जल्लीकट्टू का बिल तमिलनाडु विधानसभा से पास, चेन्नई में प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने फूंकी गाड़ियां

चेन्नई: जल्लीकट्टू को लेकर तमिलनाडु में आज जमकर हिंसा हुई. चेन्नई से लेकर कोयंबटूर हर जगह प्रदर्शनकारियों ने हिंसा और आगजनी का सहारा लिया. स्थिति को हाथ से बाहर जाते देख राज्य सरकार को केंद्र से मदद मांगनी पड़ी.
बहरहाल हिंसा के बीच करीब साढे पांच बजे तमिलनाडू विधानसभा में सर्वसहमति से जल्लीकट्टू पर बिल पास हुआ. सरकार ने पशुओं पर क्रूरता से जुड़े बिल में संशोधन किया. इसके साथ ही तमिलनाडु में जलीकट्टू का आयोजन वैध हो गया है. सरकार के फैसले के बाद मरीना बीच पर जलीकट्टू का समर्थन कर रहे लोगों ने अपना विरोध वापस लिया. अब मरीना बीच से भीड़ हट गई है.
चेन्नई ही नहीं आज तमिलनाडु के दूसरे हिस्सों में जबर्दस्त हिंसा हुई है. मदुरै से लेकर कोयंबटूर हर जगह हिंसक प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उन्हें अध्यादेश नहीं कानून चाहिए. जिससे इस समस्या का हमेशा के लिए खत्म किया जा सके. उधर पशु अधिकारों से जुड़ी संस्था पेटा का कहना है कि वो तमिलनाडु सरकार के नए बिल को समझने की कोशिश करेंगे और उसके बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे.पुट्टुकोट्टाई में 2 की मौत, कई घायल
जल्लीकट्टू खेल में पुदुकोट्टाई में दो लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में एक खेल का आयोजनकर्ता था और दूसरा इसमें भाग ले रहा था. हादसों को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने इसके लिए कुछ गाइडलाइंस जारी की हैं-
- जहां खेल का आयोजन हो रहा है वहां सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं.
- सांड को छोड़े जाने से पहले उसे कम से कम 20 मिनट का आराम और डॉक्टरी जांच कराई जाए.
- सांडों को भागने के लिए कम से कम 60 स्क्वायर फीट जगह होनी चाहिए.
- खिलाड़ी सिर्फ सांड की कूबड़ ही पकड़ सकते हैं, पूंछ नहीं खींच सकते.
पुदुकोट्टाई और तिरुचिरापल्ली में तो जल्लीकट्टू हो गया. मदुराई जिले के अलंगानल्लूर में प्रदर्शनकारियों ने जल्लीकट्टू का उद्घाटन करने पहुंचे मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम को खाली हाथ लौटा दिया.
पक्का समाधान दे राज्य सरकार- प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि जल्लीकट्टू पर फिर रोक न लगे. सरकार पहले इसका फाइनल इंतजाम करे. तभी हम जल्लीकट्टू मनाएंगे. प्रदर्शनकारी, पशुओं के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने वाली संस्था पेटा पर भी बैन की मांग कर रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार का कैवियट
जल्लीकट्टू के अध्यादेश के खिलाफ पेटा फिर अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है. ये देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैवियेट भी दाखिल कर दिया है. पेटा की अपील पर ही सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में जल्लीकट्टू पर बैन लगा दिया था. बाद में तमिलनाडु सरकार ने याचिका दायर की थी, जिसमें फैसले की समीक्षा की बात कही गई थी, लेकिन कोर्ट ने उसे भी नामंजूर कर दिया था.
क्या है जल्लीकट्टू? साडों को काबू करने वाले चार हजार साल पुराने इस पारंपरिक खेल को जल्लीकट्टू कहते हैं. इसे हर साल पोंगल त्योहार के मौके पर खेला जाता है. जल्लीकट्टू में सांड के सींग पर कपड़ा बांधा जाता है. जली का अर्थ तमिल में सल्लि या सिक्के से है और कट्टू का अमतलब थैली होता है. जो खिलाड़ी सांड के सींग पर बांधे हुए इस कपड़े को निकाल लेता है उसे ईनाम में पैसे मिलते हैं. इस खेल को बहादुरी के प्रदर्शन के तौर पर देखा जाता है. पशुओं के साथ क्रूरता को आधार मानकर सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में इस खेल पर बैन लगा दिया था.Source: IOCL























