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पहली जनगणना के हिसाब से भारत में रहते थे कितने गरीब, अब कैसे हैं हालात?

आजादी के बाद देश में काफी कुछ बदला. आर्थिक स्थिति से लेकर जनसंख्या तक हर तरफ बदलाव देखने को मिला. चलिए, आपको बताते हैं कि आजादी के बाद देश में कितने गरीब थे.

देश में 16 साल बाद 16वीं जनगणना होने वाली है. इस बार जो जनगणना होगी वह कई मायनों में खास होने वाली है. सरकार इस बार आम जनगणना के साथ जातिगत जनगणना भी करवाने जा रही है. इसके अलावा इस बार जो जनगणना होगी वह पूरी तरह डिजिटल तरीके से होने वाली है. लेकिन आपको पता है क्या कि आजादी के बाद जब पहली बार देश में जनगणना करवाई गई थी तो उस समय देश में आर्थिक हालात कैसे थे. चलिए, आपको बताते हैं कि जब देश में आजादी के बाद पहली बार जनगणना हुई थी तो उस समय कितनी गरीबी थी, कितने गरीब लोग रहते थे और इस समय के हालात कैसे हैं. 

पहली जनगणना के समय कैसी थी स्थिति

जब देश आजाद हुआ था उस समय देश की आबादी 34 करोड़ थी. आज जनसंख्या 140 करोड़ पार कर चुकी है यानी कि पिछले 78 सालों में देश की आबादी 100 करोड़ से भी ज्यादा बढ़ चुकी है. आजादी के समय देश में एक आम आदमी की सालाना इनकम 280 रुपये के आसपास होती थी और आज 1.30 लाख रुपये के आसपास हो रही है. अगर उस समय की सालाना कमाई से आज की तुलना करें तो आज एक इंसान इतने का एक टाइम में होटल में बैठकर प्रेमिका के साथ खाना खा जाता है, जितना उस समय लोग सालभर में कमाते थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आजादी के समय देश में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी में जीवन जा रहे थे. अगर इसको प्रतिशत में देखें तो उस समय करीब 80 प्रतिशत आबादी गरीबी में जीवन जी रही थी. 

हालांकि , यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि देश में गरीबी का आंकड़ा 1956 से माना जाता है. उस दौरान बीएस मिन्हास कमेटी ने इसको लेकर योजना आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. उस रिपोर्ट के अनुसार उस समय देश में 21.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रहे थे.

अब देश में कितने गरीब

कौन गरीब है कौन नहीं है इसकी परिभाषा सरकार ने तय कर रखी है. यूपीए सरकार के दौरान रंगराजन कमेटी ने देश में गरीबी की परिभाषा दी थी. कमेटी के अनुसार, शहर में 47 और गांव में 32 रुपये से कम खर्च करने वाला इंसान गरीब है. हालांकि इस परिभाषा पर काफी विवाद भी देखने को मिला था. एक दूसरी परिभाषा भी है कि शहर वाला इंसान एक हजार कमा रहा है और गांव वाला इंसान 816 रुपये तो ऐसे लोग गरीबी रेखा के नीचे नहीं आएंगे. इस समय जो गरीबी के आंकड़े मौजूद हैं वे साल 2011-12 के हैं और उन आंकड़ों के अनुसार देश में 26.9 करोड़ लोग गरीब हैं.  

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