एक्सप्लोरर

असम हर साल क्यों झेलता है बाढ़, क्यों हो जाती हैं सरकारें लाचार?

असम में हर साल आने वाले बाढ़ के कारण लाखों लोग प्रभावित होते हैं. हजारों एकड़ फसलें डूब जाती हैं और सैकड़ों करोड़ रुपयों का नुकसान हो जाता है.

भारत में इस हफ्ते देश के लगभग सभी राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. असम में भी पिछले कुछ दिनों से हो रही लगातार बारिश ने राज्य के 12 जिलों में से कम से कम पांच लाख लोगों को प्रभावित किया है. इस राज्य में हर साल जून और जुलाई के महीने में बाढ़ का आना जैसे नियम सा बन गया है. 

इस राज्य में हर साल आने वाले बाढ़ के कारण लाखों लोग प्रभावित होते हैं.  अनेकों लोगों की मौत भी हो जाती है. हजारों एकड़ फसलें डूब जाती हैं और सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हो जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर असम में ऐसा क्या है कि वहां पर हर साल इतनी तबाही होती है और इसके बावजूद कोई भी सरकार इस तबाही को रोकने में नाकाम हो जाती है. आखिर क्यों और राज्यों की तुलना में असम को ही सबसे ज्यादा भुगतना पड़ता है ? 

भारत के नक्शे पर देखें तो असम सुदूर उत्तर पूर्व में बसा राज्य है. इस राज्य से होकर ब्रह्मपुत्र नदी गुजरती है. यह देश की दूसरी सबसे बड़ी नदी है और इसकी लंबाई करीब 3 हजार किलोमीटर है. असम में हर साल जो बाढ़ आती है, उसकी सबसे बड़ी वजह यही नदी और इसका भौगोलिक विस्तार है. 

छोटी नदियां कैसे असम में बाढ़ के लिए जिम्मेदार

ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास से निकलती है. ये तिब्बत से आती है और अरुणाचल प्रदेश से भारत में प्रवेश करती है. तिब्बत से निकलने और अरुणाचल प्रदेश तक आने वाला रास्ता पूरा पहाड़ी है तो ब्रह्मपुत्र की धारा तेज नहीं होती है. लेकिन जैसे ही ये अरुणाचल प्रदेश से नीचे आती है और असम में प्रवेश करती है वो पहाड़ी से सीधे मैदान में आ जाती है और इसकी वजह से ब्रह्मपुत्र के पानी में रफ्तार आ जाती है और इसका फैलाव भी हो जाता है. 

मैदान में आने के बाद कहीं-कहीं तो ब्रह्मपुत्र की चौड़ाई करीब 10 किलोमीटर तक हो जाती है. आप आसानी से अंदाजा लगा सकते हैं कि इसका विस्तार कितना होता होगा. बारिश के दिनों में पहाड़ों पर बारिश ज्यादा होती है तो ब्रह्मपुत्र में भी बारिश का पानी आता है, जिसकी वजह से जून-जुलाई के महीने में इसका रूप और भयंकर हो जाता है. लेकिन असम में बाढ़ की ये इकलौती वजह नहीं है. इसकी दूसरी सबसे बड़ी वजह है ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियां. छोटी-बड़ी करीब 35 ऐसी नदियां हैं जो असम में अलग-अलग जगहों पर ब्रह्मपुत्र में मिलती हैं और ब्रह्मपुत्र को और ज्यादा भयानक बना देती हैं.

इसे थोड़ा और विस्तार से समझें तो हिमालय से एक नदी निकलती है जिसको सांगपो कहते हैं. अरुणाचल प्रदेश के जरिए ये नदी भारत में प्रवेश करती है, यहां पर इस नदी को सियांग के नाम से जानते हैं. दूसरी नदी लोहित है जो तिब्बत से निकलती है. ये नदी भी अरुणाचल प्रदेश के जरिए भारत में आती है. अरुणाचल प्रदेश में करीब 200 किलोमीटर बहने के बाद ये नदी सियांग में मिल जाती है. 

वहीं अरुणाचल प्रदेश से एक नदी निकलती है जिसको दिबांग कहते हैं. ये नदी भी सियांग में मिल जाती है. यानी सियांग, लोहित और दिबांग तीनों नदियां मिलती हैं और असम में प्रवेश करती हैं. इन तीनों नदियों के संगम से ब्रह्मपुत्र नदी बनती है. इसके बाद इसमें तिब्बत से निकली सुबनसिरी नदी, अरुणाचल प्रदेश से निकली कामेंग नदी, डिक्रांग, डिहींग और मानस नदी, नागालैंड से निकली धनसिरी नदी और मणिपुर से निकली बाराक नदी भी ब्रह्मपुत्र में मिल जाती हैं. 

