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क्या मलेरिया की दवा से होगा कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज? इसे लेकर क्या है दावा

आईसीएमआर ने साफ किया कि यह सिर्फ उन हेल्थ केयर कर्मचारियों के लिए है जिसमें डॉक्टर नर्स और पैरामेडिक्स शामिल हैं.इनके अलावा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोग जैसे उसके परिवार को है दवा दी जाएगी. 

नई दिल्ली: क्या मलेरिया की दवा से होगा कोरोना संक्रमित मरीज का इलाज? ये सवाल पिछले कुछ दिनों से लगातार पूछे जा रहे है. भारत में ये दवा सिर्फ हेल्थ केयर और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों के लिए है. अभी इसे मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. लेकिन चीन और अमेरिका जैसे देशों का दावा है की ये दावा इस बीमारी का इलाज कर सकती है.

हाल में अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था की मलेरिया की बीमारी का इलाज करने के लिए इस्तेमाल होने वाली हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन के इस्तेमाल से कोरोना के मरीजों का इलाज हो सकता है. उन्होंने अपने देश में इसपर हुई शोध और नतीजे के हवाले से ये दावा किया था. वहीं चीन, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों ने भी इस दवा के इस्तेमाल से अपने यहां संक्रमित मरीजों का इलाज किया और उसमे कुछ ठीक हुए थे.

दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के डॉ एस पी ब्योत्रा बताते हैं जब कोविड-19 की शुरुआत हुई तो चीन के वुहान में चाइनीस डॉक्टर ने कुछ लोगों को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दी. उनकी स्टडी बड़ी छोटी थी 35 लोगों पर ये स्टडी की गई जिसमें 35 लोगों को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दिया और बाकी 35 लोगों को कन्वेंशनल ट्रीटमेंट किया. उनके रिकॉर्ड्स बताते हैं कि जितने मरीजों को उन्होंने हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन दी थी उनको रिजल्ट अच्छे आए हैं. उनके जो एक्स-रे और सीटी स्कैन की रिपोर्ट थी वह बहुत बेहतर आई. उनकी डिजीज कंपेरटिवली माइल्ड रहे और वह जल्दी रिकवर हुए.उनका यह ऑब्जर्वेशन था कि जो हेल्थ वर्कर पेशेंट को ट्रीट करते हैं उनको बचाव के लिए दिया जाए ताकि उनको इस बीमारी से बचाव भी करें.

लेकिन भारत सरकार और डॉक्टरों का मानना है की इसको लेकर कोई स्टडी या रिपोर्ट नहीं है. वहीं जिन दावों के आधार पर ये बात कही जा रही है वो शॉर्ट स्टडी और ट्रायल है कोई ठोस सबूत नहीं है. आईसीएमआर ने इसको लेकर कहा की सैंपल साइज बहुत छोटा है और ट्रायल भी ऐसे में इस पर आंख मूंद कर विश्वास नहीं कर सकते है.

हालांकि आईसीएमआर द्वारा बनाई गया टास्क फोर्स ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल में आने वाली दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन को कोरोना संक्रमित मरीज के इलाज करनेवाले हेल्थ केयर वर्कर जैसे डॉक्टर नर्स और पैरामेडिक्स के लिए के सुझाई है. इनके अलावा संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए लोग जैसे उसके परिवार को है दवा दी जाएगी. ये दावा सिर्फ बचाव के लिए है.भारत में सिर्फ इन्हीं लोगों के लिए दावा है ना की किसी संक्रमित मरीज के लिए. आईसीएमआर ने इस दवा के इस्तेमाल के लिए आर्डर जारी किया हुआ है. आईसीएमआर ने इसे सभी मरीजों को देने के बारे में अभी कोई सूचना नहीं जारी की है.

आईसीएमआर के साइंटिस्ट रमन गनागाखेड़कर के मुताबिक " अमेरिका में सिर्फ 30% लोगों पर इसका टेस्ट हुआ या उन्हें दी. वहीं इसपर कोई डिटेल रिपोर्ट या डाटा नहीं है. दवा ऐसे देने के लिए डाटा की जरूरत होती है जो अभी नहीं है. इसलिए कुछ और इंतजार करना चाहिए."

दिल्ली के गंगाराम हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसन के डॉक्टर, डॉ एस पी ब्योत्रा के मुताबिक "अभी बहुत थोड़ी सी जानकारी है थोड़ी सी ट्रायल है थोड़े से पेशेंट पर जो दवाई देनी आती है उसके लिए हम कभी कह सकते कि सबके लिए इसका फायदा होगा. लोगों से भी कहेंगे कि यह अपने आप कोई दवाई नाले हर दवाई का टॉक्सिक इफेक्ट होता है. कुछ तकलीफ भी हो सकती है."

आपको बता दे वैसे आईसीएमआर के ऑर्डर से पहले राजस्थान के जयपुर में कोरोना के मरीजों के इलाज में इसी दवा का इस्तेमाल किया गया था. तबसे इस दवा को लेकर चर्चा है. लेकिन इसके अलावा भी कुछ और दवाई भी इस्तेमाल हुई थी.

क्या है हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन और क्लोरोक्वाइन

क्लोरोक्विन एक कॉमन दवा है 1940 के दशक में बनी थी और आज भी वही चल रही है. ये दावा मलेरिया जैसी बीमारी के लिए थी. ये बड़ी सिम्पल और सस्ती दवा है. इस दवा का मलेरिया के इलाज के अलावा कई और बीमारियों में इस्तेमाल होता था खासकर ऑटोइम्यून डिजीज वह बीमारी जिसमें पता नहीं चलता कि क्यों हो जाती हैं जिसमें सबसे कॉमन है आर्थराइटिस जिसे गठिया कहा जाता है. इसी तरह से त्वचा रोग और कई अन्य बीमारियों में इस दवाई से असर होता था. तो बाकी दवाइयों के साथ इसका भी इस्तेमाल शुरू हो गया. पहले सिर्फ क्लोरोक्विन आया करती थी. लेकिन इस दवाई में टॉक्सिक होते थे जिससे लोगों को कुछ दिक्कत होती खास तौर पर आंखो में. इसलिए क्लोरोक्विन में के छोटा बदलाव किया गया. एक आर्ट मॉलिक्यूल चेंज किया जिसके बाद इसे हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन कहा जाने लगा. आम मार्केट में से एचसीक्यूएस कहते हैं यह दवा भी कोई बहुत महंगी नहीं है.

जिन देशों में मलेरिया सबसे बड़ी समस्या है वहां ये दवाई बड़ी आसानी से मिलती और बनती है. वहीं ये दावा ज्यादा महंगी भी नहीं होती. दुनिया के कई देशों में कई और बीमारी जिसमे आर्थराइटिस, स्किन और बाकी बीमारी में भी इस्तेमाल किया जाता है.

RSS ने साधा जमात पर निशाना, कहा- इनकी विकृत सोच से बढ़ी कोरोना मरीजों की संख्या रिपोर्टर डायरी:  ये ऐसे दिन हैं जिनकी कल्पना कुछ दिनों पहले तक लोग काल्पनिक निबंध लिखने तक में नहीं कर सकते थे

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