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नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में क्या हैं अमित शाह के तर्क, मुसलमान इसका हिस्सा क्यों नहीं? जानिए

नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में अमित शाह ने लोकसभा और राज्यसभा में क्या तर्क दिए हैं आइए जानते हैं...

नई दिल्ली:  नागरिकता संशोधन बिल भारी हंगामें के बाद लोकसभा में कल पास हो गया. आज राज्यसभा में इसे पेश किया गया. वहां भी इस बिल को लेकर बहस जारी है. जहां कांग्रेस समेत कई विपक्षी राजनीतिक दल सरकार पर यह आरोप लगा रहे हैं कि यह बिल संविधान के मूल सिद्धांत के खिलाफ है तो वहीं इस बिल को पेश करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपना पक्ष भी मजबूती के साथ रखा. उनका कहना था कि बिल कहीं से भी संविधान के खिलाफ नहीं है और न ही इससे किसी भी तरह से भारत के मुसलमानों के साथ भेदभाव होगा. आइए जानते हैं अमित शाह ने बिल के पक्ष में लोकसभा से राज्यसभा तक क्या-क्या तर्क दिए हैं....

1- बिल का धर्म से कोई लेना-देना नहीं

अमित शाह ने कहा कि जो इस बिल को धर्म से जोड़ रहे हैं वो गलत हैं. इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर किसी ने किया है तो कांग्रेस पार्टी ने किया है. अगर देश विभाजित नहीं होता तो आज इस बिल की जरूरत ही नहीं पड़ती.

2-साबित करें बिल संविधान के खिलाफ है

विपक्ष के इस आरोप पर कि यह बिल संविधान के खिलाफ है अमित शाह ने कहा,'' जो बिल मैं सदन में लेकर आया हूं वो बिल किसी भी आधार पर संविधान के किसी भी आर्टिकल का उल्लंघन नहीं करता है. अगर विपक्ष को लगता है ऐसा है तो इसे साबित कर दे. हम बिल वापस ले लेंगे.''

3-पहली बार नहीं बन रहा है नागरिकता कानून

अमित शाह ने कहा कि ऐसा नहीं है कि पहली बार कोई सरकार नागरिकता को लेकर कानून बनाने का निर्णय कर रही है. 1978 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने एक निर्णय लिया कि बांग्लादेश से जितने भी लोग आए हैं सभी को नागरिकता दी जाएगी.

4- दूसरे देशों के मुसलमानों के लिए बिल में जगह क्यों नहीं ?

दूसरे देशों के मुसलमानों के लिए बिल में जगह क्यों नहीं ? विपक्ष के इस सवाल पर गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के संविधान में राज्य का धर्म इस्लाम माना गया है. इस कारण वहां के अल्पसंख्यकों को न्याय मिलने की उम्मीद कम हो जाती है. पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के मुसलमान उन देशों में अल्पसंख्यक नहीं हैं इसलिए उनके लिए यह प्रावधान बिल में नहीं किया जा रहा है.

5- पाकिस्तान में घटी है अल्पसंख्यकों की संख्या

अमित शाह ने कहा कि जब देश का विभाजन हुआ तो उस दौरान नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था. इस समझौते के मुताबिक कहा गया था कि दोनों देश अपने-अपने अल्पसंख्यकों की रक्षा करेंगे, लेकिन, 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या 23 फ़ीसदी थी और 2011 में यह कम होकर 3.7 फ़ीसदी हो गई. इस बिल के पास हो जाने पर यातना का जीवन जी रहे लोगों को राहत मिलेगी और वह सम्मान का जीवन जी सकेंगे. विदेशों में अल्पसंख्यक लगातार कम हो रहे हैं.

6-बांग्लादेश में लगभग 20% अल्पसंख्यकों की आबादी कम हुई

अमित शाह ने कहा है कि उस समय के पूर्वी पाकिस्तान और अब के बांग्लादेश में लगभग 20% अल्पसंख्यकों की आबादी कम हो चुकी है. आखिर कहां गए वो लोग, या तो वो मार दिए गए या धर्म परिवर्तन हो गया या वो लोग शरणार्थी बनकर अपने धर्म और सम्मान को बचाने के लिए भारत आ गए? जो अपने देश में प्रताड़ित होता रहा है और जो अपना धर्म और महिलाओं की इज्जत बचाने के लिए भारत आया है, वो शरणार्थी है और जो बिना अनुमति अवैध रूप से देश में घुस आया है वो घुसपैठिया है.

7- अनुच्छेद-14 का उल्लंघन नहीं है बिल

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण के दौरान तर्क दिया कि अनुच्छेद-14 के आधार पर ऐसे क़ानून नहीं बन सकते हैं तो अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों के लिए क़ानून कैसे बना है. उन्होंने कहा कि यह बिल किसी भी सूरत में अनुच्छेद-14 का उल्लंघन नहीं है.

8-भारत के मुसलमानों के लिए कोई चिंता की बात नहीं

अमित शाह ने कहा है कि कुछ लोगों द्वारा भ्रांति फैलाई जा रही है कि ये बिल मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है. जो इस देश के मुसलमान हैं उनके लिए इस बिल में कोई चर्चा या चिंता का उल्लेख नहीं हैं. फिर ये किसकी चिंता कर रहे हैं?

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