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केजरीवाल के 20 विधायकों की सदस्यता रद्द, राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की सिफारिश मंजूर की

यूं तो आम आदमी पार्टी के पास अब भी इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार बचा है लेकिन आमतौर पर देखा गया है कि अदालतें चुनाव आयोग के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करती हैं. यानि कुल मिलाकर दिल्ली में अगले छह महीनों में मिनी विधानसभा चुनाव के आसार ज्यादा हैं.

नई दिल्ली: चुनाव आयोग की सिफारिश पर अमल करते हुए राष्ट्रपति ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार दे दिया है. सरकार ने राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिसूचना जारी कर इसकी जानकारी दी.

आपको बता दें शुक्रवार को चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति से आप के 20 विधायकों को लाभ के पद पर काबिज होने के कारण अयोग्य घोषित करने की सिफारिश की थी.

चुनाव आयोग की सिफारिश पर राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता अब रद्द हो गई है.

अब क्या होगा?

आम आदमी पार्टी के पास अब एक ही विकल्प बचा है और वो है अदालत का दरवाज़ा खटखटाने का. आम आदमी पार्टी ने अपने 20 विधायकों की सदस्यता रद्द होने के खिलाफ अदालत का दरवाज़ा खटखटाने का एलान किया है.

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने कहा कि वो इस फैसले को अदालत में चुनौती देंगे. इसके साथ ही एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए उन्होंने साफ किया कि वो चुनाव के लिए भी तैयार हैं.

आपको बता दें कि अगर आम आदमी पार्टी को अदालत से राहत नहीं मिलती है तो दिल्ली में इन 20 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे.

क्या उपचुनाव की संभावना ज्यादा है?

यूं तो आम आदमी पार्टी के पास अब भी इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार बचा है लेकिन आमतौर पर देखा गया है कि अदालतें चुनाव आयोग के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करती हैं. यानि कुल मिलाकर दिल्ली में अगले छह महीनों में मिनी विधानसभा चुनाव के आसार ज्यादा हैं.

अभी बहुमत की क्या स्थिति है?

20 विधायकों के निपटने के बाद भी केजरीवाल सरकार के पास 46 विधायक बचते हैं, जो बहुमत के लिए जरुरी 36 से ज्यादा हैं. यानि सरकार सुरक्षित है यानि सरकार के पास 70 में से 36 विधायक अब भी हैं. लेकिन ये भी जेहन में कि 20 लोगों की सदस्यता रद्द होने के बाद विधानसभा की संख्या 50 रह जाएगी. यानि विश्वास मत का फैसला इस नंबर के आधार पर होगा. हाउस की जितनी संख्या होती है विश्वास मत उसी के आधार पर तय होता है.

क्या है पूरा मामला?

केजरीवाल सरकार ने 13 मार्च 2015 में 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाया और हल्ला मचने पर जून में सरकार ने विधानसभा में बिल पास करवाया जिसे राष्ट्रपति ने नामंजूर कर दिया.

दरअसल, प्रशांत पटेल नाम के एक सज्जन ने 19 जून 2015 को राष्ट्रपति के पास शिकायत भेजी. इसमें कहा गया कि आप ने 21 विधायकों को संसदीय सचिव बना कर लाभ के पद पर रखा है. उन्हें अलग दफ्तर दिया गया है, फोन का इस्तेमाल हो रहा है और पेट्रोल का खर्चा दिया जा रहा है.

हालांकि आप के सभी विधायकों ने अलग से तनख्वाह या भत्ता लेने से इनकार किया था.

उधर राष्ट्रपति ने पटेल की अर्जी को चुनाव आयोग के पास भेजा तो उधर मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा से लाभ के पद के कारण अयोग्य ठहराने के प्रावधान को खत्म करने का बिल पास करवाया.

दूसरी ओर एक जनहित याचिका हाई कोर्ट में लगाई गयी जिसने 8 सिंतबर 2016 को इन संसदीय सचिवों की पद पर नियुक्ति को रद्द कर दिया. इसके बाद ही तय हो गया था कि चुनाव आयोग का फैसला भी 'आप' के खिलाफ आ सकता है.

क्या है लाभ का पद?

लाभ के पद की व्याख्या संविधान में की गयी है और उसका किसी भी कीमत पर उल्लंघन नहीं होना चाहिए. संविधान के अनुच्छेद 102 (1) (ए) और आर्टिकल 19 (1) (ए) में इसका उल्लेख किया गया है.

क्या दिल्ली में पहली बार संसदीय सचिव बने?

ऐसा नहीं है कि इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने संसदीय सचिव नहीं बनाए हों. बीजेपी के साहिब सिंह वर्मा जब मुख्यमंत्री थे तब नंद किशोर गर्ग उनके संसदीय सचिव हुआ करते थे.

किन-किन विधायकों की सदस्यता गई?

इन बीस विधायकों में कैलाश गहलोत भी हैं जो केजरीवाल सरकार में मंत्री हैं. अब उनपर इस्तीफे का नैतिक दबाव बढ़ सकता है. वैसे नियम के मुताबिक छह महीने तक कोई भी शख्स बिना किसी सदन का सदस्य रहे भी मंत्री रह सकता है.

  1. आदर्श शास्त्री, द्वारका
  2. अल्का लांबा, चांदनी चौक
  3. संजीव झा, बुरारी
  4.  कैलाश गहलोत, नजफ़गढ़
  5.  विजेन्द्र गर्ग, राजेन्द्र नगर
  6.  प्रवीण कुमार, जंगपुरा
  7.  शरद कुमार चौहान, नरेला
  8. मदन लाल खुराना, कस्तुरबा नगर
  9. शिव चरण गोयल, मोती नगर
  10.  सरिता सिंह, रोहतास
  11. नरेश यादव, महरौली
  12.  राजेश गुप्ता, वज़ीरपुर
  13.  राजेश ऋषी, जनकपुरी
  14. अनिल कुमार बाजपेयी, गांधी नगर
  15.  सोम दत्त, सदर बाज़ार
  16. अवतार सिंह, कालकाजी
  17. सुखवीर सिंह डाला, मुंडका
  18. मनोज कुमार, कोंडली
  19. नितिन त्यागी, लक्ष्मी नगर
  20. जरनैल सिंह, तिलक नगर
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