गुजरात में स्वाइन फ्लू से अबतक 230 की मौत, राज्य ने केंद्र से मांगी मदद
स्वाइन इन्फ्लूएंजा एक संक्रामक सांस की रोग है जो आमतौर पर सुअरों में होता है. अप्रैल 2009 में स्वाइन फ्लू इंसानों से इंसानों में फैलना शुरू हुआ. इसके लक्षण मौसमी बुखार जैसे ही होते हैं बुखार, थकान, और भूख की कमी, खांसी और गले में खराश शामिल हैं.

अहमदाबाद: गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राज्य में स्वाइन फ्लू की स्थिति के बारे में जानकारी लेने के लिए आज चार प्रमुख शहरों के सिविल अस्पतालों का निरीक्षण किया. एच1एन1 वायरस से संक्रमित होकर मरनेवालों की संख्या 230 पहुंच चुकी है.
वडोदरा में अस्पताल का निरीक्षण करते हुए रूपाणी ने कहा कि इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए उचित कदम बताने के लिए उन्होंने केंद्र से मेडिकल विशेषज्ञों की एक टीम राज्य में भेजने का आग्रह किया है.
रूपाणी ने किया वडोदरा में सियाजीराव जनरल अस्पताल का निरीक्षण
वडोदरा में सियाजीराव जनरल अस्पताल का निरीक्षण करने के दौरान रूपाणी ने बताया, “ स्वाइन फ्लू की वजह से 200 से ज्यादा लोगों की जानें जा चुकी है और इसके 2,100 पॉजिटिव मामले राज्य में अब तक दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 1,200 मामले वडोदरा, सूरत, अहमदाबाद और राजकोट के हैं.”
उन्होंने बताया कि राज्य के अस्पताल वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलिंडर से लैस हैं तथा दवाएं प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है. सरकारी अस्पतालों में इसके लिए पृथक वार्ड बनाए गए हैं लेकिन इन सारे कदमों के बावजूद भी केंद्र को इस बीमारी के प्रसार को रोकने के तरीके बताने के लिए राज्य में टीम भेजने का आग्रह किया गया है.
जनवरी से अब तक 230 लोगों की मौत
रूपाणी ने बताया कि टेमीफ्लू सभी सरकारी अस्पतालों में प्रचुर मात्रा में नि:शुल्क उपलब्ध है. निजी अस्पतालों के मरीजों को भी स्वाइन फ्लू का इलाज मुफ्त में दिया जा रहा है. राज्य सरकार की ओर से जारी नियमित स्वास्थ्य बिलेटिन के मुताबिक स्वाइन फ्लू से राज्य में 10 लोगों की मौत हो गई और इसके साथ ही जनवरी से अब तक इस बीमारी से मरनेवालों की संख्या 230 पहुंच गई है.
बुलेटिन में बताया गया है कि जनवरी से अब तक एन1एच1 वायरस से 2,272 मरीज संक्रमित होकर राज्य के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हो चुके हैं. उनमें से 857 का इलाज हो चुका है और 1,225 का अभी भी इलाज चल रहा है जबकि 230 लोगों की मौत हो चुकी है.
देश भर में बरपा स्वाइन फ्लू का कहर गुजरात, यूपी, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और ओडिशा समेत कई राज्यों में कई मौते हो चुकी है और अब तक कई मामलें सामने आएं हैं. राष्ट्रीय स्तर पर इस साल 13 अगस्त तक स्वाइन फ़्लू (C) के कुल 18855 मामले सामने आ चुके हैं. 2015 के बाद ये आंकड़ा सबसे ज्यादा है. 2015 मॆं देश में स्वाइन फ्लू के कुल 42592 मरीज़ पाए गए थे. दिल्ली मॆं 1307, गुजरात मॆं 1609, कर्नाटक में 2892, केरल में 1353, महाराष्ट्र में 4011, राजस्थान में 538, तमिलनाडु में 2969 और तेलंगाना मॆं 1509 मामले सामने आए हैं. स्वाइन फ्लू मौसम बदलने के दौरान देखा जाता है ज्यादातर अक्टूबर-नवम्बर में. लेकिन इस बार पिछले दो महीने में इसके केस बहुत बढे हैं. क्या है स्वाइन फ्लू? स्वाइन इन्फ्लूएंजा एक संक्रामक सांस की रोग है जो आमतौर पर सुअरों में होता है. अप्रैल 2009 में स्वाइन फ्लू इंसानों से इंसानों में फैलना शुरू हुआ. इसके लक्षण मौसमी बुखार जैसे ही होते हैं बुखार, थकान, और भूख की कमी, खांसी और गले में खराश शामिल हैं. कुछ लोगों को उल्टी और दस्त भी हो सकती है. सांस में तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करें. स्वाइन फ्लू में घबराने की जरूरत नहीं है. स्वाइन फ्लू को तीन बातों का ध्यान रखकर रोका जा सकता है. पहला- सफाई रखें. लगातार बीस सेकेंड तक हाथ साबुन से साफ करें ताकि स्वाइन फ्लू के वायरस मर जाएं. दूसरा- छींकते और खांसते समय रूमाल या टिश्यू का इस्तेमाल करें. तीसरा- इसे फैलने से रोकें. अगर बीमार हैं तो अकेले में रहें. मास्क पहन कर रखें ताकि इसके वायरस दूसरे लोगों तक ना फैले.Source: IOCL























