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Airplane Seats: खिड़कियों के सामने क्यों नहीं होती प्लेन की सीट, जानें क्या है इसकी वजह?

Airplane Seats: विमान में कभी भी सीट के अलाइनमेंट में खिड़की नहीं होती है. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

Airplane Seats: हवाई जहाज से यात्रा करने वाले अक्सर एक परफेक्ट विंडो सीट की उम्मीद करते हैं. वे चाहते हैं कि एक ऐसी सीट मिले जहां से बादल और नीचे शहरों का नजारा एकदम सही दिखे. लेकिन इसके बावजूद भी कई यात्री यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि उनकी सीट दो खिड़कियों के बीच अजीब तरह से बनी हुई है. यह कोई डिजाइन की गलती नहीं है. आइए जानते हैं कि आखिर क्यों खिड़कियों के सामने नहीं होती प्लेन की सीट.

विमान का ढांचा तय करता है खिड़कियों की जगह

एक विमान में खिड़कियों की स्थिति सीट के लगाए जाने से काफी पहले तय हो जाती है. बोइंग और एयरबस जैसे निर्माता धड़ को ऊंचाई पर ज्यादा हवा के दबाव को झेलने के लिए डिजाइन करते हैं. खिड़कियों को मजबूत स्ट्रक्चरल फ्रेम के बीच एक तय दूरी पर रखा जाता है. ऐसा इसलिए ताकि दबाव पूरे विमान के शरीर पर समान रूप से बंटे. 

एयरलाइंस तय करती है सिटिंग लेआउट

जबकि विमान निर्माता विमान का बाहरी ढांचा डिजाइन करते हैं, एयरलाइंस यह तय करती है की अंदरूनी हिस्सा कैसे व्यवस्थित किया जाएगा. एयरलाइंस अपने बिजनेस मॉडल के आधार पर सेटिंग लेआउट को कस्टमाइज्ड करती है. बस यही वजह है कि सीट की पंक्ति को खिड़की के एलाइनमेंट के बजाय एयरलाइंस की पसंद के अनुसार रखा जाता है.

क्यों होता है मिसअलाइनमेंट?

राजस्व बढ़ाने के लिए एयरलाइंस अक्सर सीट पिच कम कर देती है. यह सीट की एक पंक्ति और अगले पंक्ति के बीच की दूरी होती है. यहां तक की एक या दो इंच की कमी भी एयरलाइन को ज्यादा पंक्तियां जोड़ने की अनुमति देता है. जब पंक्तियों को एक दूसरे के करीब लाया जाता है तो सीट खिड़की की पोजीशन के साथ लाइन में नहीं रहती.  इसी के साथ आपको बता दें कि विमान की दीवार का हर हिस्सा खिड़कियों के लिए खाली नहीं होता. कुछ पैनलों के पीछे एयर कंडीशनिंग डक्ट, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, इंसुलेशन और स्ट्रक्चरल मजबूती होती है. इन जगहों में खिड़कियां हो ही नहीं सकती.

निकास पर ध्यान ज्यादा रखते हैं सुरक्षा नियम

कानूनी और सुरक्षा की दृष्टि से सिर्फ आपातकालीन निकास पंक्तियों को ही खिड़कियों के साथ पूरी तरह से अलाइन होना चाहिए. ऐसा इसलिए ताकि तेजी से निकासी सुनिश्चित हो सके. रेगुलर सिटिंग रो के लिए ऐसी कोई भी जरूरत नहीं है की सीट खिड़की की पोजीशन से मेल खाएं.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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