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Ramadan 2026: रमजान में दुबई की सरकारी घड़ी में बड़ा बदलाव, जानें कितनी घटी ऑफिस टाइमिंग और बढ़ा वर्क फ्रॉम होम?

Ramadan 2026: रमजान में दुबई में सरकार ने काम के घंटे घटाकर परिवार को प्राथमिकता दी है. फ्लेक्सिबल टाइमिंग और दो दिन वर्क फ्रॉम होम से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी.

Ramadan 2026: रमजान का महीना शुरू होते ही दुबई में सरकारी दफ्तरों की घड़ी बदल गई है. काम के घंटे कम, लचीलापन ज्यादा और परिवार के लिए अतिरिक्त समय- सरकार ने साफ संकेत दिया है कि इस बार प्राथमिकता सिर्फ काम नहीं, बल्कि घर और समाज भी है. ईयर ऑफ द फैमिली पहल के तहत उठाया गया यह कदम लाखों कर्मचारियों की दिनचर्या को प्रभावित करेगा. आइए जानें कि आखिर नए नियम क्या हैं और इससे कामकाज पर क्या असर पड़ेगा?

दुबई में रमजान में बदले दफ्तरों के समय

दुबई सरकार ने पवित्र रमजान महीने के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए नए वर्किंग आवर्स की घोषणा की है. Dubai Government Human Resources Department द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, सोमवार से गुरुवार तक सरकारी कर्मचारी सुबह 9 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक काम करेंगे. शुक्रवार को काम का समय और कम कर दिया गया है. यह टाइमिंग सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी. इस बदलाव का मकसद साफ है कि रोजे के दौरान कर्मचारियों को परिवार और धार्मिक गतिविधियों के लिए ज्यादा समय मिल सके. 

फ्लेक्सिबल टाइमिंग

सरकार ने सिर्फ समय घटाया ही नहीं, बल्कि फ्लेक्सिबिलिटी भी बढ़ाई है. विभागों को अनुमति दी गई है कि वे कर्मचारियों को सुबह 7 बजे से 10 बजे के बीच किसी भी समय काम शुरू करने की सुविधा दें. ऐसे में शर्त यह है कि कर्मचारी अपने तय दैनिक घंटे पूरे करें. इससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो रोजे के दौरान सुबह जल्दी उठते हैं या ट्रैफिक से बचना चाहते हैं. इससे काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलेगी.

हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम

रमजान के दौरान एलिजिबल एम्प्लॉइज को हफ्ते में अधिकतम दो दिन घर से काम करने की अनुमति भी दी गई है. यह सुविधा पद और काम की प्रकृति पर निर्भर करेगी, जिन भूमिकाओं में रिमोट वर्क संभव है, वहां यह विकल्प लागू होगा. सरकार का कहना है कि इससे पारिवारिक स्थिरता मजबूत होगी और कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा. रोजे के दौरान सफर कम करने से थकान भी घटेगी. 

ईयर ऑफ द फैमिली पहल से जुड़ा कदम

यह फैसला ईयर ऑफ द फैमिली पहल का हिस्सा बताया गया है. इसका उद्देश्य कर्मचारियों को अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने का अवसर देना है, खासकर ऐसे महीने में जो सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से बेहद अहम माना जाता है. सरकार ने यह भी साफ किया है कि काम के घंटे कम होने के बावजूद उत्पादकता और संस्थागत प्रदर्शन पर असर नहीं पड़ना चाहिए. विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कामकाज सुचारु रूप से जारी रखें. 

शिफ्ट कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था

सभी सरकारी विभागों को कहा गया है कि वे शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारियों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े स्टाफ के लिए अलग और उपयुक्त टाइम-टेबल तय करें. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आवश्यक सेवाएं बिना रुकावट जारी रहें. यानी अस्पताल, सेवा केंद्र या सुविधा प्रबंधन से जुड़े विभागों में काम प्रभावित नहीं होगा, बल्कि वहां जरूरत के हिसाब से समय तय किया जाएगा. 

संघीय सरकार ने भी अपनाया मॉडल

संयुक्त अरब अमीरात की संघीय सरकार ने भी रमजान के लिए इसी तरह के समय लागू करने की घोषणा की है. संघीय संस्थाएं स्वीकृत लचीले कार्य नियमों का पालन कर सकती हैं या शुक्रवार को अपनी 70 प्रतिशत तक वर्कफोर्स को रिमोट वर्क की अनुमति दे सकती हैं, बशर्ते तय दिशानिर्देशों का पालन हो. इससे साफ है कि यह कदम सिर्फ दुबई तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर अपनाया जा रहा है. 

काम और आस्था के बीच संतुलन

रमजान के दौरान काम के घंटे कम करना खाड़ी देशों में नई बात नहीं है, लेकिन इस बार दुबई सरकार ने इसे परिवार केंद्रित पहल से जोड़कर एक नया संदेश दिया है. लचीले समय और वर्क फ्रॉम होम की सुविधा आधुनिक कार्य संस्कृति को भी दर्शाती है. सरकार का कहना है कि कर्मचारी कल्याण और संस्थागत प्रदर्शन साथ-साथ चल सकते हैं. सही योजना और तकनीक के इस्तेमाल से काम प्रभावित किए बिना कर्मचारियों को राहत दी जा सकती है.

यह भी पढ़ें: दुनिया के कितने देशों में है भारत-पाकिस्तान जैसी दुश्मनी? एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं करते पसंद

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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