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'इलाहाबाद से लंगड़ा चला लाहौर तक पहुंचा'...  आम का वो किस्सा, जिसके बाद पाकिस्तान से अकबर के पास आया ये मैसेज

आम का सीजन शुरू हो चुका है. इस सीजन में दुनियाभर के आम प्रेमी अलग-अलग किस्म के आमों को खाना पसंद करते हैं. लेकिन आज हम आपको लंगड़े आम का किस्सा बताएंगे. जानिए कहां से आया ये नाम.

फलों का राजा आम. ये लाइन आज से नहीं सालों साल से प्रचलित है. भारत में आम का सीजन शुरू हो गया है. दुनियाभर में आम के शौकीन अलग-अलग किस्म के आमों का स्वाद लेते हैं. आम को लेकर अलग-अलग शायरों ने बहुत कुछ हास्य-व्यंग लिखा भी है. जैसे अकबर इलाहाबादी व्यंग करते हुए लिखते हैं कि “असर ये तेरे अन्फ़ासे मसीहाई का है अकबर, इलाहाबाद से लंगड़ा चला लाहौर तक पहुंचा”. बता दें कि मुगल शासक अकबर को भी आम बहुत पसंद थे. लाहौर समेत भारत के अन्य हिस्सों में रहने के दौरान वो अलग-अलग जगहों से आम मंगवाता था. 

फलों का राजा आम

आम दुनियाभर में सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला फल है. आम का सीजन आने के साथ ही आम के अलग-अलग वैरायटी की डिमांड बढ़ जाती है. जिसमें दशहरी, मालदा,चौसा,हापुस, लंगड़ा समेत कई प्रकार के आम शामिल है. जानकारी के मुताबिक भारत में आम की 1500 से ज्यादा किस्में पाई जाती हैं. इनमें से कुछ आम दुनियाभर में फेमस हैं. लेकिन आज हम लंगड़ा आम के बारे में आपको बताएंगे. क्या आप जानते हैं कि इस आम का नाम लंगड़ा कैसे पड़ा था? 

लंगड़ा आम

कहा जाता है कि लंगड़ा आम का इतिहास करीब 300 साल पुराना है. लंगड़ा आम का कनेक्शन यूपी के वाराणसी से बताया जाता है. हालांकि कुछ लोग इलाहाबाद भी कहते हैं. कहानियों के मुताबिक बनारस में एक साधु रहते थे. उन्होंने एक आम का बाग लगाया था. इसकी देखभाल की जिम्मेदारी उन्होंने एक पुजारी को दी थी. लेकिन जिस पुजारी को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी, वो दिव्यांग थे. इस कारण इलाके के लोग उन्हें लंगड़ा पुजारी कहकर बुलाते थे. जब उस बाग में आम हुए तो वो बहुत मीठे थे. जिसके बाद से उस बाग और आम का नाम लंगड़ा पड़ गया था. 
बता दें कि लंगड़ा आम दुनियाभर में बहुत फेमस है. भारत से इसका बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट होता है. लंगड़ा बेहद रसीला और स्वादिष्ट होता है. भारत में हर साल लाखों टन लंगड़ा आम का उत्पादन होता है. खासकर यूपी, बिहार और मध्य प्रदेश में लंगड़ा आम खूब होता है. 

लंगड़ा आम की पहचान

बता दें कि लंगड़ा आम अंडाकार आकार का होता है. लंगड़ा आम नीचे से हल्का नुकीला होता है. इस कारण से इसकी पहचान आसानी से की जा सकती है. लंगड़ा आम पकने के बाद भी हरे रंग का ही रहता है. लंगड़ा आम की गुठली चौड़ी और पतली होती है. 

आमों का नाम

लखनऊ के इतिहासकार योगेश प्रवीन के मुताबिक आम की अधिकांश मशहूर किस्मे हैं, वो जिन जगहों पर हुई थी, उन्हें वहीं का नाम दे दिया गया था. जैसे दशहरी को यह नाम काकोरी के पास दशहरी गांव की वजह से मिला था. 

ये भी पढ़ें: Flight Rule: फ्लाइट में नहीं लेकर जा सकते हैं ये फल, जानिए इसके पीछे का कारण

गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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