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BS4 Vehicle: क्या बीएस4 की गाड़ी को बीएस6 में करा सकते हैं मोडिफाई, क्या कोई तरीका है ऐसा?

BS4 Vehicle: लोगों के बीच एक सवाल अक्सर उठता है कि क्या बीएस-4 वाहन को बीएस-6 में बदला जा सकता है या फिर नहीं. आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

BS4 Vehicle: दिल्ली एनसीआर में बढ़ते एयर पोल्यूशन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में वाहन मालिकों को एक बड़ी राहत दी है. इसमें 10 साल से ज्यादा पुराने बीएस-4 डीजल वाहनों और 15 साल से ज्यादा पुराने बीएस-4 पेट्रोल वाहनों को दंड की कार्रवाई से छूट दी गई है. इसी बीच एक सवाल लोगों के बीच खड़ा हो रहा है कि क्या बीएस-4 वाहन को बीएस-6 एमिशन स्टैंडर्ड के हिसाब से मॉडिफाई किया जा सकता है या नहीं. आइए जानते हैं.

बीएस-4 से बीएस-6 कन्वर्जन 

मौजूदा भारतीय कानून और ऑटोमोटिव नियमों के तहत बीएस-4 से बीएस-6 कन्वर्जन  संभव ही नहीं है. दरअसल किसी वाहन का भारत स्टेज एडमिशन स्टैंडर्ड उसके इंजन टाइप और मैन्युफैक्चरिंग सर्टिफिकेशन से स्थायी रूप से जुड़ा होता है. एक बार रजिस्टर होने के बाद इस स्टैंडर्ड को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेशन पर बदला नहीं जा सकता. 

कानूनी प्रतिबंध सबसे बड़ी रुकावट 

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा बनाए गए नियमों के मुताबिक किसी वाहन की एमिशन कैटिगरी को अपग्रेड करने का कोई प्रावधान ही नहीं है. आरसी पर बताया गया भारत स्टेज लेवल फाइनल होता है. भले ही बड़े मैकेनिक बदलाव किया जाए वाहन कानूनी रूप से भारत स्टेज 4 ही रहेगा भारत स्टेज 6 नहीं.

आर्थिक रूप से नुकसानदायक 

बीएस-6 स्टैंडर्ड को पूरा करने के लिए एक वाहन में इंजन, फ्यूल इंजेक्शन सिस्टम, एग्जॉस्ट आफ्टर ट्रीटमेंट सिस्टम, जैसे डिजिटल पार्टिकुलेट फिल्टर या सिलेक्टिव कैटोलिटिक रिडक्शन, साथ ही एक नए इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट में बदलाव की जरूरत होती है. इन सभी को एक पुराने वाहन में रेट्रोफिट करना तकनीक रूप से अव्यवहारिक और आर्थिक रूप से नुकसानदायक साबित होगा. 

आरटीओ नहीं देगा मान्यता 

भले ही कोई किसी तरह इंजन या एमिशन कंपोनेंट्स को अपग्रेड कर ले लेकिन आरटीओ ऐसे वाहन को बीएस-6 के रूप में रीक्लासिफाई नहीं करेगा. इससे गंभीर दिक्कतें हो सकती है जैसे इंश्योरेंस का अमान्य होना, फिटनेस सर्टिफिकेट का रिजेक्ट होना और इंस्पेक्शन के दौरान कानूनी परेशानी.

बीएस-4 वाहन का क्या कर सकते हैं 

कन्वर्जन की तो अनुमति नहीं है लेकिन बीएस-4 वाहन का इस्तेमाल जारी रखने के लिए आप उसमें सीएनजी किट लगवा सकते हैं. सरकार की तरफ से अप्रूव्ड आफ्टर मार्केट सीएनजी किट की अनुमति दी गई है. यह किट अधिकृत केंद्रों पर लगाई जानी चाहिए और आरसी पर एंडोर्स होनी चाहिए. इसी के साथ एक दूसरा ऑप्शन है ईवी रेट्रोफिटिंग. इसमें पेट्रोल या डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक ड्राइवट्रेन से बदल दिया जाता है.

ये भी पढ़ें: क्या किसी को हिंदी बोलने के लिए कर सकते हैं मजबूर, क्या कहता है कानून?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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