Ayodhya 84 Kosi Parikrama: कारसेवक पुरम से 84 कोसी परिक्रमा शुरू, 24 अप्रैल को होगा समापन
Ayodhya 84 Kosi Parikrama: कारसेवक पुरम से उठी आस्था की ऐतिहासिक परिक्रमा', 84 कोसी परिक्रमा 3 अप्रैल से शुरू होगी.नेपाल से लेकर देशभर के भक्त शामिल होंगे और 24 अप्रैल को इसका समापन होगा.

Ayodhya 84 Kosi Parikrama: राम जन्मभूमि अयोध्या से खबर है कि, हनुमान मंडल के तत्वावधन में ऐतिहासिक 84 कोसी परिक्रमा 2 अप्रैल को हनुमान जयंती के अवसर पर प्रारंभिक व्यवस्थाओं के साथ शुरू हो गई है. लेकिन विधिवत यात्रा 3 अप्रैल को मखोड़ा धाम से शुरू होगी. विश्व हिंदू परिषद के हनुमान मंडल दल की ओर से निकाली जाने वाली इस ऐतिहासिक परिक्रमा का भव्य शुभारंभ हो गया है.
कारसेवक पुरम से शुरू हुई इस धार्मिक पदयात्रा में हजारों साधु-संतों और राम भक्तों के साथ आस्था के महासागर में बदल गई. परिक्रमा के लिए कारसेवक पुरम से मखौड़ा के लिए साधु-संतों का जत्था रवाना होगा. इस अवसर पर रामनगरी अयोध्या एक बार फिर भक्ति में डूबी नजर आ रही है कारसेवक पुरम से निकली यह यात्रा सरयू तट तक पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर अपनी यात्रा की शुरुआत की.
इस विशाल धार्मिक आयोजन में देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए हैं. परिक्रमा को मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और बजरंग दल के पूर्व संयोजक जयभान सिंह पवैया ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. 23 दिनों तक चलने वाली यह परिक्रमा 3 अप्रैल से शुरू होकर 24 अप्रैल को संपन्न होगी. समापन के दिन श्रद्धालु राम मंदिर की परिक्रमा करेंगे. यह यात्रा अयोध्या समेत बस्ती, अंबेडकर नगर, बाराबंकी और गोंडा जनपदों से होकर गुजरेगी.
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को दो स्थानों पर सरयू नदी को नाव के जरिए पार करना होगा. परिक्रमा का अगला प्रमुख पड़ाव बस्ती का मखौड़ा धाम होगा, जहां से 3 अप्रैल को सुबह 6 बजे यात्रा आगे बढ़ेगी.
हनुमान मंडल दल के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह के मुताबिक, तमिलनाडु और केरल को छोड़कर देश के लगभग सभी राज्यों से श्रद्धालु इसमें शामिल हुए हैं. श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. कई श्रद्धालु वर्षों से इस परिक्रमा में शामिल होते आ रहे हैं और इसे अपना सौभाग्य मानते हैं. उनका कहना है कि यह यात्रा उन्हें आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा देती है.
जनमानस के बीच ऐसी मान्यता है कि, 84 कोसी परिक्रमा करने से 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्ति मिलती है. इसलिए इस धार्मिक यात्रा का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृति महत्व है. 23 दिन तक चलने वाली इस पदयात्रा के समापन पर श्रद्धालु रामकोट स्थित राम जन्मभूमि की परिक्रमा कर अपनी आस्था का समापन करेंगे.
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