इसके अलावा और भी कई छोटी-बड़ी नदियां अलग-अलग जगहों पर ब्रह्मपुत्र में मिलती जाती हैं. इनमें से अधिकांश नदियां बरसाती नदियां हैं. जून-जुलाई के महीने में जब पहाड़ों पर बारिश होती है तो इनमें खूब पानी आता है और फिर इन सबके मिलने के बाद ब्रह्मपुत्र अपना रौद्र रूप धारण कर लेती है. असम में हर साल आने वाली तबाही की यही असली वजह है.

असम की आधी से ज्यादा जमीन बाढ़ से प्रभावित

असम सरकार की आधिकारिक वेबसाइट का कहना है कि राज्य की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि करीब 78.523 लाख हेक्टेयर जमीन में से 31.05 लाख हेक्टेयर जमीन बाढ़ की वजह से प्रभावित होती है. ये अनुमान राष्ट्रीय बाढ़ आयोग का है. पूरे देश में आने वाले बाढ़ का करीब 9.5 फीसदी हिस्सा अकेले असम से होता है. पूरे देश की तुलना में असम में बाढ़ की तीव्रता चार गुनी अधिक होती है. 

बाढ़ की वजह से औसतन हर साल असम को करीब 200 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है. लेकिन क्या सब प्राकृतिक बनावट का ही नतीजा है या फिर इस भयंकर बाढ़ के लिए इंसान भी जिम्मेदार है. अगर इस सवाल का जवाब खोजने की कोशिश करेंगे तो जवाब हां में ही मिलेगा.  इंसानों ने जो किया है, अगर वो नहीं किया होता तो बाढ़ की तीव्रता शायद कम होती.

बांध भी बन रहा बाढ़ का कारण 

बांध बनाकर पहले नदी के बहाव को रोका जाता है और फिर बांध में गेट लगाकर नदी के पानी को नियंत्रित करके छोड़ा जाता है. बांध बनाए जाते हैं ताकि पानी रोककर बिजली बनाई जा सके. 

अब ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों पर पहाड़ी इलाकों में बांध बनाए गए हैं. बारिश के दिनों में जब पानी बांध के लिए खतरनाक हो जाता है तो अचानक से गेट खोल दिए जाते हैं, जिससे एक साथ भारी मात्रा में पानी मैदानी इलाकों में आता है, जो हजारों लोगों को उनका घर छोड़ने पर मजबूर कर देता है. 

इसके अलावा घने जंगल भी पानी के बहाव को रोकने का काम करते थे. लेकिन उनकी कटाई की वजह से पानी की रफ्तार को रोकने वाला कोई नहीं रह गया है.नदियों और झीलों पर अवैध अतिक्रमण ने भी बाढ़ के खतरे को बढ़ा दिया है. 

सरकार इसके लिए कितनी जिम्मेदार

सरकारें बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स का वादा करती हैं. कुछ सरकारें नींव का पत्थर रखकर भूल जाती हैं और कुछ सरकारें प्रोजेक्ट को कुछ दूर ले जाकर काम को अधूरा छोड़ देती हैं. असम के साथ भी ऐसा ही होता है. वहां भी बाढ़ को रोकने के लिए बड़े-बड़े प्रोजेक्ट अनाउंस किए जाते हैं, लेकिन वक्त बीतने के साथ अनाउंसमेंट भी खत्म हो जाती है और असम के लोग हर साल बाढ़ का कहर झेलने को मजबूर हो जाते हैं.

