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EXPLAINED: कैसे स्टेटस सिंबल बनेंगे डॉगी, क्या गरीब अब कुत्ता भी नहीं पाल सकता? पालने के लिए खरीदना होगा बड़ा घर!

ABP Explainer: अब कुत्ता पालने के लिए कम से कम 5 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे. इतने में एक रोल्स रॉयस कार आ जाएगी. जैसे गरीब आदमी रोल्स रोयस नहीं खरीद सकता, वैसे ही अब कुत्ता भी नहीं पाल सकेगा.

एक सुबह आप अपने छोटे से फ्लैट में चाय बनाते हुए खिड़की से बाहर झांकते हैं. सड़क पर एक भूखा-प्यासा कुत्ता भटक रहा है. आपका दिल पिघल जाता है, लेकिन क्या आप उसे घर ला सकते हैं? अगर आपका घर चंडीगढ़ में है और सिर्फ 4 मरले का है, तो नया कानून साफ कहता है- नहीं. 30 अक्टूबर को चंडीगढ़ प्रशासन ने पेट एंड कम्युनिटी डॉग बायलॉज 2025 को अधिसूचित किया, जिसके मुताबिक अब छोटे घर वाले कुत्ता नहीं पाल सकेंगे. यानी अब कुत्ते से आपका स्टेटस तय होगा.

तो आइए ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि कुत्ता पालने के नए नियम क्या हैं, कैसे कुत्ता पालना स्टेटस सिंबल बन गया है और कुत्तों के लिए बड़ा घर होना क्यों जरूरी है...

सवाल 1- भारत में कुत्ता पालने का बेसिक नियम क्या है?
जवाब- भारत में कुत्ता पालना आपका मौलिक अधिकार है, लेकिन जिम्मेदारी के साथ. इसका कोई केंद्रीय कानून नहीं है, जो हर राज्य में एक जैसा हो, बल्कि यह लोकल म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन या राज्य स्तर पर चलता है. मुख्य आधार 1960 का 'प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट (PCA एक्ट)' है, जो कहता है कि कुत्ते को भूखा-प्यासा न रखें, मारपीट न करें और क्रूरता न करें. इसके तहत अगर आपका कुत्ता किसी को काट ले, तो IPC की धारा 289 के तहत 3 महीने की सजा या 200 रुपए जुर्माना हो सकता है.

एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (AWBI) की 2020 गाइडलाइंस के मुताबिक पेट ओनरशिप फंडामेंटल राइट है. संविधान के आर्टिकल 51A(g) के तहत, हर नागरिक का फर्ज है जानवरों के लिए दया रखना. लेकिन लोकल नियम वैक्सीनेशन (एंटी-रेबीज), लाइसेंस, और लीश (रस्सी) पर जोर देते हैं. जैसे दिल्ली MCD के 2023 नियमों में हर कुत्ते का रजिस्ट्रेशन जरूरी है. मुंबई BMC में स्ट्रे डॉग्स के लिए ABC (एनिमल बर्थ कंट्रोल) प्रोग्राम चलता है.

कुल मिलाकर, 2023 की ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल (HSI) रिपोर्ट कहती है कि भारत में 3.3 करोड़ पेट डॉग्स हैं. यह ज्यादातर अर्बन एरिया में हैं, जहां 2.3 करोड़ घरों में कुत्ते हैं. ग्रामीण इलाकों में यह कम है, क्योंकि वहां कुत्ते ज्यादातर गार्ड या काम के लिए पाले जाते हैं. अब चंडीगढ़ के नए कानून ने इसे उलट दिया है, अब सिर्फ घर का साइज मायने रखता है.

सवाल 2- चंडीगढ़ में कुत्ते पालने का नया कानून क्या कहता है?
जवाब- चंडीगढ़ में कुत्ते पालने के नियम बनाने की कहानी 2023 में शुरू हुई, जब चंडीगढ़ म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (MCC) ने ड्राफ्ट बायलॉज बनाए. जनता से आपत्तियां ली गईं और मई 2025 में इसे अप्रूव कर दिया. 30 अक्टूबर को चंडीगढ़ एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे नोटिफाई कर दिया. इसके तहत कुत्ता पालने के लिए कम से कम 5 मरला का घर होना चाहिए. 1 मरला में 272 स्क्वायर फीट होते हैं.

  • 1 कुत्त पालने के लिए कम से कम 5 मरला का घर.
  • अगर 3 फ्लोर हैं तो हर एक फ्लोर पर एक कुत्ता यानी कुल 3 कुत्ते पाल सकते हैं.
  • 10 मरला के घर में 2 कुत्ते.
  • 12 मरला के घर में 3 कुत्ते.
  • 1 कनाल के घर में 4 कुत्ते.

इसके अलावा कुत्ता पालने के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है. 4 महीने से ज्यादा उम्र के कुत्ते की फीस 500 रुपए है.

