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पश्मीना तो खूब सुना है, कभी शहतूश शॉल के बारे में सुना है? कीमत 15 लाख, भारत में बेचना है बैन

Shahtoosh Shawl Price: सर्दी आने के साथ ही सर्दी के कपड़े खरीदने की भी शुरुआत हो गई है. जो लोग शॉल खरीदने की सोच रहे हैं, उनकी पहली पसंद पश्मीना ही होती है, ऐसा ही एक और शॉल शहतूश है.

जब भी अच्छे शॉल की बात होती है तो अक्सर लोग पश्मीना की बात करते हैं. सर्दी में शॉल खरीदते वक्त भी लोगों की पहली पसंद पश्मीना ही होती है. कहा जाता है कि पश्मीना शॉल काफी महंगा होता है, लेकिन काफी गर्म होने की वजह से इसे ज्यादा पसंद किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इससे भी महंगा एक शॉल आता है, जो काफी गर्म भी होता है और इसका नाम है शहतूश शॉल. शहतूश शॉल इतना कीमती है कि इसका एक पीस खरीदने के लिए आपको लाखों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. लेकिन इसके बनाने की प्रोसेस ऐसी है कि इसे अब बैन भी कर दिया गया है. 

ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि शहतूश शॉल क्यों खास होता है और इसे बैन करने की वजह क्या है. इसके साथ ही आपको बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति एक शॉल खरीदना चाहता है तो उसे इसके लिए कितने रुपये खर्च करने पड़ेंगे.  तो जानते हैं शहतूश शॉल की कहानी... 

क्यों खास है शहतूश शॉल?

अगर शहतूश शॉल की बात करें तो ये चिरु नाम के एक जानवर के बालों से बनाया जाता है. ये जानवर बर्फीले पहाड़ जैसे तिब्बत और लद्दाख रिजन में पाए जाते हैं. इन चिरु के बालों का इस्तेमाल करके शहतूश शॉल बनाए जाते हैं. इन बालों से बने शॉल काफी गर्म होते है. इसलिए इन्हें पसंद किया जाता है.

क्यों इतने महंगे होते हैं?

एक तो किसी जानवर के बाल की वजह से बने होने की वजह से ये काफी महंगे होते है. इसके साथ ही खास बात ये है कि चिरु काफी दुर्लभ जानवर हैं और उनके बालों को जमा करना और उससे शॉल बनाना काफी मुश्किल काम है. कहा जाता है कि एक शॉल बनाने के लिए 4-5 चिरू के बालों का इस्तेमाल होता है, जिस वजह से इसकी रेट और भी ज्यादा हो जाती है. 

क्यों बैन है शहतूश?

दरअसल, इसके बैन होने की वजह इसकी मेकिंग प्रोसेस है. रिपोर्ट्स के अनुसार, जब एक शहतूश शॉल बनाया जाता है तो एक शॉल के बनाने में 4-5 चिरु की मौत हो जाती है. इसका नतीजा ये है कि हर साल कई चिरु की मौत सिर्फ शॉल बनाने की वजह से हो जाती है. ऐसे में इसे अब दुर्लभ जानवर माना जा रहा है और लगातार हो रही मौत की वजह से इस पर बैन लगा दिया गया है. बता दें कि साल 1975 में IUCN द्वारा शहतूश शॉल को बैन कर दिया गया और  इसके बाद 1990 में भारत ने भी इस शॉल पर प्रतिबंध लगा दिया गया. अब इसकी बिक्री बैन है. 

कितने का आता है एक शॉल

अगर इस शॉल की रेट की बात करें तो ये शॉल  शॉल 5000 डॉलर से लेकर 20 हजार डॉलर तक में भी बिकता है. यानी इसे खरीदने के लिए आपको 10-15 लाख रुपये तक भी खर्च करने पड़ सकते हैं. 

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