुंची थी. वो इन सबके बाद पहुंचे थे. ऐसे में क्राइम सीन पर सबसे पहले पहुंचने का आरोप लगाना गलत है. सूत्रों की मानें तो सचिन वाजे ने धनंजय गावड़े को पहचानने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि वो गावड़े को जानते ही नहीं है. हालांकि पुराना रिकॉर्ड देखें तो वाजे औऱ गावड़े पर एक ही केस में एफआईआर हैं.

सीआईयू को जांच सौंपे जाने से पहले एटीएस की टीम मनसुख को लेकर गई थी. 15 मिनट में ही कार किसकी है इसकी डिटेल एटीएस ने निकाल ली थी. जब सीआईयू को मामला सौंपा गया और वो मनसुख के घर पहुंचे तो एटीएस पहले ही मनसुख को लेकर चली गई थी. पूछताछ के बाद मनसुख को छोड़ दिया गया. इसके बाद जिस विक्रोली पुलिस स्टेशन में कार चोरी की एफआईआर है, वे पूछताछ के लिए मनंसुख को लेकर गए और बाद में छोड़ दिया गया.

सूत्रों के मुताबिक, सचिन वाजे ने बताया कि वो मनसुख को वो जानते थे लेकिन उनका कहना है कि मनसुख के मोबाइल में दर्जनों अधिकारियों के नंबर मिल जाएंगे. इन दोनों की पूछताछ के बाद मनसुख को सीआईयू की टीम पूछताछ के लिए बुलाई थी और यही से मनसुख बाद में एनआईए के ऑफिस भी गए थे. वाजे ने बताया कि उस हत्याकांड से उनका कोई वास्ता नही है. वो न तो हत्यारों को जानते हैं और न ही इसमें शामिल हैं. साथ ही घटना के दिन मनसुख जा रहे हैं, उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

सचिन वाजे ने कहा कि 3 मार्च 2004 में भी इसी तरह एक मामले में ख्वाजा यूनुस प्रकरण में उन्हें फंसाया गया और 17 साल बाद दोबारा उन्हें इसी तरह फंसाया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, सचिन वाजे ने दावा किया कि मनसुख की कार की पहचान होने के बाद आवश्यक जानकारी उन्होंने अपने वरिष्ठ लोगों को दी थी. जबकि क्राइम ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारी इस बारे में स्पष्ट कर चुके है कि मनसुख से वाजे की घनिष्ठता को लेकर उन्हें वाजे की तरफ से जानकारी नहीं दी गयी. मीडिया में रिपोर्ट आने के बाद वाज़े से इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पूछा गया, उसके बाद उन्होंने बताया इसलिए सचिन वाजे को इस केस से हटा दिया गया.

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मृत्युंजय सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिनका पत्रकारिता में 18 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में ABP News में कार्यरत हैं और महाराष्ट्र में डिप्टी ब्यूरो चीफ के रूप में कार्यरत हैं. वे अपराध, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहरी रिपोर्टिंग करते हैं. उनकी डिफेंस में काफी रुचि है.
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