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सिर्फ एलर्जी या कुछ और? लंबे समय तक खांसी को न करें नजरअंदाज, क्या है इलाज?

Chronic Cough: लगातार खांसी अस्थमा, एलर्जी या एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याओं का संकेत हो सकती है. अगर साधारण उपायों से आराम न मिले तो समय पर जांच जरूरी है, ताकि गंभीर बीमारियों से बचाव हो सके.

Chronic Cough: लगातार खांसी आना कई बार शर्मिंदगी की वजह बन सकता है, खासकर तब जब आसपास के लोग यह सोचने लगें कि आपको कोविड-19 है. बार-बार खांसने से शरीर थक जाता है, नींद पूरी नहीं हो पाती और कभी-कभी पेशाब से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं. एक डॉक्टर के रूप में मैंने ऐसे मरीज भी देखे हैं जिनकी पसलियां बार-बार जोर से खांसने की वजह से टूट गई.

ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर कुछ लोगों को खांसी इतनी लंबी क्यों रहती है? इस लेख में लगातार खांसी के कुछ आम कारणों को समझाने की कोशिश की गई है, साथ ही यह भी बताया गया है कि कब आपको किसी गंभीर बीमारी की आशंका में डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.

हम क्यों खांसते हैं?

खांसी शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली है, जो फेफड़ों को धूल, कीटाणुओं और हानिकारक चीजों से बचाने में मदद करती है. यह प्रक्रिया हवा को ज़ोर से बाहर निकालती है ताकि वायुमार्ग साफ रह सकें. पुरानी फेफड़ों की बीमारियों जैसे क्रोनिक ब्रोंकाइटिस या ब्रोन्काइक्टेसिस में खांसी अधिक होती है क्योंकि फेफड़ों की सफाई करने वाले सीलिया ठीक से काम नहीं करते. खांसी दो प्रकार की होती है — गीली खांसी, जिसमें बलगम निकलता है, और सूखी खांसी, जो बिना बलगम के केवल गले या वायुमार्ग की अधिक संवेदनशीलता के कारण होती है.

लंबे समय तक खांसी रहने की वजह: 

अगर किसी वयस्क को 8 हफ्तों से ज्यादा या किसी बच्चे को 4 हफ्तों से ज्यादा खांसी बनी रहे, तो उसे दीर्घकालिक या क्रोनिक खांसी माना जाता है. इसके तीन आम कारण होते हैं:

  • नाक से बलगम का गले में टपकना
  • अस्थमा
  • पेट का एसिड ऊपर आना (एसिड रिफ्लक्स)

कई बार ये दिक्कत एक साथ भी होती हैं. कुछ लोगों को "खांसी वाला अस्थमा" या "ईसिनोफिलिक ब्रोंकाइटिस" जैसी स्थितियां भी होती हैं, जिनमें फेफड़ों में सूजन रहती है, लेकिन ये आम अस्थमा की दवाओं से जल्दी ठीक नहीं होतीं.

इन्फेक्शन के बाद भी रह सकती है खांसी

सर्दी या जुकाम जैसे वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण ठीक होने के बाद भी खांसी कई हफ्तों तक बनी रह सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि संक्रमण के बाद वायुमार्ग सूज जाते हैं और अधिक संवेदनशील हो जाते हैं, जिससे हल्की-सी जलन से भी खांसी शुरू हो जाती है. बलगम भी ज्यादा चिपचिपा हो जाता है, जिसे साफ करना फेफड़ों की सीलिया के लिए मुश्किल होता है. साथ ही, एलर्जी पैदा करने वाले कण भी गले की कमजोर परत में घुसकर खांसी को और बढ़ा सकते हैं. इससे ठीक होने में समय लग सकता है.

क्या ये कोई नई बीमारी का संकेत है?

जब खांसी लंबे समय तक बनी रहती है, तो लोगों को अक्सर यह डर होता है कि कहीं वायरल संक्रमण के बाद कोई नया बैक्टीरियल (जीवाणु) संक्रमण तो नहीं हो गया, जिसके लिए एंटीबायोटिक दवा चाहिए. लेकिन केवल पीले या हरे कफ से इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.

डॉक्टर किसी गंभीर संक्रमण का पता लगाने के लिए पूरी तरह से आपके लक्षणों की जांच करते हैं — जैसे सांस लेने में दिक्कत, तेज बुखार या फेफड़ों में अजीब सी आवाज आना. इसके अलावा यह भी देखा जाता है कि कहीं आपको अस्थमा या कोई एलर्जी तो नहीं है, जिसका पहले पता नहीं चला.

इलाज क्या है?

अगर किसी को लगातार खांसी है लेकिन वह बाकी मामलों में ठीक है, तो एंटीबायोटिक दवाएं आमतौर पर जरूरी नहीं होतीं क्योंकि खांसी अक्सर जलन से होती है, न कि संक्रमण से. खांसी कम करने के लिए सलाइन स्प्रे, भाप लेना, गले के स्प्रे और शहद जैसे सरल उपाय फायदेमंद होते हैं. खांसी की दवाओं से ज्यादा लाभ नहीं होता और इनके साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं. कभी-कभी खांसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है, जैसे फेफड़ों का कैंसर — हालांकि यह  बहुत कम है. इसलिए, अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे तो छाती का एक्स-रे और फेफड़ों की जांच (स्पाइरोमेट्री) करवाना चाहिए.

कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

  • अगर आपकी खांसी के साथ इनमें से कोई भी लक्षण है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए
  • खांसी के साथ खून आना
  • बहुत ज्यादा कफ बनना
  • सांस लेने में तकलीफ, खासकर आराम करते समय या रात में
  • निगलने में परेशानी होना
  • वजन कम होना या लगातार बुखार रहना
  • बार-बार निमोनिया होना
  • 45 वर्ष से ज्यादा उम्र के धूम्रपान करने वालों में नई तरह की खांसी का होना

अगर कारण पता न चले तो?

कभी-कभी ऐसा होता है कि पूरी जांच और इलाज के बावजूद भी खांसी ठीक नहीं होती. ऐसी हालत को रीफ्रैक्टरी क्रोनिक खांसी कहा जाता है, यानी इलाज के बावजूद बनी रहने वाली पुरानी खांसी.

जब खांसी की कोई खास वजह नहीं पता चलती, तो इसे अस्पष्ट क्रोनिक खांसी कहा जाता है. पहले ऐसी खांसी को मानसिक तनाव या आदत की वजह से होने वाली माना जाता था, लेकिन अब चिकित्सा विज्ञान इसे गंभीरता से लेता है और यह धारणा बदल चुकी है.

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