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Highest Gravitational Force: भारत में कहां है सबसे ज्‍यादा गुरुत्‍वाकर्षण बल, यहां की एनर्जी को देखकर वैज्ञानिक हैरान

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के बारे में अधिकांश लोग जानते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में किस जगह पर सबसे ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल लगता है. बता दें दुनियाभर में एक जैसी स्थिति नहीं होती है.

न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियम के बारे में हम सभी लोग जानते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि धरती पर सबसे ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल कहां पर लगता है. आज हम आपको बताएंगे कि धरती पर सबसे ज्यादा गुरुत्वाकर्षण बल कहां पर लगता है और इसमें कौन सी जगह भारत में है. 

भारत में गुरुत्वाकर्षण बल का केंद्र

भारत के उत्तराखंड राज्य में भी गुरुत्वाकर्षण बल का केंद्र है. ये जगह उत्तराखंड राज्य के कुमाऊं क्षेत्र का अल्मोड़ा जिला है. बता दें कि पूरी दुनिया में हर जगह पर गुत्‍वाकर्षण बल एक जैसा नहीं होता है. दुनियाभर में तीन जगह ऐसी हैं, जहां पर जबरदस्‍त चुंबकीय शक्ति का केंद्र माना जाता है. इनमें से एक जगह भारत में उत्‍तराखंड राज्‍य के अल्‍मोड़ा जिले में है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने जब अल्‍मोड़ा जिले में कसार पर्वत पर शोध और अध्‍ययन किया तो पता चला कि कसार देवी मंदिर के आसपास का पूरा क्षेत्र वैन एलेन बेल्‍ट का हिस्‍सा है. वहीं शोध जब आगे बढ़ाया गया तो नासा कसार पर्वत की जबरदस्‍त कॉस्मिक एनर्जी देखकर हैरान रह गया था.

नासा ने क्या कहा ?

बता दें कि नासा ने बताया कि कसार पर्वत की धरती में विशाल भू-चुबकीय पिंड हैं. इसी वजह से इस क्षेत्र में गुरुत्‍वाकर्षण बल बाकी जगहों के मुकाबले काफी ज्‍यादा है. नासा ने काफी समय तक कसार पर्वत पर वैन एलेन बेल्‍ट बनने की वजहों को जानने के लिए शोध किया था. उत्‍तराखंड के कसार देवी मंदिर के आसपास के क्षेत्र के अलावा दक्षिण अमेरिका के पेरू में माचू-पिच्चू और इंग्लैंड के स्टोन हेंग में काफी समानताएं हैं. तीनों जगहों पर चुंबकीय शक्ति का विशेष पुंज पाया गया है. ऐसे में तीनों जगह पर ध्‍यान करने से मानसिक शांति महसूस होती है.

जीपीएस-8

अल्‍मोड़ा के कसार देवी मंदिर को कभी भी वैज्ञानिक नजरिये से अहमियत नहीं दी गई थी. लेकिन जब नासा ने इस क्षेत्र में भू-चुंबकीय प्रभाव को मान्यता दी, तो अब काफी लोग यहां मेडिटेशन का अनुभव लेने पहुंचने लगे हैं. कसार देवी मंदिर परिसर में एक प्‍वाइंट जीपीएस 8 है. इसी के जरिये नासा ने ग्रेविटी प्‍वाइंट के बारे में बताया है. बता दें कि मुख्य मंदिर के द्वार के बायीं तरफ के स्‍थान को चिह्नित करते हुए नासा ने जीपीएस-8 लिखा है. स्‍थानीय लोगों के मुताबिक कसार देवी मंदिर दूसरी शताब्दी का है. हर साल नवंबर से दिसंबर तक कसार देवी मेला लगता है.

कब बना कसार देवी मंदिर?

इस मंदिर को बिड़ला परिवार ने 1948 में बनवाया था. यहां 1950 के दशक में बनाया गया एक शिवमंदिर भी है. जानकारी के मुताबिक स्वामी विवेकानंद 1890 में यहां आए थे. उन्‍होंने यहां की एक एकांत गुफा में गहन ध्यान किया था. उनके अलावा पश्चिमी देशों के बई साधक भी यहां आ चुके हैं. यह क्षेत्र क्रैंक रिज के लिए भी पहचाना जाता है. ये क्षेत्र 1980-90 के दशक के हिप्पी आंदोलन में बहुत प्रसिद्ध हुआ था. कसार देवी मंदिर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, तिब्बती बौद्ध गुरु लामा अंगारिका गोविंदा, पश्चिमी बौद्ध शिक्षक रॉबर्ट थुरुमैन भी आ चुके हैं. डीएस लॉरेंस, कैट स्टीवन्स, बॉब डिलान, जॉर्ज हैरिस, डेनमार्क के एल्फ्रेड सोरेनसन जैसी हस्तियां यहां आई हैं.

वैन एलेन रेडिएशन बेल्‍ट क्‍या है?

बता दें कि धार्मिक और पर्यटन के ही नहीं कसार देवी मंदिर वैज्ञानिक नजरिये से भी काफी जरूरी जगह है. इसका संबंध पृथ्वी के ठीक बाहर मौजूद मैग्‍नेटोस्फियर से है. धरती के मैग्‍नेटोस्फियर के कारण भारी संख्या में एनर्जी से भरे हुए चार्ज्‍ड पार्टिकल्‍स की लेयर बनी हुई है. इसे ही वैन एलन रेडिएशन बेल्ट कहते हैं. नासा की रिसर्च पुष्टि करती है कि पृथ्वी का भू-चुबकीय क्षेत्र सौर पवन को रोककर ऊर्जावान कणों को बिखेरकर वायुमडंल को नष्ट होने से बचाता है. इस बेल्‍ट का नाम इओवा यूनिवर्सिटी के अंतरिक्ष विज्ञानी जेंस वैन एलन के नाम पर रखा गया है.

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