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बिहार चुनाव: नीतीश और नड्डा मिले तो सही पर टिकट बंटवारे पर बातचीत नहीं हुई

ठीक दस सालों बाद बीजेपी और जेडीयू मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगी. 2010 में दोनों साथ साथ लड़े थे. नीतीश कुमार की अगुवाई में गठबंधन को बंपर जीत मिली थी.

नई दिल्ली: मुलाक़ात हुई, बात हुई, हाल-समाचार भी. लेकिन जैसी चर्चा है देश भर में, वैसा कुछ नहीं हुआ. क़रीब घंटे भर तक नीतीश कुमार और जे पी नड्डा साथ रहे. लेकिन सीटों के बंटवारे पर तो कोई बातचीत ही नहीं हुई. न ही चिराग़ पासवान और उनकी लोक जनशक्ति पार्टी का ज़िक्र हुआ. बस बात इतने पर ख़त्म हुई कि जल्द ही सब कुछ फ़ाइनल कर लिया जाए. अब चुनाव में समय बहुत कम बचा है.

बिहार के सीएम नीतीश कुमार के घर पर बैठक हुई. जेडीयू सांसद ललन सिंह सबसे पहले पहुंचे, फिर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल, डिप्टी सीएम सुशील मोदी और बीजेपी महासचिव भूपेन्द्र यादव. नीतीश के घर सबसे आख़िर में पहुंचे बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा. घंटे भर सब साथ रहे. चाय पर चर्चा हुई. लेकिन सीटों के फ़ार्मूले पर नहीं. जेडीयू कितनी सीटों पर लड़ेगी ? या फिर बीजेपी को कितनी मिलेंगी ? लोक जनशक्ति पार्टी और जीतन राम मांझी का क्या करें ? इन सब सवालों पर तो किसी ने कोई चर्चा तक नहीं की. टिकट को लेकर एनडीए में मारामारी मची है. लेकिन न तो नीतीश ने सीटों के बंटवारे पर कुछ कहा. न ही जे पी नड्डा ने. वैसे नीतीश कुमार का यही स्टाइल है. वे खुद सीटों को लेकर बातचीत नहीं करते हैं. पार्टी के किसी सीनियर नेता को वे ये ज़िम्मेदारी दे देते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ये काम करते थे.

मीटिंग में बातचीत की शुरूआत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही की. वे बीजेपी नेताओं को बताते रहे कि कोरोना काल में क्या क्या काम हुआ. लॉकडाउन में बाहर से आए 32 लाख लोगों के लिए क्या किया गया ? सबको राशन और बर्तन दिए गए. कई लोगों को नौकरियां दी गईं. मनरेगा में ज़रूरतमंद लोगों को काम दिया गया. नीतीश ने कहा कुछ लोग बयान देते रहते हैं. चिट्ठी लिखते रहते हैं. हमने कभी इस पर कुछ नहीं कहा. नीतीश ने नड्डा को बताया कि वे तो दिन रात काम में जुटे रहे. कोरोना के बीच में बाढ़ आ गई. प्रभावित लोगों तक मदद भेजी गई. अगर लोग सचमुच में सरकार के काम काज से खुश नहीं रहते तो प्रदर्शन होता. कहीं कोई आंदोलन नहीं हुआ.

लोगों का काम है बयान देना वो देते रहते हैं. नीतीश का इशारा चिराग़ पासवान की तरफ़ था. लेकिन उन्होंने चिराग़ का नाम नहीं लिया. नीतीश ने तो ये भी कहा कि उन्होंने पार्टी के नेताओं से कह दिया है कि कोई भी इस चक्कर में न पड़े. आपको बता दें कि चिराग़ पासवान ने कोरोना काल में ख़राब काम को लेकर नीतीश को चिट्ठी लिखी थी. जिसके जवाब में जेडीयू सांसद ललन सिंह ने उन्हें कालिदास तक कह दिया था. मतलब जो जिस डाल पर बैठा है, उसे ही काटने लगता है. नीतीश लगातार अपनी सरकार के काम काज का बखान करते रहे. वे बताते रहे कि दलितों और पिछड़े समाज के लोगों के लिए क्या क्या किया गया है. उन्होंने बिहार में सामाजिक समीकरण की विस्तार से चर्चा की. बीजेपी महासचिव और पार्टी के प्रभारी भूपेन्द्र यादव को उन्होंने राज्य का दौरा कर काम काज देखने को कहा.

