एशियन गेम्स में टीम इंडिया ने जीता गोल्ड, लेकिन इस मेडल में 'सोना' कितना?
एशियन गेम्स में भारतीय एथलीटों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि चमचमाते गोल्ड मेडल में असली सोना कितना होता है? जानिए पदक में सोने की मात्रा

पूरी तरह सोने का नहीं होता है मेडल
यदि आप सोचते हैं कि एशियन गेम्स में मिलने वाला गोल्ड मेडल पूरी तरह से 24 कैरेट या शुद्ध सोने से बना होता है, तो आप बिल्कुल गलत हैं. खेल इतिहास और विज्ञान के नियमों के अनुसार, किसी भी बड़े खेल आयोजन जैसे ओलंपिक या एशियन गेम्स में शत-प्रतिशत सोने का मेडल नहीं दिया जाता है. जानकारी के मुताबिक, एशियन गेम्स के एक गोल्ड मेडल का कुल वजन लगभग 265 ग्राम होता है. इस 265 ग्राम के मेडल में असली सोना केवल 1 ग्राम ही होता है. यानी पूरे मेडल के कुल वजन का महज 0.38 प्रतिशत हिस्सा ही वास्तविक सोना होता है, बाकी का पूरा हिस्सा किसी दूसरी धातु से तैयार किया जाता है.
सोने के अंदर छुपा है चांदी का राज
बनाने वाले सबसे पहले लगभग 264 ग्राम शुद्ध चांदी को पिघलाकर मेडल का ढांचा तैयार करते हैं. इसके बाद, उस चांदी के मेडल के ऊपर कम से कम 1 ग्राम शुद्ध सोने की एक बेहद पतली परत चढ़ाई जाती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में गोल्ड प्लेटिंग कहते हैं. यही कारण है कि यह मेडल बाहर से बिल्कुल चमकीले सोने जैसा दिखता है, लेकिन इसके अंदर पूरी तरह चांदी भरी होती है. अगर इसके आकार की बात करें, तो यह मेडल 80 मिलीमीटर चौड़ा और 5 मिलीमीटर मोटा होता है.
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कचरे से कंचन बनाने की अनोखी तकनीक
इस बार के एशियन गेम्स के मेडल्स की सबसे खास बात यह है कि इन्हें बनाने के लिए एक बहुत ही शानदार और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इन मेडल्स को बनाने के लिए सीधे खदानों से नई धातु नहीं निकाली गई है, बल्कि इसके लिए रीसाइक्लिंग पद्धति को अपनाया गया है. जापान की जनता ने अपने पुराने और खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक कचरे, जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप और पुराने कंप्यूटरों को सरकार को दान किया था. वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इन बेकार पड़े गैजेट्स के अंदरूनी हिस्सों से सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं को निकाला और साफ किया. इसी रीसायकल की गई धातु से एशियन गेम्स के सभी मेडल तैयार किए गए हैं, जो दुनिया को पर्यावरण बचाने का एक बड़ा संदेश देता है.
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