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Woolen History: बड़ी दिलचस्प है ऊन से स्वेटर बनने की कहानी, जानें कैसा है इतिहास, कहां से हुई शुरुआत

Woolen Cloths : जिस ऊन से बने कपड़े आप सर्दियों में ठंड से बचने के लिए पहनते हैं, क्या आप जानते हैं कि वे कहां से आए हैं. उनका इतिहास क्या है और पहली बार उनका इस्तेमाल कैसे हुआ था.

Woolen Clothes History : बस एक दो महीने और फिर शुरू हो जाएगा ठंड का मौसम. सर्दियों से बचने हम ऊनी कपड़े (Woolen clothes) पहनते हैं. मां के हाथों का स्वेटर हो या मार्केट में मिलते शॉल, दास्ताने और मोजे..ये हमें सर्द मौसम से बचाते हैं. कई लोगों को तो सर्दी का मौसम काफी पसंद होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस ऊन के कपड़ों को आप इतने पसंद से पहनते हैं, उसका इतिहास (Woolen clothes History) भी काफी इंटरेस्टिंग हैं. चलिए आज आपको बताते हैं कि ऊन बनाने का आइडिया कहां से आया, कैसे इसकी शुरुआत हुई, पहली बार इससे बने कपड़े कब और कहां पहने गए थे...
 
ऋग्वेद में मिलता है ऊन का जिक्र
ऊन का इतिहास काफी प्राचीन माना जाता है. वेदों में धार्मिक कर्मकांडों के लिए ऊनी वस्त्रों का जिक्र मिलता है. ऋग्वेद में गड़ेरियों के देवता पश्म की स्तुति का वर्णन है और ऊन कातने का उल्लेख भी. माना जाता है किकि हजारों साल पहले जब जंगल कटने की शुरुआत हुई. बस्तियां बसने लगीं. दूध और मांस के लिए भेड़-बकरी का पालन शुरू हुआ तो यहीं से भेड़-बकरी के बालों से ऊन बनाने का आइडिया आया. माना जाता है कि उसी वक्त सबसे पहले ऊन से कपड़े बनाए गए. मिस्र, बेबिलोन की कब्रों में भी ऊनी कपड़ों के टुकड़े मिले हैं.
 
रोमन आक्रमण से पहले ब्रिटेन में ऊनी कपड़ो का इस्तेमाल
इतिहास में जिक्र है कि रोमन आक्रमण से पहले ब्रिटेन के लोग ऊनी कपड़े पहनते थे और इसका इस्तेमाल करते थे। विंचेस्टर फैक्टरी ने ऊन के इस्तेमाल शुरू होने के बाद इंग्लैंड में इसका उपयोग हुआ. साल 1788 में अमेरिका के हार्टफोर्ड में पानी से चलने वाली ऊन फैक्टरी की शुरुआत हुई. तब ऊन को केराटिन नाम की प्रोटीन से बनाया जाता था. यह वही प्रोटीन है, जिससे हमारे बाल-नाखून, चिड़ियों के पंख और जानवरों के सींग बने होते हैं. 
 
ऊन असली है तो आग नहीं पकड़ती
दरअसल, ऊनी कपड़ों में मौजूद प्रोटीन कुछ कीट-पतंगों की इल्लियां को खूब पसंद होता है. वे इसे आराम से खाती है. प्रोटीन और धागे में जो पानी की मौजूदगी होती है, उसके कारण अगर ऊन असली है तो उसमें कभी भी आग नहीं पकड़ सकती. ज्यादातर ऊन व्हाइट, ब्लैक और ब्राउन कलर में होते हैं. 
 
कहां की ऊन सबसे बढ़िया
कश्मीर, तिब्बत और पामीर के पठार में पाए जाने वाली बकरियों के ऊन सबसे बढ़ियां किस्म की ऊन मानी जाती है. इस ऊन को पशमीना ऊन कहते हैं. दक्षिण अमेरिका में पेरू के एंडीज की पहाड़ियों में विकुना नाम के जानवर में भी पशमीना जैसी बढ़िया ऊन मिलती है. यह सबसे महंगी मानी जाती है. मेरिनो नस्ल की भेड़ों की ऊन अच्छी किस्म की ऊन मानी जाती है. कहा यह भी जाता है कि एक मेरिनो भेड़ सालभर में  5,500 मील लंबाई तक का ऊन बना देती है. 
 
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