Kidney Health: किडनी की सुरक्षा के लिए आयुर्वेद का वरदान! पतंजलि का दावा- रीनोग्रिट ने कम किए दुष्प्रभाव
किडनी शरीर का महत्वपूर्ण अंग है, जो रक्त को साफ करती है, विषैले तत्व निकालती है, ब्लड प्रेशर नियंत्रित करती है और मिनरल्स संतुलन बनाए रखती है। अधिक एलोपैथिक दवा किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है.

Kidney Health: किडनी हमारे शरीर के सबसे खास अंगों में से एक है, जो रक्त को साफ करने का काम करती है और शरीर के विषैले तत्वों को पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकालती है. इसके अलावा, किडनी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, रेड ब्लड सेल्स को बनाने और शरीर में मिनरल्स तथा इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है. किडनी की संरचनात्मक इकाईयों को नेफ्रॉन्स कहा जाता है, जो ग्लूकोज, पानी और अमीनो एसिड जैसे खास तत्वों को दुबारा ऐब्सॉर्ब करके बॉडी के लिए उपलब्ध कराते हैं.
हालांकि, एलोपैथिक दवाइयों का इस्तेमाल बहुत अधिक हो रहा है. इनका जरूरत से ज्यादा और लंबे समय तक सेवन किडनी के लिए हानिकारक साबित हो सकता है. रिसर्च के मुताबिक 5-35% मामलों में वैन्कोमाइसिन के कारण किडनी के काम करने की क्षमता कम हो जाती है. इससे मरीज को इलाज के लिए अधिक समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है, उसका दवाइयों और इलाज़ का खर्च भी बढ़ जाता है और जान का जोखिम भी बढ़ता है.
वैन्कोमाइसिन से किडनी को नुकसान कैसे होता है?
वैन्कोमाइसिन से किडनी को होने वाले नुकसान के मुख्य कारण तीन हैं.
- यह शरीर में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) को बढ़ाता है, जो किडनी की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं.
- यह किडनी के ट्यूब्यूल्स के आसपास सूजन पैदा करता है, जिसे एक्यूट इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस कहा जाता है.
- सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की वजह से किडनी की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, जिससे किडनी सही से काम नहीं कर पाती.
किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षणों को पहचानना हमारे लिए बेहद जरूरी है ताकि समय रहते इसका इलाज किया जा सके. इसके आम लक्षण हैं – पेशाब की मात्र कम होना, पैरों और टखनों में सूजन, कमजोरी महसूस होना या मानसिक भ्रम की स्थिति पैदा होना. एक्सपर्ट का कहना है कि अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए, तो स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है.
किडनी स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेदिक समाधान
पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभाव का ध्यान रखते हुए आयुर्वेदिक औषधि रीनोग्रिट का निर्माण किया है. इसमें अपामार्ग, कासनी, पाषाणभेद, पलाश, वरुण, पुनर्नवा मूल और गोखरू जैसी प्राकृतिक जड़ी-बूटियां शामिल हैं. मोनोस्पर्मोसाइडऔर ब्यूटिन में मौजूद घटक जैसे गैलिक एसिड, बर्जेनिन ,मिथाइल गैलेट, क्वेरसेटिन, बोइराविनोनबी, जो किडनी के लिए लाभदायक हैं.
अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट पर जाएं
https://www.patanjaliayurved.net/
आधुनिक रिसर्च में रीनोग्रिट की प्रभावशीलता
पतंजलि अनुसंधान संस्थान का कहना है कि रीनोग्रिट की प्रभावशीलता का परीक्षण दो तरीकों से किया गया.
- मनुष्य की किडनी के प्रॉक्सिमल ट्यूब्यूलर कोशिकाओं से बनी थ्री-डाइमेंशनल संरचनाएं (स्फेरॉइड्स) तैयार की गई और उन पर वैन्कोमाइसिन का असर लागू किया गया. इसके बाद, ‘इन-विट्रो’ परीक्षण में रीनोग्रिट का उपयोग इन स्फेरॉइड्स पर किया गया, जिसमें यह देखा गया कि औषधि ने किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले मार्करों को कम किया.
- ‘इन-वीवो’ परीक्षण किया गया, जिसमें चूहों को वैन्कोमाइसिन दिया गया और उनकी किडनी का विश्लेषण किया गया. इसमें रक्त यूरिया नाइट्रोजन, सीरम क्रिएटिनिन, उनकी निकासी, अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट, शरीर और किडनी के वजन का अनुपात, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और जीन एक्सप्रेशन भी मापा गया. इस दौरान रीनोग्रिट ने रोग से संबंधित सभी पैरामीटर्स को सामान्य स्थिति में लाने में मदद की.
पतंजलि की रीनोग्रिट औषधि ने यह सिद्ध कर दिया है कि आयुर्वेद में आधुनिक चिकित्सा की चुनौतियों का समाधान करने की क्षमता मौजूद है. यह न केवल वैन्कोमाइसिन जैसे एंटीबायोटिक्स के दुष्प्रभाव से किडनी की सुरक्षा करती है, बल्कि उसे स्वस्थ और मजबूत भी बनाती है. प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर आधारित होने के कारण यह सुरक्षित है और किडनी स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई क्रांति का संकेत देती है. रीनोग्रिट यह भरोसा भी देता है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा हमारे स्वास्थ्य के लिए एक प्रभावी और भरोसेमंद विकल्प है.
Disclaimer: This is a sponsored article. ABP Network Pvt. Ltd. and/or ABP Live do not endorse/subscribe to its contents and/or views expressed herein. All information is provided on an as-is basis. The information does not constitute a medical advice or an offer to buy. Consult an expert advisor/health professional before any such purchase. Reader discretion is advised.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL
























