दिल्ली में आज बजेगा चुनावी बिगुल, जानें क्या कहता है राजधानी का चुनावी इतिहास?
दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटें हैं. बताया जा रहा है कि चुनाव एक चरण में ही होगा. विधानसभा चुनाव 15 फरवरी से पहले ही कराए जाएंगे, क्योंकि 15 फरवरी से बोर्ड परिक्षाएं शुरू हो रही हैं.

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आज तारीखों का एलान होने वाला है. दोपहर साढ़े तीन बजे चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस होने वाली है. इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में तारीखों का एलान होगा. दिल्ली में विधानसभा की 70 सीटें हैं. बताया जा रहा है कि चुनाव एक ही चरण में होगा. चुनाव फरवरी के पहले या दूसरे हफ्ते में कराए जा सकते हैं.
चुनाव की तारीखों के एलान के साथ ही दिल्ली में अचार संहिता लागू हो जाएगी. इसके बाद सरकार किसी भी योजना का एलान नहीं कर पाएगी. दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी को खत्म होगा. नियमों के मुताबिक, उससे पहले ही चुनाव संपन्न कराकर नई विधानसभा का गठन करना होगा.
2015 में दिल्ली के चुनावी कार्यक्रम की बात करें तो 12 जनवरी 2015 को चुनावों की घोषणा हुई थी. मतदान 7 फरवरी 2015 को हुआ था और वोटों का रिजल्ट 10 फरवरी 2015 को आया था.
क्या था दिल्ली में 2015 का चुनाव परिणाम? दिल्ली में विधानसभा की कुल 70 सीटें हैं और बहुमत के लिए 36 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए. 2015 के चुनावी नतीजों की बात करें तो आम आदमी पार्टी ने बंपर जीत हासिल की थी. आप के खाते में 67 सीटें और 54.34% वोट शेयर आया था. किरन बेदी के नेतृत्व चुनाव लड़ने वाली बीजेपी को तीन सीटें मिली थी और लेकिन बीजेपी 32.19% वोट शेयर पर कब्जा जमाया था. कांग्रेस का इस चुनाव में खाता भी नहीं खुला था. कांग्रेस की झोली में 9.65% वोट शेयर आया था.
दिल्ली में 2019 लोकसभा के नतीजे क्या कहते हैं? दिल्ली में लोकसभा की सात सीटें हैं, 2019 में मोदी लहर पर सवार बीजेपी ने सातों सीटों पर कब्जा जमाया था. वोट शेयर की बात करें तो लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 56.86%, कांग्रेस को 22.63% और आम आदमी पार्टी को 18.2% वोट मिले थे.
कब-कब किसकी सरकार रही? दिल्ली के चुनावी इतिहास की बात करें तो साल 1993 में बीजेपी ने मदन लाल खुराना के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. साल 1993 से 1996 तक खुराना दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे. इसके बाद कुर्सी पर बैठे साहिब सिंह वर्मा 1996 से 13 अक्टूबर 1998 तक मुख्यमंत्री रहे. 13 अक्टूबर 1998 से 3 दिसंबर 1998 सुषमा स्वराज दिल्ली की गद्दी संभाली.
इसके बाद साल 1998 से दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं कांग्रेस नेता शीला दीक्षित जिन्होंने लगातार तीन चुनाव जीते. 2003 और 2008 के चुनाव में भी शीला दीक्षित ने सरकार बनायी. 2013 में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकरा बनायी जो महज दो साल ही चली. 2015 में हुए चुनाव में अर्विंद केजरीवाल ने बंपर जीत दर्ज की.
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