Non Vegetarian Plants: क्या पौधे भी होते हैं नॉन वेजिटेरियन, जानें कैसे खाते हैं ये नॉन वेज
Non Vegetarian Plants: दुनिया में कुछ ऐसे पौधे भी होते हैं जो नॉन वेजिटेरियन होते हैं. यानी वह सिर्फ फोटोसिंथेसिस के जरिए अपना भोजन नहीं करते. आइए जानते हैं कौन से हैं वे पौधे.

Non Vegetarian Plants: जब भी हम पौधों के बारे में सोचते हैं तो हम आमतौर पर शांत और हरे जीवों की कल्पना करते हैं. यह हरे पौधे सिर्फ सूरज की रोशनी, हवा और पानी पर जिंदा रहते हैं. लेकिन कुछ पौधे ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ फोटोसिंथेसिस पर ही नहीं बल्कि जीवित जीवों का शिकार करते हैं. वैज्ञानिक रूप से इन्हें मांसाहारी या फिर कीट भक्षी पौधे कहा जाता है.
पौधे कीड़े मकोड़ों को क्यों खाते हैं
मांसाहारी पौधे आमतौर पर ऐसे माहौल में उगते हैं जहां की मिट्टी में पोषक तत्वों की काफी कमी होती है, खासकर नाइट्रोजन और फास्फोरस की. दलदल, कीचड़ वाली जगह और एसिडिक वेटलैंड्स आम आवास हैं. क्योंकि मिट्टी सामान्य विकास में मदद नहीं कर पाती इस वजह से इन पौधों ने एक वैकल्पिक रणनीति अपनाई है. यह पौधे कीड़े मकोड़े और दुर्लभ मामलों में मेंढक या फिर छोटी मछलियों को खाकर जरूरी पोषक तत्व लेते हैं.
सबसे तेज पौधे शिकारी
सबसे मशहूर उदाहरण वीनस फ्लाई ट्रैप है. इनकी पत्तियां खुले जबड़े जैसी दिखती हैं. इनके अंदर छोटे बालों जैसे ट्रिगर होते हैं. जब कोई कीड़ा इन बालों को छूता है तो पत्तियां पलक झपकते ही बंद हो जाती हैं. जाल कसकर बंद हो जाता है जिससे शिकार नहीं नहीं बच पाता. इसी के साथ पिचर प्लांट ज्यादा धोखे वाली रणनीति अपनाते हैं. उनकी पत्तियां गहरे घड़े के आकार की संरचनाएं बनाती हैं जो मीठी गंध वाले तरल पदार्थ से भरी होती हैं. कीड़े गंध से आकर्षित होते हैं. वे चिकनी अंदरूनी दीवारों पर फिसल जाते हैं और तरल पदार्थ में गिर जाते हैं और डूब जाते हैं.
इसी के साथ ड्रोसेरा जैसे पौधे अपनी पत्तियों पर सुबह की ओस जैसी दिखने वाली चिपचिपी बूंद का इस्तेमाल करते हैं. जब कोई कीड़ा उस पर बैठता है तो वह तुरंत चिपक जाता है. इसके बाद पौधा धीरे-धीरे अपनी पत्ती को शिकार के चारों तरफ मोड़ लेता है. इससे पूरा शिकार हो जाता है.
मांसाहारी पौधे अपने शिकार को कैसे पचाते हैं
एक बार जब शिकार फंस जाता है तो पौधा डाइजेस्टिव एंजाइम छोड़ता है या फिर बैक्टीरिया का इस्तेमाल करके कीड़े के शरीर को पोषक तत्वों से भरे लिक्विड में तोड़ देता है. इस प्रक्रिया में पौधे और शिकार के साइज के आधार पर 5 से 12 दिन लग सकते हैं. इसके बाद पौधा अपनी पत्तियों से पोषक तत्वों को सोख लेता है.
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Source: IOCL
























