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Budh Pradosh Vrat Katha: बुध प्रदोष व्रत की संपूर्ण कथा, पूजा में पढ़ें गणपति जी होंगे प्रसन्न

Budh Pradosh Vrat Katha: प्रदोष व्रत हर दोष को मिटाने की शक्ति रखता है. इस साल बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026 को है, इस दिन पूजा में प्रदोष व्रत की कथा का श्रवण करें,

Budh Pradosh Vrat Katha: वैशाख महीने का बुध प्रदोष व्रत 15 अप्रैल 2026 को है. इस दिन शिव पूजा में बुध प्रदोष व्रत की कता का श्रवण करें मान्यता है इससे व्रत-पूजन संपन्न होता है और व्यक्ति इसके प्रभाव से मानसिक तौर पर प्रसन्न रहता है. 

बुध प्रदोष व्रत कथा

सूतजी, शौनक आदि ऋषियों से कहते हैं कि "मैं बुध त्रयोदशी प्रदोष की कथा का वर्णन करता हूँ, आप सभी ध्यानपूर्वक श्रवण करें. प्राचीन काल में किसी ग्राम में एक पुरुष निवास करता था. कुछ समय पूर्व ही उसका विवाह संस्कार सम्पन्न हुआ था. विवाह के बाद वह पुरुष गौने के लिये अपनी पत्नी को लेने ससुराल पहुंचा.

वह बुधवार के दिन पत्नी को विदा कराने पहुंचा. उसके सास-ससुर, साले-सालियों आदि अन्य सम्बन्धियों ने उससे कहा कि बुधवार के दिन पत्नी को विदा करके ले जाना अशुभ माना जाता है, किन्तु उस दामाद ने सास से कहा कि 'ऐसा कुछ नहीं होता, यह सब अन्धविश्वास है. मैं तो बुधवार के दिन ही अपनी पत्नी को घर लेकर जाऊँगा.'

बारम्बार समझाने पर भी दामाद ने अपना हठ नहीं छोड़ा जिसके कारण अन्ततः विवश होकर उसके सास-ससुर ने अपनी पुत्री को उसके साथ बुधवार के दिन ही विदा कर दिया.

वे दोनों नवविवाहित दम्पति बैलगाड़ी से घर की ओर जा रहे थे. एक नगर से थोड़ा दूर चलते ही मार्ग में उसकी पत्नी को प्यास लगी. पति एक पात्र लेकर उसके लिये जल लेने गया. जब वह लौटकर आया तो उसने देखा की एक अज्ञात व्यक्ति उसकी पत्नी के लिये लोटे में जल लेकर आया है तथा उसकी पत्नी उसका पान कर, उस व्यक्ति के साथ हास्य-विनोद कर रही है.

यह दृश्य देखकर उसके पति को अत्यन्त क्रोध आया तथा वह उस व्यक्ति पर क्रोध करते हुये उसके समीप गया. किन्तु उस व्यक्ति के निकट पहुँचते ही पति आश्चर्यचकित हो उठा क्योंकि अज्ञात व्यक्ति का रूप-रंग तथा शारीरिक संरचना पूर्णतः उस पति के समान ही थी. जैसे वह उसका ही प्रतिबिम्ब हो.

वे दोनों वहीं लड़ने लगे तथा उन्हें लड़ते हुये देखकर वहाँ पथिकों की भीड़ एकत्रित हो गयी. उसी समय वहाँ सैनिक भी आ गये और उस स्त्री से पूछने लगे कि - 'बता इनमें से कौन सा पुरुष तेरा पति है?'

एक समान दो व्यक्तियों को देखकर वह नवविवाहिता धर्म-संकट एवं असमंजस की स्थिति में पड़ गयी एवं व्याकुल हो उठी. मार्ग के मध्य में अपनी पत्नी को इस स्थिति में देखकर वह पुरुष भी व्यथित हो गया तथा मन ही मन शिव जी से प्रार्थना करने लगा कि - 'हे महादेव! आप मेरी एवं मेरी नववधू की रक्षा करें, मैंने बुधवार के दिन ही अपनी पत्नी को विदा कराकर अनुचित कार्य किया है. हे भोले-शङ्कर! मैं भविष्य में ऐसा अपराध कदापि नहीं करूँगा, मुझे क्षमा करें भगवन्.'

भगवान शिव ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और उस वक्त ही वह अज्ञात व्यक्ति वहाँ से अन्तर्धान हो गया. फिर वह पति अपनी नववधू को लेकर सकुशल अपने घर पहुँच गया. उसी घटनाक्रम के पश्चात् पति-पत्नी दोनों विधि-विधान से श्रद्धापूर्वक बुधवार प्रदोष के व्रत का पालन करने लगे."

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Bursle)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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