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

Congress: तेलंगाना से राज्यसभा के लिए अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी होंगे कांग्रेस के उम्मीदवार, मल्लिकार्जुन खरगे ने की घोषणा
तेलंगाना से राज्यसभा के लिए अभिषेक मनु सिंघवी और वेम नरेंद्र रेड्डी होंगे कांग्रेस के उम्मीदवार, मल्लिकार्जुन खरगे ने की घोषणा
'अमेरिका भारत के पोर्ट्स से ईरान पर दाग रहा मिसाइलें...?', दावे पर विदेश मंत्रालय ने बता दिया क्या है सच
'अमेरिका भारत के पोर्ट्स से ईरान पर दाग रहा मिसाइलें...?', दावे पर विदेश मंत्रालय ने बता दिया सच
ईरान पर हमला करने की डोनाल्ड ट्रंप की पावर रोकने की कोशिश फेल, संसद में पास नहीं हो पाया प्रस्ताव, जानें क्या हुआ
ईरान पर हमला करने की ट्रंप की पावर रोकने की कोशिश फेल, संसद में पास नहीं हो पाया प्रस्ताव, जानें क्या हुआ
US-Israel Attack Iran: ईरान-अमेरिका की जंग में भारत का हो गया बड़ा नुकसान! खाड़ी जा रहे 1000 कंटेनर पोर्ट पर फंसे
ईरान-अमेरिका की जंग में भारत का हो गया बड़ा नुकसान! खाड़ी जा रहे 1000 कंटेनर पोर्ट पर फंसे

वीडियोज

Vasudha: 😧Hanumant का License जब्त गाड़ी और नौकरी दोनों गए हाथ से, अब क्या करेगी Vasudha?
Israel Iran War: खामेनेई की मौत से जल उठा Pakistan ! | Khamenei | Trump । Iraq Protest | Breaking
Israel Iran War: Beirut में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर इजरायली सेना का बड़ा हमला| Netanyahu | Trump
Israel Iran War: Khamenei को इजरायली फोर्स IDF ने बताया आतंकी | Netanyahu | Trump
Israel Iran War: B2 बॉम्बर की एंट्री..तबाह हो जाएगा ईरान! | Khamenei | Trump | Netanyahu | Breaking

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'अब होर्मुज को लेकर धमकी नहीं दे पाएगा ईरान', ऐसा क्या करने जा रहे ट्रंप जिससे खत्म होगी भारत की टेंशन?
'अब होर्मुज को लेकर धमकी नहीं दे पाएगा ईरान', ऐसा क्या करने जा रहे ट्रंप जिससे खत्म होगी भारत की टेंशन?
पटना: फूट-फूटकर रोने लगे JDU नेता, CM नीतीश को दिल्ली भेजने के पीछे साजिशकर्ता कौन?
पटना: फूट-फूटकर रोने लगे JDU नेता, CM नीतीश को दिल्ली भेजने के पीछे साजिशकर्ता कौन?
Nepal Elections 2026: Gen Z आंदोलन के बाद पहली बार नेपाल में आज चुनाव! जानें किसके बीच कांटे की टक्कर
Gen Z आंदोलन के बाद पहली बार नेपाल में आज चुनाव! जानें किसके बीच कांटे की टक्कर
कांग्रेस ने हरियाणा से राज्यसभा उम्मीदवार का किया ऐलान, कर्मवीर सिंह बौद्ध को बनाया प्रत्याशी
कांग्रेस ने हरियाणा से राज्यसभा उम्मीदवार का किया ऐलान, कर्मवीर सिंह बौद्ध को बनाया प्रत्याशी
IND vs ENG Semifinal Live Streaming: तुरंत नोट कर लें समय, आज सेमीफाइनल में इंग्लैंड से भिड़ेगी टीम इंडिया, जानिए कब-कहां देखें लाइव
IND vs ENG Semifinal Live: आज सेमीफाइनल में इंग्लैंड से भिड़ेगी टीम इंडिया, कब-कहां देखें लाइव
एक्टिंग से दूर रहकर भी करोड़ों कमाती है अनिल कपूर की छोटी बेटी, जानें कहां से कमाई करती हैं रिया कपूर
एक्टिंग से दूर रहकर भी करोड़ों कमाती है अनिल कपूर की छोटी बेटी, जानें कहां से कमाई करती हैं रिया कपूर
Video: वरमाला के वक्त अचानक चरमराया डोला स्टेज, लड़खड़ाकर गड्ढे में गिरे दूल्हा दुल्हन, वीडियो वायरल
वरमाला के वक्त अचानक चरमराया डोला स्टेज, लड़खड़ाकर गड्ढे में गिरे दूल्हा दुल्हन, वीडियो वायरल
YouTube वीडियो पर 50,000 व्यूज आने पर कितनी कमाई होगी? यहां जानें पूरा हिसाब-किताब और इनकम बढ़ाने का तरीका
YouTube वीडियो पर 50,000 व्यूज आने पर कितनी कमाई होगी? यहां जानें पूरा हिसाब-किताब और इनकम बढ़ाने का तरीका
Embed widget