'अब नई रणनीति के साथ करेंगे वापसी', रिहाई के बाद बोले CJP नेता आशुतोष रांका
सीजेपी के नेता आशुतोष रांका ने रिहाई के बाद एक इंटरव्यू दिया है. इसमें उन्होंने बताया है कि अब पार्टी नई रणनीति के साथ वापसी करेगी.

कॉकरोच जनता पार्टी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली थी. प्रदर्शन से पहले सीजेपी के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया था. पार्टी के नेता आशुतोष रांका ने कहा है कि उन्होंने प्रोटेस्ट और पुलिस की कार्रवाई की विस्तार से समीक्षा की है. अब वो एक नई रणनीति के साथ वापसी करेंगे.
आशुतोष रांका ने हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में अपनी नई रणनीति के बारे में बात की. उन्होंने कहा, हमने पिछले तीन दिनों में जो कुछ हुआ है, उसका जायजा लिया है, और हम एक अलग स्ट्रेटेजी के साथ वापस आएंगे. पार्टी की कोर टीम, राज्य कोऑर्डिनेटर और पदाधिकारियों ने विरोध प्रदर्शनों और अपने सदस्यों के खिलाफ पुलिस की कथित बर्बरता पर चर्चा करने के लिए बैठक की.
फ्लाइट से हिरासत में लिए गए
आशुतोष से सीजेपी के नेताओं के प्लेन से हिरासत में लिए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, हम हैरान रह गए जब हमने देखा कि फ्लाइट के उतरते ही उससे बाहर निकलने वाली सीढ़ियां लगा दी गई थीं और उन पर करीब 30 पुलिसकर्मी खड़े थे. तभी हमें एहसास हुआ कि वे हमारे लिए ही वहां आए थे. यहां तक कि फ्लाइट के स्टाफ को भी इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि ऐसा कुछ होने वाला है. वे हमें बस में ले गए और जब बस गेट पर पहुंची, तो हम तीनों को अलग-अलग प्राइवेट गाड़ियों में तीन अलग-अलग जगहों पर भेजा गया.
अभिजीत को वसंत एन्क्लेव के स्पेशल स्टाफ क्वार्टर, सौरव को आरके पुरम और मुझे एयरपोर्ट से 40 किलोमीटर दूर नजफगढ़ भेजा गया. हमें पूरे दिन वहीं रखा गया. रात 2:30 बजे मुझे नजफगढ़ से दीपके की लोकेशन पर ले जाया गया.
स्टेशन में ठीक बर्ताव किया गया
स्टेशन पर हमारे साथ ठीक बर्ताव किया गया. उन्होंने हमें खाना दिया और ठीक से बात की लेकिन हमें अपने वकीलों से बात नहीं करने दी. आखिरकार सुबह 3 बजे उन्होंने हमें बताया कि हमें गिरफ्तार कर लिया गया है और हम अपने वकीलों को फोन कर सकते हैं, और सुबह 8 बजे हमें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा.
वे चाहते थे कि हम अपने माता-पिता को फोन करें, लेकिन उन्होंने हमें अपने वकीलों से बात नहीं करने दी. मुझे सुबह 4 बजे अपने पिता को फोन करके वकील का इंतजाम करने के लिए कहना पड़ा. तब भी, मुझे उनसे सीधे बात नहीं करने दी गई. इंस्पेक्टर ने उनसे बात की.
पूरी रात हमे परेशान किया
आशुतोष ने कहा, पूरी रात वे हमें किसी न किसी बात पर परेशान करते रहे. रात करीब 10:30 बजे मेरी मेडिकल जांच हुई. रात 11:30 बजे कोई मेरा शुगर लेवल चेक करने आया. रात 12:30 बजे वे मुझे 40 किलोमीटर दूर एक दूसरे पुलिस स्टेशन ले गए और एक घंटे तक कार में ही बिठाए रखा. उन्होंने पूरी रात हमें परेशान किया. पुलिस वालों को लगातार फोन आ रहे थे. एक समय हमें लगा कि वे हमारे खिलाफ मनमानी धाराएं लगाना चाहते हैं ताकि हमें कुछ दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा जा सके. एक समय तो हमें पक्का लगा कि वे हमें नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत गिरफ्तार कर सकते हैं.
देर रात सुप्रीम कोर्ट में 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर होने और अगली सुबह सुनवाई तय होने के बाद ही पुलिस ने हमें औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया.
क्या एक तय समय तक विरोध-प्रदर्शन नहीं करेंगे?
पुलिस का दावा है कि आपने ऐसे फॉर्म पर साइन किए थे जिनमें कहा गया था कि आप एक तय समय तक विरोध-प्रदर्शन नहीं करेंगे. क्या यह सच है? इस पर आशुतोष ने कहा, मुझे लगता है कि यह सब बेतुका है. यह शांति बनाए रखने के बारे में एक आम बयान था, जिस पर धारा 170 के तहत रिहा होने के बाद हर कोई दस्तखत करता है. इसका मतलब यह नहीं है कि हम तय की गई जगह पर विरोध-प्रदर्शन नहीं कर सकते. ऐसा कोई भी बॉन्ड हमें ऐसा करने से नहीं रोक सकता, और हम ऐसा करेंगे.
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