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जानिए, गुजरात ही नहीं महाराष्ट्र, असम में क्यों बिहारी हिंसा की ज़द में होते हैं?

गुजरात के साबरकांठा में रेप की एक घटना के बाद बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. ऐसा नहीं है कि पहली बार हिंदी भाषी प्रदेश के लोगों को निशाना बनाया गया है. इससे पहले असम और महाराष्ट्र में भी बिहार के लोगों पर हमले हुए.

नई दिल्ली: ''घर के बाहर मेरा बेटा खेल रहा था. इसी दौरान लोगों ने हमला कर दिया. वो सदमे में है.'', ''मुझसे पूछा गया कि मैं कहां से हूं. मैंने झूठ बोला और कहा कि मैं राजस्‍थान से हूं. फिर मैंने राजस्थान के एक जिले के नाम बताए. मैं समझाने में कामयाब रहा कि मैं यूपी, बिहार या एमपी से नहीं हूं. मैं आगे बढ़ गया. लेकिन उन लोगों (हमलावरों) ने एक गाड़ी में आग लगा दी.'', ''सुबह 9 बजे से पहले गुजरात छोड़ दो वर्ना मारा जाएगा.'' धमकियों और हमलों के डर से गुजरात छोड़ने को मजबूर हुए हजारों लोगों में से ये वो चंद बदहवास लोग हैं जिन्होंने अपनी कहानी एक अंग्रेजी अखबार को बयां की.

दरअसल, गुजरात के साबरकांठा जिले में रेप के बाद से स्थानीय संगठन गैर-गुजरातियों को निशाना बना रहे हैं. रेप का आरोप बिहार के रहने वाले रविंद्र साहू नाम के एक मजदूर पर है. इसी बहाने हिंदी भाषी बिहारी, यूपी और एमपी के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. स्थानीय लोगों के हमलों के डर से इन बाहरी लोग ने फैक्ट्रियों में काम देने से इनकार कर दिया है. आज हजारों लोग रोजगार छोड़, जान की सुरक्षा के लिए घर वापस लौट रहे हैं. लोगों को महाराष्ट्र और असम में हुए हमलों की याद आ रही है.

दरअसल, बिहार में रोजगार के संसाधन बहुत ही सीमित होने की वजह से हजारों लोग गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली समेत कई राज्यों में जाते हैं. खासकर बाढ़ प्रभावित रहे कोसी क्षेत्र से मजदूरों का पलायन बड़ी संख्या में होता है. ये लोग छोटे-मोटे धंधे, ठेले, माल ढोने, सिक्योरिटी गार्ड और फैक्ट्रियों में काम करके अपना घर चलाते हैं.

हालांकि सरकारी महकमों के पास यह पुख्ता जानकारी नहीं है कि कितने लोग हर साल रोजगार के लिए बिहार छोड़ते हैं. लेकिन इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि बिहार से दिल्ली, मुंबई, गुजरात, पंजाब को रवाना होने वाली ट्रेनें खचाखच भरी रहती हैं.

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सामाजिक विश्लेषक मानते हैं कि आर्थिक विकास के नजरिये से कमजोर बिहार से आने वाले मजदूर रोजी-रोटी की मजबूरी में कम पैसों पर भी काम करने के लिए तैयार रहते हैं. फैक्ट्रियां भी आसानी से उन्हें रोजगार दे देती है. पंजाब और हरियाणा में फैक्ट्रियों में रोजगार के अलावा फसल की कटाई और बुआई के समय मजदूरों की भारी संख्या में जरूरत पड़ती है. इसके लिए बिहार से आने वाले मजदूर आसानी से मिल जाते हैं.

लेकिन समस्या उस समय खड़ी होती है जब स्थानीय लोगों में असुरक्षा का माहौल बनता है. उन्हें अपनी संस्कृति और संसाधन खोने का डर सताने लगता है. स्थानीय लोगों को मुकम्मल रोजगार न मिलने का डर रहता है. और इसे हवा देते हैं स्थानीय संगठन और नेता.

जानिए, उस रेप की घटना को जिसकी वजह से गुजरात छोड़ भाग रहे हैं बिहार-यूपी वाले

याद कीजिए 2008 को जब राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) और अन्य संगठनों ने महाराष्ट्र खासकर मुंबई में बिहार और यूपी के लोगों को निशाना बनाना शुरू किया. 19 अक्बटूर 2008 को रेलवे की परीक्षा में शामिल होने आए उत्तर भारतीय छात्रों के साथ एमएनएस कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर मारपीट की और उनके एडमिट कार्ड तक फाड़ डाले थे. हमले में चार छात्रों की मौत हो गई थी.

तब एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था, "बिहारियों ने मॉरीशस की पथरीली धरती से सोना निकाला और उसे अंग्रेजों के जुल्म से आजाद कराया और यही बिहारी महाराष्ट्र और गुजरात में समृद्धि लाए. और अब हालत यह है कि इन्हीं लोगों के साथ बेहरमी का सुलूक किया जा रहा है."

गुजरात में हिंसा के बाद घर छोड़ने पर मजबूर हुए दूसरे राज्यों के लोग

90 के दौर में बिहार के लोगों ने पूर्वोत्तर की ओर भी रुख किया. लेकिन वहां भी वे एंटी बिहारी मूवमेंट के शिकार बने. 1979 के बाद असम और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में बिहार के लोगों के अलावा बांग्लादेशी, बंगाली और मारवाड़ी को निशाना बनाया गया. एक रिपोर्ट के मुताबिक बड़े स्तर पर हुई हिंसा में 2000 और 2003 में बिहार के 200 लोगों की मौत हुई. उग्रवादी संगठन उल्फा ने भी बिहार के लोगों को निशाना बनाया. स्थानीय लोगों में यह दहशत फैलाया गया कि बिहार के लोगों की बढ़ती संख्या की वजह से संस्कृति और भाषा खत्म हो जाएगी.

हालिया समय की बात करें तो राजस्थान के कोटा में भी एंटी बिहारी मूवमेंट को हवा देने की कोशिश की गई. कोटा में इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई के लिए काफी संख्या में बिहार के छात्र रहते हैं. छात्रों के खिलाफ बीजेपी विधायक भवानी सिंह ने कहा था, ''बिहार के छात्र शहर का माहौल खराब कर रहे हैं, उन्हें शहर से निकाला जाना चाहिए.''

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सवाल उठता है कि जब संविधान देश के किसी भी कोने में, किसी भी शख्स को जाने, काम करने की इजाजत देता है तो फिर क्यों क्षेत्र के आधार पर उनपर हमले किये जाते हैं? उन्हें काम छोड़कर अपने राज्य की ओर लौटना पड़ता है? भद्दे कमेंट्स सुनने पड़ते हैं? इन सब का एक जवाब है क्षेत्रीय राजनीति.

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