  • कुत्तों को मेटल टोकन और कॉलर पहनाना जरूरी है, वरना जब्ती होगी.
  • अमेरिकन बुलडॉग, अमेरिकन पिटबुल, बुल टेरियर, केन कोर्सो, डोगो अर्जेंटिनो और रोटवीलर जैसी 6 आक्रामक प्रजातियों पर बैन.
  • घर से बाहर घुमाने पर लीश(रस्सी) जरूरी, पब्लिक प्लेस में मल-मूत्र  साफ न करने पर 10 हजार रुपए जुर्माना.
  • सुखना लेक, रोज गार्डन, रॉक गार्डन जैसे 8 जगहों पर कुत्ते प्रतिबंधित.
  • स्ट्रे डॉग्स के लिए फीडिंग जोन RWAs से कंसल्ट करके बनेंगे, अनधिकृत फीडिंग पर 10 हजार रुपए फाइन लगेगा.

सवाल 3- तो क्या अब चंडीगढ़ में गरीब इंसान कुत्ता भी नहीं पाल सकेगा?
जवाब- ट्रिब्यून की रिपोर्ट 'गुड एंड बैड न्यूज फॉर डॉग लवर्स' के मुताबिक, यह पब्लिक सेफ्टी के लिए है क्योंकि स्ट्रे अटैक्स बढ़े हैं और बच्चे-जॉगर्स खतरे में हैं. लेकिन हां, यह क्लास डिवाइड भी दिखाता है. अगर आपका घर छोटा है, तो कुत्ता पालना मुश्किल है. सोशल मीडिया पर इसका मजाक बनने लगा है कि अब हर सेक्टर में कुत्ते इंसानों से ज्यादा हो जाएंगे. लेकिन सच्चाइई कड़वी है कि यह स्टेटस का सवाल बन गया है. अमीरों के बड़े घरों में 4 कुत्ते और मिडिल क्लास के घरों में 1 कुत्ता तो होगा ही, लेकिन गरीबों के लिए क्या. ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल (HSI) की 2023 की स्टडी के मुताबि, भारत में पेट ओनरशिप 12% सालाना बढ़ रही है, लेकिन अर्बन मिडिल क्लास तक सीमित है. गरीब लोग, जो किराए से या छोटे घरों में रहते हैं, वो इससे बाहर हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कुत्ता पालना अब औकात दिखाने का जरिया बन गया है.मु

सवाल 4- आमतौर पर पंजाब-चंडीगढ़ में घर कितने मरले के बने होते हैं?
जवाब- चंडीगढ़ प्लान्ड सिटी है, जहां चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (CHB) प्लॉट अलॉट करता है. सेंसस 2011 (लेटेस्ट हाउसिंग डेटा, 2025 तक अपडेट नहीं) के मुताबिक, चंडीगढ़ में कुल 235,061 घर हैं, जिनमें 97% अर्बन एरिया में हैं. औसत प्लॉट साइज 10 मरला है. लेकिन समान डिस्ट्रीब्यूशन नहीं है. 60% घर 5-12 मरले के (छोटे-मध्यम क्लास के लिए), 25% 12 मरले से 1 कनाल और सिर्फ 10% 1 कनाल से ज्यादा हैं.

पंजाब में, NFHS-5 (2019-21) डेटा कहता है, 54 अर्बन घरों में 40% 10 मरला तक के घर हैं और ग्रामीण इलाकों में 70% छोटे (3-5 मरला). ट्रिब्यून की 20 अगस्त 2024 रिपोर्ट कहती है, चंडीगढ़ में 10 मरले का घर 7 करोड़ में बिकता है, जो मिडिल क्लास के लिए भी महंगा है. छोटे घर (5 मरला) ज्यादातर EWS या लो इनकम ग्रुप्स के हैं, जहां 80% परिवार 4-5 सदस्य वाले हैं. यानी नया कानून 60% घरों को प्रभावित करेगा, जो सिर्फ 1-2 कुत्ते पाल पाएंगे.

सवाल 5- तो फिर पंजाब-चंडीगढ़ में कुत्ता पालने के लिए कितना अमीर होना पड़ेगा?
जवाब- चंडीगढ़ में प्रॉपर्टी के दाम आसमान छू रहे हैं. ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिकक, चंडीगढ़ में 10 मरले का घर 7 से 10 करोड़ के बीच मिलता है और 1 कनाल के घर 20 करोड़ रुपए से शुरू होते हैं. सेक्टर 18 में 10 मरले का घर 10 करोड़ से ज्यादा का है. तो अगर कुत्ता पालने के लिए 5 मरले का भी घर खरीदा तो 4-5 करोड़ रुपए खर्च होंगे. वहीं 5 मरले के प्लॉट की कीमत 3 करोड़ के आसपास है. ऊपर से घर बनाने के लिए 3 से 4 लाख रुपए महीना  EMI देना होगी, यानी सिर्फ कुत्ता पालने के लिए खर्च 5 करोड़ है. इतने में एक रोल्स रॉयस कार आ जाएगी. यह सब करना किसी मिडिल क्लास या गरीब आदमी के लिए नामुमकिन है. मिडिल क्लास पर्सन की मासिक सैलरी अधिकतम 30 हजार तक होती है. वहीं गरीब आदमी दिहाड़ी करके गुजारा करता है. अब कुत्ता पालना इनके लिए सपना बन जाएगा.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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