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रोबोट सर्जरी से लेकर एग्रीकल्चर तक... तकनीक ने काफी तेजी से ऐसे बदले हर क्षेत्र के आयाम

तकनीक हर क्षेत्र  में मदद कर सकती है. तकनीक के क्षेत्र में आ जाए तो कृषि में बदलाव और किसानी को नया रूप देखने को मिल सकता है.

आवश्यकता ही अविष्कार की जननी है. ये वाक्य चरितार्थ कोरोना के समय में हुआ. कोरोना के मुसिबत की समय में कई चीजों की आवश्यकता हुई. उसके बाद तकनीक का अविष्कार तेजी से हुआ. दुनिया जब कोरोना महामारी से उबरने के लिए वैक्सीन की प्रतीक्षा कर थी, तब तकनीक ने काफी मदद की. करीब 1.40 अरब आबादी वाले भारत में रिकार्ड समय में टीकाकरण कार्यक्रम संपन्न कर करने में भी तकनीक ने खूब भूमिका निभाई. कोरोना के समय में जब महामारी दो तिहाई आबादी ग्रामीण क्षेत्रों या ऐसी जगहों पर थी, जहां पहुंचना आसान नहीं था, उसमें अहम भूमिका तकनीक ने निभाई.

आज डिजिटल प्लेटफार्म ने कई चीजों को आसान कर दिया है. उस समय में तकनीक की मदद से कोविन ऐप ने टीकाकरण की प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया. इसके माध्यम से रजिस्ट्रेशन, टीकाकरण, अप्वाइंटमेंट और डिजिटल वैक्सीन सर्टिफिकेट मिलने में काफी मदद हुआ. आज तकनीक ने कई काम को आसान कर दिया है. आज तकनीक की राह ने हर क्षेत्र के काम को आसान कर दिया है. आज स्वास्थ्य से लेकर कृषि तक में कई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. आज डिजिटल और तकनीक ने ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्र तक पेमेंट की प्रक्रिया आसान कर दिया है. डिजिटल ने ही गांव तक यूपीआई की पेमेंट को सक्सेस किया है. टेक्नोलॉजी हर बीतते दिन के साथ कुछ नया और अपडेट ला रही है. जो इंसान के जीवन को बहुत ही आसान बना रही है.   

लोग भी अपना रहे तकनीक की सहजता 

लोग भी तकनीक की सहजता को ढ़ंग से अपना रहे हैं. यूपीआई, डिजिलॅाकर, ई-संजीवनी, टेलिमेडिसीन आदि प्लेटफार्म का जमकर उपयोग किया जा रहा है. पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण तकनीक के साथ भारतीयों का जुड़ाव काफी तेजी से हो रहा है. भारत ही नहीं बल्कि तमाम देश नयी तकनीकों को अपना रहे हैं. तकनीक को और विकसित करने में दुनिया के कई देश जुटे हैं. दुनिया में जहां डिजिटल असमानता की चर्चा होती है, वहीं भारत डिजिटली समावेशी का नया समाज बनते जा रहा है.

चुनाव के आगाज होने के बाद माइक्रोसाफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुलाकात भी हुई थी. जिसमें डिजिटल ढांचा के विकास की राह पर लाने, महिलाओं स्वास्थ्य देखभाल, कृषि के अलावा शिक्षा में तकनीकी प्रगति के बारे में बातें हुई. तकनीक के हस्तक्षेप से कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल में काफी तरक्की देखने को मिल सकती है. तकनीक और विज्ञान के मामले में भारत भी हमेशा से आगे रहा है. विषय में वो चाहे गणित हो या फिर सर्जरी की थ्योरी, सभी में भारत ने दुनिया को विज्ञान के कई फॉर्मुले और तकनीक साझा किया  है. आज भारत के आईटी,अकाउंटिंग और कस्टमर सर्विस के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. 

तकनीक कैसे कर सकती है मदद

तकनीक हर क्षेत्र  में मदद कर सकती है. तकनीक के क्षेत्र में आ जाए तो कृषि में बदलाव और किसानी को नया रूप देखने को मिल सकता है. तकनीक से नवाचार खेती ही बढ़ती आबादी के लिए और मौजूदा कृषि योग्य भूमि और संसाधनों से पर्याप्त उपज लेने में मददगार साबित हो रही है. तकनीक से अच्छी फसल तैयार करने, उसकी निगरानी, फसलों को कीटों और रोगों से बचाने से मदद मिल रहा है. देखा जाए तो तकनीक आर्थिकी के सभी में तरक्की की उत्प्रेरक बनने में एक बेहतर कदम बनते जा रही है. तकनीक से ही मिट्टी की जांच कर उसके बारे में और मिट्टी में होने वाले रोग के बारे में जानकारी पता किया जाता है.

तकनीक से फसल प्रबंधन, रियल टाइम डाटा, मौसम पूर्वानुमान और आटोमैटिक सिंचाई व्यवस्था कृषि क्षेत्र में जानकारी प्राप्त करना एक अच्छा कदम है. तकनीक ने शिक्षा को एक नई दिशा दिया है. तकनीक से ही स्मार्ट और वर्जुअल क्लासरूम  चलना शुरू हुआ. आज के समय में एआइ और मशीन लर्निंग पारंपरिक शिक्षण-प्रशिक्षण को बदल रहे हैं.  एआइ सीखने और सिखाने के बीच अंतराल को कम करने में काफी सक्षम साबित हो रहा है. तकनीक के माध्यम से एआइ चैटबाट और वर्चुअल असिस्टेंट एकेडमिक सहायता, प्रश्नों के जवाब और दिशा-निर्देश देने में मददगार साबित हो रहे हैं. तकनीक स्वास्थ्य के क्षेत्र में चिकित्सकों, मेडिकल पेशेवरों की कमी को दूर करने तथा गुणवत्तापूर्ण मेडिकल सेवाओं को बेहतर बना रहा है. इससे मुश्किल और दूरदराज के क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को आसानी से पहुंचाया जा रहा है. कुछ वर्षों में वर्चुअल हेल्थ केयर असिस्टेंट और चैटबाट ने उपचार को आसान बनाया है. तकनीक से ही रोबोटिक सर्जरी और मेडिकल एजुकेशन व ट्रेनिंग में सहयोग मिल रहा है.   

भारत बनेगा तकनीक के क्षेत्र में एक शक्ति

किसी प्रकार की थ्योरी को आसान बनाने का काम चैटजीपीटी ने किया है. इसके अलावा भारत की अपनी तकनीक की मदद से चंद्रयान 3 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भेजा था.अभी भारत में तीन सेमिकंडक्डर के लिए प्लांट लगाए जा रहे हैं. जिससे चीप, बिजली और कई कार्य में उसका उपयोग किया जाएगा. भारत अपने तकनीक से इलेक्ट्रिक वाहन बना रहा है. जिसका बाजार में खूब मांग है. आने वाले समय में भारत तकनीक के क्षेत्र में एक शक्ति बन कर खड़ा होगा इससे इंकार नहीं किया जा सकता. आत्मनिर्भर भारत की कदम ने भी भारत को काफी मजबूत किया है. 

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