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Multiple Sclerosis: 20 से 40 की उम्र में थकान-झनझनाहट दे अलर्ट तो समझें गंभीर बीमारी का संकेत, एक्सपर्ट की चेतावनी

Multiple Sclerosis In India: कुछ बीमारियां चुपचाप शरीर में अपनी जगह बना लेती हैं और उनके शुरुआती संकेत इतने सामान्य लगते हैं कि लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. एमएस ऐसी ही एक बीमारी है.

Early Symptoms Of Multiple Sclerosis In Young Adults: कई बीमारियां ऐसी होती हैं जो अचानक तेज लक्षणों के साथ सामने आती हैं, इसलिए लोग उन्हें जल्दी पहचान लेते हैं. लेकिन कुछ बीमारियां चुपचाप शरीर में अपनी जगह बना लेती हैं और उनके शुरुआती संकेत इतने सामान्य लगते हैं कि लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. मल्टीपल स्क्लेरोसिस यानी एमएस ऐसी ही एक बीमारी है. भारत में आज भी इसके कई मामले समय पर पकड़ में नहीं आते, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षणों को अक्सर तनाव, कमजोरी, थकान या पोषण की कमी समझ लिया जाता है. यही वजह है कि कई मरीज सही बीमारी का पता चलने से पहले वर्षों तक भटकते रहते हैं.

क्या होते हैं मल्टीपल स्क्लेरोसिस के लक्षण?

हाथ या पैरों में झनझनाहट होना, कुछ दिनों तक धुंधला दिखाई देना, अचानक चक्कर आना या लगातार थकान महसूस होना ऐसे संकेत हैं जिन्हें लोग आम समस्या मान लेते हैं. कई बार ये लक्षण कुछ समय बाद अपने आप ठीक भी हो जाते हैं, जिससे व्यक्ति को लगता है कि अब सब सामान्य है. लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि यही सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है. शरीर में दिखाई देने वाला यह छोटा बदलाव दिमाग और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है. 

क्यों इसके मामले देर से पता चलते हैं?

डॉ अंशु रस्तोगी बताती हैं कि भारत में मल्टीपल स्क्लेरोसिस के कई मामले इसलिए सामने नहीं आ पाते क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण बहुत हल्के और अस्थायी होते हैं. मरीजों को हाथ-पैरों में झनझनाहट, मांसपेशियों में जकड़न, सुन्नपन, कुछ समय के लिए धुंधला दिखना, चक्कर आना या बिना वजह थकान महसूस हो सकती है. कई बार ये समस्याएं कुछ दिनों या हफ्तों में कम हो जाती हैं, इसलिए लोग मान लेते हैं कि बीमारी खत्म हो गई. जबकि हकीकत में यह नसों को नुकसान पहुंचाने वाली प्रक्रिया का संकेत हो सकता है.

मल्टीपल स्क्लेरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की इम्यून क्षमता गलती से नसों की सुरक्षा करने वाली परत पर हमला करने लगती है. इससे ब्रेन और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संदेश पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. समस्या यह है कि हर मरीज में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. किसी को नजर से जुड़ी परेशानी हो सकती है, किसी को संतुलन बनाने में दिक्कत हो सकती है, जबकि कुछ लोगों में शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो सकती है. यही कारण है कि बीमारी की पहचान करना कई बार मुश्किल हो जाता है.

किस उम्र के लोगों को होती है सबसे ज्यादा दिक्कत?

एक्सपर्ट के अनुसार 20 से 40 साल की उम्र के लोगों में यह बीमारी ज्यादा देखी जाती है और महिलाओं में इसके मामले पुरुषों की तुलना में अधिक पाए जाते हैं. लेकिन इस आयु वर्ग के लोगों में थकान, चक्कर, कमजोरी या मनोदशा में बदलाव जैसी समस्याओं को अक्सर काम के दबाव, चिंता या शरीर में पोषक तत्वों की कमी से जोड़ दिया जाता है. डॉ.  का कहना है कि कई मरीज कई बार बीमारी के दौर से गुजरने के बाद ही एक्सपर्ट चिकित्सक तक पहुंच पाते हैं. तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है. 

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भारत में क्या है इस बीमारी की स्थिति?

भारत में लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि मल्टीपल स्क्लेरोसिस बहुत कम लोगों को होने वाली बीमारी है। इसी सोच के कारण इसके प्रति जागरूकता भी सीमित रही. हालांकि अब जांच सुविधाओं और दिमाग से जुड़ी बीमारियों के उपचार में बढ़ोतरी के बाद पहले की तुलना में ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. फिर भी छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और अच्छी जांच सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को सही इलाज तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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