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Explainer: राष्ट्रपति की मुहर के साथ ही कानून बन जाएंगे कृषि बिल, जानें इन पर क्यों मचा है हंगामा

आढ़तियों और मंडी के कारोबारियों को डर है कि जब मंडी के बाहर बिना शुल्क का कारोबार होगा तो कोई मंडी आना नहीं चाहेगा. वहीं, पंजाब और हरियाणा में एमएसपी पर गेहूं और धान की सरकारी खरीद की जाती है.

नई दिल्ली: राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच तीन में से दो कृषि विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गए. अब राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद दोनों विधेयक कानून बन जाएंगे. उधर विपक्ष के 12 दलों ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया. वहीं, बीजेपी भी सदन में कृषि विधेयकों को पारित किए जाने के दौरान अमर्यादित आचरण करने के आरोपी कुछ विपक्षी सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है.

विपक्षी दलों के हंगामे के बीच उच्च सदन ने रविवार को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दे दी. लोकसभा ने इन्हें 17 सितंबर को ही मंजूरी दे दी थी.

पहले विधेयक के तहत- किसान मनचाही जगह पर फसल बेच सकते हैं. बिना किसी रुकावट दूसरे राज्यों में भी कारोबार कर सकते हैं. APMC के दायरे से बाहर भी खरीद-बिक्री संभव है. ऑनलाइन बिक्री इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग से होगी, जिससे मार्केटिंग लागत बचेगी और बेहतर दाम मिलेंगे. फसल की बिक्री पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.

दूसरे विधेयक के तहत- राष्ट्रीय स्तर पर कॉन्ट्रेक्ट फार्मिंग की व्यवस्था बनेगी. रिस्क किसानों का नहीं, एग्रीमेंट करने वालों पर होगा. किसान कंपनियों को अपनी कीमत पर फसल बेचेंगे. किसानों की आय बढ़ेगी, बिचौलिया राज खत्म होगा. तय समय सीमा में विवाद निपटारे की व्यवस्था होगी.

आखिर क्यों हो रहा है इन बिल का विरोध दरअसल, किसान और व्यापारियों को इन विधेयकों से एपीएमसी मंडियां खत्म होने की आशंका है. कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) विधेयक 2020 में कहा गया है कि किसान अब एपीएमसी मंडियों के बाहर किसी को भी अपनी उपज बेच सकता है, जिस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, जबकि एपीएमसी मंडियों में कृषि उत्पादों की खरीद पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग मंडी शुल्क व अन्य उपकर हैं. पंजाब में यह शुल्क करीब 4.5 फीसदी है.

लिहाजा, आढ़तियों और मंडी के कारोबारियों को डर है कि जब मंडी के बाहर बिना शुल्क का कारोबार होगा तो कोई मंडी आना नहीं चाहेगा. वहीं, पंजाब और हरियाणा में एमएसपी पर गेहूं और धान की सरकारी खरीद की जाती है. किसानों को डर है नए कानून के बाद एमएसपी पर खरीद नहीं होगी क्योंकि विधेयक में इस संबंध में कोई व्याख्या नहीं है कि मंडी के बाहर जो खरीद होगी वह एमएसपी से नीचे के भाव पर नहीं होगी.

सुखबीर की राष्ट्रपति से अपील, कृषि विधेयकों पर हस्ताक्षर न करें शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने रविवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से कृषि विधेयकों पर हस्ताक्षर न करने का आग्रह किया. उन्होंने उनसे अनुरोध किया कि विधेयकों को पुनर्विचार के लिए संसद में वापस भेजा जाए. बादल ने एक बयान में कहा, "कृपया किसानों, 'किसान मजदूरों', 'आढ़तियों' (एजेंटों), मजदूरों और दलितों के साथ खड़े हों. कृपया उनकी ओर से सरकार के इस रुख पर हस्तक्षेप करें, अन्यथा वे हमें कभी माफ नहीं करेंगे."

बादल की पार्टी सत्तारूढ़ बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगियों में से एक है और सत्तारूढ़ एनडीए का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि दोनों विधेयकों का पारित होना देश के लाखों लोगों के लिए और लोकतंत्र के लिए एक दुखद दिन है. लोकतंत्र का अर्थ है आम सहमति, न कि बहुसंख्यक उत्पीड़न. नरेंद्र मोदी सरकार में पार्टी की एकमात्र मंत्री हरसिमरत कौर बादल कृषि विधेयक का विरोध जताने के लिए 17 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे चुकी हैं.

"कृषि विधेयकों के पास होने से किसानों की आय दोगुनी करने में होगी मदद" राज्यसभा से भी किसान बिलों के पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के कृषि इतिहास में रविवार को एतिहासिक दिन बताया है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बिल पास होने से न केवल कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन आएगा, बल्कि इससे करोड़ों किसान सशक्त होंगे.

मोदी ने बिलों के पास होने पर ट्वीट कर कहा, दशकों तक हमारे किसान भाई-बहन कई प्रकार के बंधनों में जकड़े हुए थे और उन्हें बिचौलियों का सामना करना पड़ता था. संसद में पारित विधेयकों से अन्नदाताओं को इन सबसे आजादी मिली है. इससे किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयासों को बल मिलेगा और उनकी समृद्धि सुनिश्चित होगी.

प्रधानमंत्री ने एमएसपी को लेकर फैले गतिरोध पर सफाई देते हुए कहा, मैं पहले भी कहा चुका हूं और एक बार फिर कहता हूं कि एमएसपी की व्यवस्था जारी रहेगी. सरकारी खरीद जारी रहेगी. उन्होंने कहा, हम यहां अपने किसानों की सेवा के लिए हैं. हम अन्नदाताओं की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करेंगे.

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