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Brahma Kamalam Flower: ब्रह्म कमल का फूल, जानें धार्मिक महत्व और औषधीय गुण

Brahma Kamalam Flower: प्राचीन मान्यता के मुताबिक ब्रह्म कमल का नामकरण ब्रह्मदेव के नाम पर किया गया है. इस फूल के कई धार्मिक महत्व भी हैं.

नई दिल्लीः Brahma Kamalam Flower:  ब्रह्म कमल का फूल एक अद्भुत फूल है. यह फूल साल में एक ही बार खिलते हैं. यह फूल अगस्त या सितंबर महीने में खिलते हैं. इस फूल को खिलने में करीब दो घंटे का समय लगता है. यह फूल हिमालय के तराई वाले राज्यों में ही पाया जाता है. ब्रह्म कमल खासकर उत्तराखंड राज्य का पुष्प है. यहां पर इनके फूलों की खेती भी होती है. यह फूल विशेषतौर पर राज्य में पिंडारी से लेकर चिफला, रूपकुंड, हेमकुण्ड, ब्रजगंगा, फूलों की घाटी, केदारनाथ तक पाया जाता है.

वैज्ञानिक नाम सोसेरिया ओबोवेलाटा

इस फूल को भारत कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे- हिमाचल में दूधाफूल, कश्मीर में गलगल और उत्तर-पश्चिमी भारत में बरगनडटोगेस के नाम से प्रसिद्ध है. यह फूल बेहद सुंदर होता है. इसे दिव्य फूल भी कहा जाता है. इस फूल का वैज्ञानिक नाम सोसेरिया ओबोवेलाटा है.

फूल का धार्मिक महत्व

इस फूल को सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इस फूल धार्मिक महत्व भी है. मान्यताओं के मुताबकि ब्रह्म कमल मां नंदा का प्रिय पुष्प है. इसलिए इसे नंदा अष्टमी में तोड़ा जाता है. ब्रह्मकमल का अर्थ ही है 'ब्रह्मा का कमल'. कहते हैं कि केवल भग्यशाली लोग ही इस फूल को खिलते हुए देख पाते हैं और जो ऐसा देख लेता है, उसे सुख और संपत्ति की प्राप्ति होती है.

फूल का औषधीय उपयोग

ब्रह्म कमल फूल के कई औषधीय उपयोग भी होते हैं. इसका उपयोग जले-कटे में, सर्दी-जुकाम, हड्डी के दर्द आदि में इसका प्रयोग किया जाता है. इससे निकलने वाले पानी को पीने से थकान दूर हो जाता है.

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