Union Budget 2026: अंग्रेज कैसे पेश करते थे भारत का बजट, क्या वे भी खाते थे दही-चीनी?
Union Budget 2026: आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं. राष्ट्रपति ने वित्त मंत्री को दही और चीनी खिलाई है. आइए जानते हैं कि अंग्रेज कैसे पेश करते थे बजट.

Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज केंद्रीय बजट पेश करने जा रही हैं. बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वित्त मंत्री को दही और चीनी खिलाई. यह एक ऐसी प्रथा होती है जिसे सौभाग्य लाने और एक शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. इसी बीच आइए जानते हैं कि ब्रिटिश शासन के दौरान बजट कैसे दिखते थे और क्या वह भी ऐसी किसी परंपरा का पालन करते थे.
ब्रिटिश शासन के तहत पहला बजट
भारत का पहला औपचारिक बजट 7 अप्रैल 1860 को ब्रिटिश शासन के दौरान पेश किया गया था. इसे जेम्स विल्सन ने पेश किया था जो एक स्कॉटिश अर्थशास्त्री थे और वायसराय की परिषद में वित्त सदस्य के रूप में काम करते थे. यह बजट पूरी तरह से औपनिवेशिक प्रशासनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया था.
नहीं थी कोई ऐसी परंपरा
ब्रिटिश काल में दही और चीनी खाने की कोई भी परंपरा नहीं थी. यह रस्म पूरी तरह से एक भारतीय संस्कृतिक प्रथा है जो इस विश्वास को मानती है की दही और चीनी समृद्धि और एक सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक है. बजट समारोह के साथ इसका जुड़ाव एक हालिया विकास है.
बजट शाम 5 बजे क्यों पेश किया जाता था
दशकों तक भारत में बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था. इसकी वजह भारतीय सुविधा से कोई लेना देना नहीं था. भारत ब्रिटेन से 5.5 घंटे आगे है और दिल्ली में शाम 5:00 बजे का बजट पेश करना लंदन में सुबह 11:30 के बराबर था. इससे ब्रिटिश संसद को उसी दिन भारत के बजट पर चर्चा करने में मदद मिलती थी.
बजट ब्रीफकेस की उत्पत्ति
ब्रिटिशों ने चमड़े के ब्रीफकेस में बजट दस्तावेजों को ले जाने की परंपरा शुरू की थी. इसे आमतौर पर ग्लैडस्टोन बॉक्स के नाम से जाना जाता था. खास बात यह है कि बजट शब्द ही फ्रांसीसी शब्द बौजेट से आया है. इसका मतलब होता है चमड़े का बैग. यह प्रतीक भी स्वतंत्रता के बाद कई सालों तक भारत की बजट परंपरा का हिस्सा बन रहा.
लाल फाइनल और औपनिवेशिक गोपनीयता
एक और ब्रिटिश विरासत बजट दस्तावेजों के लिए लाल रंग की फाइलों और कवर का इस्तेमाल था. बजट को काफी गोपनीय दस्तावेज माना जाता था जिसकी सामग्री को प्रस्तुति के दिन तक सख्ती से गुप्त रखा जाता था.
बजट परंपराओं में बदलाव
बीते समय में भारत ने जानबूझकर औपनिवेशिक प्रतीकों से दूरी बनाई है. लेदर ब्रीफकेस की जगह अब पारंपरिक लाल कपड़े का फोल्डर आ गया है और राष्ट्रपति भवन में दही चीनी के रस्में सांस्कृतिक पहचान बन चुकी है. राष्ट्रपति मुर्मू ने 2024, 2025 और 2026 के बजट से पहले निर्मला सीतारमण को दही और चीनी खिलाई है. इस वजह से यह एक जानी पहचानी आधुनिक रस्म बन चुका है.
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Source: IOCL



























