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गांधीजी के आश्रम में खाने से सामान रखने तक के नियम, क्यों जरूरी थे 11 व्रत?

Mahatma Gandhi 11 Vows: गांधीजी के आश्रम में सत्य-अहिंसा के अलावा नौ और व्रत थे. भोजन, सामान, श्रम और धर्म से जुड़े इन नियमों का क्या उद्देश्य था? जानें पूरी बात.

Mahatma Gandhi 11 Vows: एक परिवार को आश्रम में जगह मिली और आर्थिक मदद लगभग बंद हो गई. वजह थी उस परिवार की जाति. समाज जिन्हें अछूत मानता था, गांधीजी ने उन्हें अपने साथ रहने की जगह दी थी. कुछ आश्रमवासियों ने भी विरोध किया, लेकिन गांधीजी अपने फैसले पर टिके रहे. बराबरी का नियम बनाया था, तो मुश्किल आने पर उसे छोड़ कैसे देते? मणि भवन गांधी संग्रहालय के विवरण में यह घटना दर्ज है.

गांधीजी के आश्रम के 11 व्रतों को समझने की शुरुआत इसी घटना से होती है. वहां सत्य और अहिंसा की बात करने के साथ अपने व्यवहार की परीक्षा भी देनी पड़ती थी.

आप किसके साथ बैठते हैं, कितना सामान रखते हैं और अपना काम खुद करते हैं या नहीं, ये सब आश्रम के अनुशासन का हिस्सा थे.

व्रत का मतलब भूखे रहना नहीं था

इन व्रतों का अर्थ जीवन भर किसी नियम को निभाने का संकल्प था. गांधीजी के लिए आश्रम देशसेवा की तैयारी का स्थान था. सेवा करने वाले व्यक्ति में सच बोलने का साहस, इच्छाओं पर संयम और दूसरों के प्रति सम्मान होना चाहिए. इसलिए नियम भोजन, श्रम, धर्म और सामाजिक व्यवहार तक जाते थे.

सत्य-अहिंसा के अलावा कौन से थे नौ व्रत?

सत्य और अहिंसा सबसे परिचित हैं. सत्य का अर्थ विचार, वाणी और काम में सच्चाई था. अहिंसा में किसी को चोट पहुंचाने से बचना और द्वेष के बिना अन्याय का विरोध करना शामिल था.

  1. ब्रह्मचर्य में यौन संयम के साथ मन और इंद्रियों पर नियंत्रण की अपेक्षा थी.
  2. अस्तेय यानी चोरी न करना. गांधीजी की व्याख्या में उधार ली चीज को तय समय से ज्यादा अपने पास रोकना भी इस नियम के खिलाफ था.
  3. असंग्रह या अपरिग्रह का मतलब जरूरत से ज्यादा वस्तुएं जमा न करना था. इस्तेमाल न होने वाले कपड़े और सामान भी इस सवाल के दायरे में आते थे.
  4. शरीर श्रम के अनुसार सक्षम व्यक्ति को अपने हिस्से का शारीरिक काम करना था. दूसरों से सेवा लेने से पहले अपनी जिम्मेदारी निभानी थी.
  5. अस्वाद भोजन से जुड़ा व्रत था. खाना शरीर की जरूरत के लिए हो, स्वाद की लालसा व्यक्ति की आदतों पर हावी न हो.
  6. अभय यानी निर्भयता. सच बोलने वाला सरकार, समाज या नुकसान के डर से पीछे हट जाए, तो सत्य का संकल्प कमजोर पड़ जाता है.
  7. सर्वधर्म समभाव में अपने धर्म की तरह दूसरे धर्मों का भी आदर करना था.
  8. स्वदेशी स्थानीय उत्पादन और आसपास के लोगों की सेवा को प्राथमिकता देता था.
  9. अस्पृश्यता निवारण का अर्थ छुआछूत छोड़ना और आश्रम में सबको बराबर स्थान देना था.

फिर पूरे 11 व्रत जरूरी क्यों थे?

गांधीजी इन्हें एक-दूसरे से जुड़ा मानते थे. निर्भयता के बिना सत्य निभाना कठिन था. छुआछूत रखते हुए अहिंसा का दावा अधूरा पड़ता था. जरूरत से ज्यादा संग्रह और दूसरों के श्रम पर निर्भरता सेवा के उद्देश्य से टकराते थे. उन्होंने 'हरिजन' में सभी अनुशासनों को साथ समझने पर जोर दिया था.

उस परिवार को आश्रम में रखने का फैसला इसीलिए अहम है. गांधीजी के सामने अपने बनाए नियम और आश्रम की आर्थिक सहायता में से चुनने की नौबत आई. उन्होंने परिवार को हटाकर मदद बचाने का रास्ता नहीं चुना. 11 व्रतों की असली कठिनाई यही थी, उन्हें तब भी निभाना, जब उनका पालन महंगा पड़ने लगे.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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