पाकिस्तान में कितनी चीनी होती है, दुनिया में किस नंबर पर?
Pakistan Sugar Production: भारत में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. आइए जानते हैं क्या है पाकिस्तान के हाल.

- चीनी उद्योग पर हेरफेर, जमाखोरी और कार्टेल के आरोप हैं।
Pakistan Sugar Production: त्योहार के सीजन से पहले ही भारत में चीनी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है. पिछले 1 महीने में चीनी की खुदरा कीमत लगभग ₹48.18 से बढ़कर ₹65 प्रति किलोग्राम हो गई है. जिस तरफ भारत के चीनी बाजार पर कड़ी नजर रखी जा रही है वहीं पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में भी वहां के चीनी उद्योग की एक बड़ी भूमिका है. लेकिन पाकिस्तान असल में कितनी चीनी पैदा करता है और ग्लोबल चीनी बाजार में उसकी क्या स्थिति है? आइए जानते हैं इस सवाल का जवाब.
पाकिस्तान कितनी चीनी पैदा करता है?
पाकिस्तान हर साल लगभग 65 लाख से 70 लाख मीट्रिक टन चीनी पैदा करता है. हालांकि मौसम के हालात, बारिश और गन्ने की उपलब्धता के आधार पर उत्पादन में बदलाव हो सकता है. देश में सालाना लगभग 850 लाख से 900 लाख मीट्रिक टन गन्ने का उत्पादन होता है. इस चीनी मिलों में प्रोसेस करके रिफाइंड चीनी बनाई जाती है. गन्ने की खेती लगभग 10 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि पर की जाती है. उत्पादन का ज्यादातर हिस्सा पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में होता है.

पाकिस्तान में कितनी चीनी मिलें हैं?
आजादी के बाद से पाकिस्तान के चीनी उद्योगों का काफी विस्तार हुआ है. 1947 में देश में सिर्फ दो चीनी मिलें चल रही थी. आज पाकिस्तान में 80 से ज्यादा चीनी मिलें हैं. इनमें आधुनिक प्रोसेसिंग सुविधा हैं और यह मिलें गन्ने के मुख्य उत्पादक क्षेत्र में फैली हुई है. उद्योग के विस्तार ने गन्ने को एक अहम कमर्शियल फसल बना दिया है. साथ ही किसानों, ट्रांसपोर्टर, मिल मजदूर और दूसरे व्यवसाय को शामिल करते एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया है.
ग्लोबल चीनी उत्पादन में पाकिस्तान का क्या स्थान है?
पाकिस्तान दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देश में शामिल हैं. हालांकि यह ब्राजील और भारत जैसे बड़े उत्पादकों से काफी पीछे है. इसका सालाना उत्पादन लगभग 65 से 70 लाख टन है. यह इसे प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में जगह दिलाता है. हालांकि मौसम के हालात, गन्ने के उत्पादन और मिलों के प्रदर्शन के आधार पर पाकिस्तान की स्थिति हर साल बदल सकती है.
पाकिस्तान का चीनी एक्सपोर्ट इंपोर्ट चक्र
पाकिस्तान का चीनी बाजार बार-बार एक्सपोर्ट और इंपोर्ट से जुड़े मुश्किल चक्र का सामना करता रहा है. जब उत्पादन घरेलू जरूरत से ज्यादा होता है तो अतिरिक्त चीनी को बांग्लादेश, मध्य एशिया और अफ्रीकी देशों जैसे बाजार में एक्सपोर्ट किया जा सकता है. चीनी के एक्सपोर्ट से पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा मिलती है. हालांकि बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट करने से पहले घरेलू स्टॉक कम हो सकता है. अगर उत्पादन या फिर उपलब्ध रिजर्व काफी नहीं है तो घरेलू सप्लाई कम होने से कीमत बढ़ सकती है.

पाकिस्तान चीनी इंपोर्ट क्यों करता है?
यह पाकिस्तान के चीनी उद्योग से जुड़े सबसे बड़े विवादों में से एक बन चुका है. जब अंतरराष्ट्रीय कीमत आकर्षक होती है तो मिल मालिक एक्सपोर्ट को प्राथमिकता दे सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि वे विदेशी बाजारों से ज्यादा कमाई कर सकते हैं. लेकिन अगर काफी ज्यादा चीनी देश से बाहर चली जाती है तो घरेलू सप्लाई कम हो सकती है.
यही वजह है कि कीमतों में बढ़ोतरी सरकार को अपनी नीति बदलने और इंपोर्ट की अनुमति देने को मजबूर कर सकती है. कुछ स्थिति में पाकिस्तान ने घरेलू उपलब्धता को बढ़ाने के लिए लाखों टन चीनी इंपोर्ट की है.
चीनी कार्टेल विवाद क्या है?
पाकिस्तान का चीनी सेक्टर अक्सर कीमतों में हेर फेर, जमाखोरी और कार्टेल बनाने के आरोप से घिरा रहा है. इस उद्योग के देश के कुछ प्रमुख व्यापारिक और राजनीतिक समूह के साथ मजबूत संबंध हैं. जिसने चीनी की कीमतों को राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बना दिया है. जब भी कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो चीनी मिलों, स्टॉकहोल्डर्स, सरकारी नीति और सप्लाई चैन की भूमिका पर सवाल उठाए जाते हैं. अधिकारियों ने समय-समय पर मिली जुली कीमतों और कृत्रिम कमी के आरोपी की जांच की है.
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