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Hidden Cancer Risks: सिर्फ सिगरेट-शराब से नहीं कैंसर का खतरा, आपकी ये 5 छोटी आदतें भी जिम्मेदार; एक्सपर्ट से जानें

Cancer Prevention Tips: कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसके कुछ कारण दिखाई देते हैं लेकिन कुछ नहीं दिखाई देते हैं. चलिए आपको न दिखाई देने वाले कारण के बारे में बताते हैं.

Can Daily Pollution Increase Cancer Risk: कैंसर के बारे में सोचते हैं तो दिमाग में सबसे पहले बड़े और डरावने जोखिम आते हैं. यानी वे खतरे जिन पर साफ चेतावनी लिखी होती है, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि यह पूरी तस्वीर नहीं है. मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. राजीव विजयकुमार के मुताबिक, कैंसर का खतरा अक्सर धीरे-धीरे बनता है, रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों और एक्सपोजर के जरिए, जिन पर हम शायद ही ध्यान देते हैं. थोड़ा प्रदूषण, सनस्क्रीन न लगाना, नींद की कमी, प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाना, ये सब उस समय गंभीर नहीं लगते, इसलिए अनदेखे रह जाते हैं.

माइक्रो-एक्सपोजर की चर्चा कम

डॉक्टर बताते हैं कि कैंसर के बारे में आम बातचीत में इन 'माइक्रो-एक्सपोजर' की चर्चा कम होती है. ये इतने दिखते नहीं होते कि डर पैदा करें, लेकिन रोजाना मौजूद रहते हैं और समय के साथ असर जमा करते रहते हैं. उदाहरण के लिए वायु प्रदूषण, गाड़ियों के धुएं, निर्माण की धूल और ईंधन के दहन से निकलने वाले सूक्ष्म कण PM2.5 लंग्स की गहराई तक पहुंच सकते हैं. लंबे समय तक इनके संपर्क में रहना, यहां तक कि नॉन-स्मोकर्स में भी, लंग्स के कैंसर के जोखिम से जुड़ा पाया गया है. एक दिन का असर मामूली लगता है, लेकिन वर्षों में यह जमा हो जाता है.

इसी तरह अल्ट्रावायलेट किरणें. समुद्र तट पर तेज धूप से सनबर्न होने पर लोग सतर्क हो जाते हैं, लेकिन रोजाना की हल्की धूप ऑफिस आना-जाना, दोपहिया चलाना, आउटडोर एक्सरसाइज अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. लगातार हल्का यूवी नुकसान त्वचा की सेल्स में डीएनए बदलाव बढ़ा सकता है.

हमारी लाइफस्टाइल का भी होता है असर

 एक्सपर्ट बताते हैं कि खानपान भी अहम है. प्रोसेस्ड मीट, ज्यादा शराब, लगातार अधिक शुगर और उससे जुड़ी मोटापा, ये रातोंरात असर नहीं दिखाते, लेकिन शरीर में सूजन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल बदलाव ऐसा माहौल बनाते हैं जिसमें असामान्य सेल्स पनप सकती हैं. नींद और सर्कैडियन रिद्म का बिगड़ना भी अब शोध का विषय है. नाइट शिफ्ट, कम नींद और अनियमित दिनचर्या मेलाटोनिन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकती है, जो कुछ कैंसर के जोखिम से जुड़ी पाई गई है.

कैसे कर सकते हैं बचाव?

डॉ. विजयकुमार कहते हैं कि उद्देश्य डर फैलाना नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाना है. हर एक्सपोजर बीमारी में नहीं बदलता, क्योंकि शरीर में डीएनए रिपेयर और इम्यून सिस्टम जैसी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था होती है. लेकिन जब छोटे-छोटे जोखिम परत दर परत जुड़ते हैं, तब उनका महत्व बढ़ जाता है. नियमित सनस्क्रीन, घर में बेहतर वेंटिलेशन, प्रोसेस्ड मीट कम करना, शराब सीमित रखना, पर्याप्त नींद लेना और लंबे समय तक बैठने से बचना, समय के साथ जोखिम घटा सकते हैं. कैंसर अक्सर किसी एक बड़े फैसले से नहीं, बल्कि वर्षों की आदतों से आकार लेता है. इसलिए छोटी लेकिन लगातार सही पसंदें लंबी अवधि में बड़ा फर्क ला सकती हैं.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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