ठीक दस सालों बाद बीजेपी और जेडीयू मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगी. 2010 में दोनों साथ साथ लड़े थे. नीतीश कुमार की अगुवाई में गठबंधन को बंपर जीत मिली थी. एनडीए को 243 में से 206 सीटें मिली थीं. जेडीयू को 115 और बीजेपी को 91 सीटें मिली थीं. लोक जनशक्ति पार्टी तब आरजेडी के साथ गठबंधन में थी. 2015 के चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी और बीजेपी का गठबंधन था. जबकि नीतीश कुमार ने लालू यादव और कांग्रेस के साथ मिल कर महागठबंधन बना लिया था.

इस बार जेडीयू, बीजेपी के साथ साथ लोक जनशक्ति पार्टी भी एनडीए में है. गृह मंत्री अमित शाह से लेकर बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा तक कह चुके हैं कि नीतीश कुमार ही सीएम उम्मीदवार होंगे. बिहार चुनाव में वे एनडीए का चेहरा होंगे. दो दिनों पहले ही पीएम नरेन्द्र मोदी भी नीतीश सरकार की तारीफ़ कर चुके हैं. लेकिन चिराग़ पासवान कुछ अलग मूड में हैं. नीतीश से उनकी बन नहीं पा रही है. केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान कह चुके हैं कि वे बेटे के हर फ़ैसले में उसके साथ हैं. जीतन राम मांझी को साथ लेने से भी चिराग़ नाराज़ हैं. उनकी पार्टी की तरफ़ से कहा जा रहा है कि तैयारी 143 सीटें पर लड़ने की है. लेकिन चुनाव से पहले नेता ऐसे ही हवा बनाते रहते हैं.

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि गठबंधन में जेडीयू और बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी ? क्या फ़ार्मूला फ़िफ़्टी फ़िफ़्टी का रहेगा ? जैसा लोकसभा चुनाव में हुआ था. जेडीयू और बीजेपी 17-17 सीटें पर लड़ी थी. जबकि रामविलास पासवान की पार्टी को छह सीटें मिली थीं. या फिर इस बार भी नीतीश कुमार ही बड़े भाई बने रहेंगे. क्योंकि बिहार में एनडीए के लिए वही सबसे बड़े चेहरे बने हुए हैं. लोक जनशक्ति पार्टी के हिस्से में क्या होगा ? जेडीयू 115 सीटें पर लड़ने की बात कर रही है. वो हर हाल में बीजेपी से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. लेकिन बीजेपी इस बार कम से कम बराबरी का फ़ार्मूला चाहती है. बाक़ी बची सीटें चिराग़ पासवान और जीतनराम मांझी को जा सकती हैं.

मामला कुछ सीटों की अदला बदली का भी है. बीजेपी और जेडीयू ने मोटे तौर पर अपनी अपनी लिस्ट बना ली है. नीतीश कुमार की तरफ़ से ललन सिंह ही बातचीत करेंगे. अगर कहीं बात फंसी तो फिर नीतीश तक बात जायेगी. नीतीश कुमार जानते हैं कि मुख्यमंत्री तो वही बनेंगे. इसीलिए वे दो चार सीटें छोड़ने पर भी तैयार हो सकते हैं. लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने भी बड़ा दिल दिखाया था. नरेन्द्र मोदी को पीएम बनाने के लिए बीजेपी ने जेडीयू से फ़िफ़्टी फ़िफ़्टी का समझौता कर लिया था. अब बारी बड़ा दिल दिखाने की नीतीश कुमार की है.

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