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दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी Vodafone को लगा एक और बड़ा झटका

टेलीकॉम क्षेत्र की हालत बीते कुछ सालों के दौरान किसी से छुपी नहीं है. ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद वोडाफोन-आइडिया की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. वोडाफोन पहले से ही ढहने के कगार पर खड़ी है.

नई दिल्ली: दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन को भारतीय बाजार में एक और बड़ा झटका लगा है. कंपनी जहां पहले ही ढहने के कगार पर खड़ी थी, वहीं अब कंपनी के सामने इससे बचने का कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सभी टेलीकॉम कंपनियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कंटेंप्ट नोटिस जारी किया है.

बता दें कि टेलीकॉम कंपनियों ने सुप्रीम कोर्ट के एजीआर मामले पर निर्णय के बावजूद समय रहते 147000 करोड़ रुपये जमा नहीं कराया है. इसीलिए अब सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए टेलीकॉम कंपनियों को कंटेंप्ट नोटिस जारी किया है. ऐसे में सबसे बड़ा सवालिया निशान अब वोडाफोन-आइडिया के सामने आकर खड़ा हो गया है.

वोडाफोन-आइडिया को सबसे ज्यादा 53000 करोड़ रुपये केंद्र सरकार को AGR मामले में चुकाने हैं. वोडाफोन-आइडिया के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला पहले ही कह चुके हैं कि अगर सरकार की तरफ से उन्हें इस मामले में कोई राहत नहीं मिलती है तो उनके सामने कंपनी बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा. जो Vodafone-Idea पहले ही मुश्किलों में फंसी है ऐसे में वह अब अचानक से पैसा कहां से जुट पाएगी. ये सवाल कंपनी के सामने आकर खड़ा हो गया है.

वोडाफोन-आइडिया कि फिलहाल भारतीय बाजार में यह हालत है कि बीते गुरुवार को ही उसने दिसंबर महीने की तिमाही में कुल 6439 करोड़ रुपये का नुकसान दिखाया. वहीं उससे पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी का नुकसान 5005 करोड़ रुपये का था. कंपनी का नुकसान साल दर साल बढ़ रहा है. ऐसे में कंपनी अब AGR मामले का पेमेंट कैसे करेगी?

टेलीकॉम सेक्टर की आखिर यह हालत क्यों हुई?

टेलीकॉम क्षेत्र की हालत बीते कुछ सालों के दौरान किसी से छुपी नहीं है. टेलीकॉम सेक्टर में 2006 में रिलायंस जियो की एंट्री के साथ ही यहां परिस्थितियां बदलनी शुरू हो गई. जिस टेलीकॉम क्षेत्र में कभी देश भर में दर्जन भर से ज्यादा कंपनियां होती थीं, वहां कंपनियों के विलय और अधिग्रहण का दौर शुरू हो गया.

प्राइवेट क्षेत्र की दो बड़ी दिग्गज वोडाफोन और आइडिया को विलय कर जान बचानी पड़ी. लेकिन, अब हालत ऐसी हो गई है कि 30 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ देश की दूसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी होने के बावजूद वोडाफोन-आइडिया आज इस मुहाने पर आ खड़ी हुई है.

शुरुआत में रिलायंस जियो ने बेहद कम कीमतों पर अपनी सेवाएं लॉन्च की. इसके चलते वोडाफोन, आइडिया और एयरटेल को भी कीमतें घटानी पड़ीं. इसके चलते कंपनियों के बीच प्राइस वॉर शुरू हो गया. इस प्राइस वॉर के चलते पुरानी टेलीकॉम कंपनियों की जमीन दरकने लगी. आज यह स्थिति हो गई कि वोडाफोन-आइडिया भारतीय बाजार से जाने की बात कर रही है. टेलीकॉम सेक्टर की मौजूदा हालत पहले से ही खराब थी. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने कंपनियों की नींव को हिलाकर रख दिया है.

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