Pak-Saudi Defence Aggreement: पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ कर ली NATO जैसी डील, क्या भारत ने भी किसी से किया है ऐसा समझौता?
Pak-Saudi Defence Aggreement: पाकिस्तान और सऊदी अरब ने नाटो जैसा एक रक्षा समझौता किया है. आइए जानते हैं कि क्या भारत ने भी कभी किसी देश के साथ ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

Pak-Saudi Defence Aggreement: पाकिस्तान और सऊदी अरब ने एक बड़ा रक्षा समझौता किया है. यह समझौता नाटो के आपसी रक्षा समझौते जैसा ही है. 17 सितंबर को रियाद में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते का मतलब है कि एक देश पर कोई भी हमला दोनों देशों पर हमला माना जाएगा. ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत ने भी किसी देश के साथ कुछ ऐसा ही समझौता किया है या नहीं? आइए जानते हैं.
क्या भारत ने भी कभी किसी देश के साथ किया है ऐसा समझोता
भारत ने कभी किसी देश के साथ कोई नाटो जैसा समझौता नहीं किया, हालांकि एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी जरूर निभाई है. सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के नए समझौते से बिल्कुल अलग भारत ने कभी भी ऐसी कोई संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं जिसमें साफ तौर पर कहा गया हो 'एक पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा'. इसका एक कारण यह भी है कि भारत गुटनिरपेक्ष नीति का पालन करता है. इसके तहत भारत किसी भी सैन्य शक्ति गुट में शामिल नहीं होना चाहता और स्वतंत्रता के साथ शांतिपूर्ण सह अस्तित्व को बढ़ावा देता है. शीत युद्ध के दौरान भी भारत ने इसी नीति का पालन किया था. हालांकि, भारत ने मजबूत सुरक्षा और रक्षा समझौते जरूर किए हैं, खासकर रूस के साथ. रूस ने ही 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में एक निर्णायक भूमिका निभाई थी.
1971 का युद्ध और सोवियत सहयोग
भारत और सोवियत संघ के बीच 9 अगस्त 1971 को शांति, दोस्ती और सहयोग की संधि पर साइन किए गए थे. हालांकि, यह नाटो के समझौते जैसा नहीं था, लेकिन इसमें साफ तौर पर सैन्य, डिप्लोमेटिक का आर्थिक सहायता की गारंटी थी. यह समझौता काफी ज्यादा जरूरी था क्योंकि युद्ध के समय में अमेरिका ने भारत को डराने और पाकिस्तान की सहायता करने के लिए बंगाल की खाड़ी में अपना न्यूक्लियर पावर एयरक्राफ्ट यूएसएस एंटरप्राइज भेजा था.
इसी का जवाब में सोवियत संघ ने एक परमाणु पनडुब्बी को तैनात किया था, जिसे देखकर अमेरिका हैरान हो गया था. इसका मतलब था कि भारत पर कोई भी हमला सीधे अमेरिका सोवियत टकराव की वजह बन सकता है. इसलिए अमेरिका ने जोखिम नहीं उठाया था.
भारत के बाकी रणनीतिक सहयोगी
रूस के अलावा भारत के कई दूसरे देशों के साथ भी करीबी रक्षा संबंध हैं. लेकिन इनमें से किसी में भी नाटो जैसा समझौता बिल्कुल शामिल नहीं है. इनमें भूटान भारत के सबसे मजबूत सहयोगियों में से है, जिसने 2017 में चीन के साथ डोकलाम विवाद के दौरान भारत का पूरा साथ दिया था. इसके अलावा फ्रांस भी भारत का एक प्रमुख रक्षा भागीदार है. यह सैन्य उपकरणों के मामले में भी भारत की काफी ज्यादा मदद करता है.
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