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सर्दियों में अचानक छा जाने वाला कोहरा आखिर बनता कैसे है? जानिए इसके पीछे का साइंस

Fog Formation Science: आजकल के सर्दी भरे मौसम में कोहरा दिखना आम बात है. अक्सर यह सुबह या रात के वक्त ज्यादा दिखाई देता है. आइए जानें कि सर्दियों में कोहरा क्यों पड़ता है.

सुबह घर से निकलते ही अगर सामने सब कुछ सफेद-सफेद दिखने लगे, सड़क, पेड़ और इमारतें धुंध में गायब हो जाएं, तो समझ जाइए कि आजकल कड़ाके की सर्दियों में कोहरे ने दस्तक दे दी है. खैर सर्दियों में यह नजारा आम हो जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अचानक इतना घना कोहरा कैसे बन जाता है? क्यों कुछ दिनों में यह हल्का होता है और कभी-कभी दीवार की तरह खड़ा नजर आता है? इसके पीछे मौसम का एक दिलचस्प विज्ञान छिपा है.

सर्दियों में कोहरा क्यों बनता है?

हमारे आसपास की हवा में हमेशा थोड़ी नमी मौजूद रहती है, जिसे वाटर वेपर कहा जाता है. सर्दियों में जब रात के समय तापमान तेजी से गिरता है, तो हवा ठंडी हो जाती है. ठंडी हवा ज्यादा नमी नहीं रोक पाती. ऐसे में हवा में मौजूद वाटर वेपर ठंड के संपर्क में आकर छोटी-छोटी पानी की बूंदों में बदलने लगते हैं. इस प्रक्रिया को कंडेन्सेशन कहा जाता है. यही बेहद महीन बूंदें हवा में तैरती रहती हैं और कोहरे का रूप ले लेती हैं.

सुबह और रात में कोहरा ज्यादा क्यों दिखता है?

अक्सर देखा जाता है कि कोहरा देर रात या तड़के सुबह ज्यादा घना होता है. इसकी वजह यह है कि इस समय तापमान सबसे कम होता है. जमीन तेजी से ठंडी हो जाती है और उसके संपर्क में आने वाली हवा भी ठंडी होकर नमी को बूंदों में बदल देती है. दिन निकलते ही सूरज की गर्मी बढ़ती है, जिससे तापमान बढ़ता है और कोहरे की बूंदें फिर से भाप में बदलने लगती हैं. इसी कारण दोपहर तक कोहरा छंट जाता है.

कभी हल्का तो कभी बेहद घना क्यों होता है कोहरा?

कोहरे की मात्रा कई बातों पर निर्भर करती है. अगर हवा में नमी ज्यादा है और तापमान बहुत तेजी से गिरता है, तो कोहरा ज्यादा घना बनता है. वहीं अगर हवा चल रही हो, तो कोहरे की बूंदें बिखर जाती हैं और कोहरा हल्का पड़ जाता है. हवा की गति, तापमान में बदलाव और सूरज की गर्मी, तीनों मिलकर तय करते हैं कि कोहरा कितना घना रहेगा.

प्रदूषण और कोहरे का गहरा रिश्ता

शहरों में कोहरा अक्सर ज्यादा घना नजर आता है. इसकी एक बड़ी वजह प्रदूषण है. हवा में मौजूद धूल और धुएं के कण पानी की बूंदों को चिपकने के लिए सतह दे देते हैं. इससे कोहरे की बूंदें ज्यादा देर तक हवा में बनी रहती हैं. इसी कारण बड़े शहरों में कोहरा जल्दी छंटता नहीं और विजिबिलिटी काफी कम हो जाती है.

क्या हर जगह कोहरा एक जैसा होता है?

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कोहरे के प्रकार भी अलग होते हैं. कहीं यह समुद्र से आने वाली ठंडी हवा की वजह से बनता है, तो कहीं पहाड़ी इलाकों में ऊंचाई के कारण. कुछ तटीय क्षेत्रों में तो साल के ज्यादातर समय कोहरा छाया रहता है. हालांकि, सर्दियों में उत्तर भारत में दिखने वाला कोहरा मुख्य रूप से तापमान गिरने और नमी के कारण बनता है.

क्या भविष्य में कोहरा और बढ़ेगा?

मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु बदलाव के कारण आने वाले समय में कोहरे की समस्या और गंभीर हो सकती है. ठंडी रातें और प्रदूषण मिलकर कोहरे को ज्यादा घना बना सकते हैं, जिससे विजिबिलिटी और स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ सकता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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