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एशियन गेम्स में टीम इंडिया ने जीता गोल्ड, लेकिन इस मेडल में 'सोना' कितना?

एशियन गेम्स में भारतीय एथलीटों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि चमचमाते गोल्ड मेडल में असली सोना कितना होता है? जानिए पदक में सोने की मात्रा

जापान के आइची-नागोया में खेले जा रहे 20वें एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा लगातार देखने को मिल रहा है. इसी बीच क्रिकेट के मैदान से देश के लिए एक बेहद शानदार और बड़ी खबर सामने आई है. भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने टूर्नामेंट में अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर फाइनल मुकाबला जीतकर इतिहास रच दिया है और देश की झोली में एक और चमचमाता गोल्ड मेडल डाल दिया है. इस बड़ी जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है और सोशल मीडिया पर क्रिकेट प्रेमियों की बधाईयों की बाढ़ आ गई है.
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जब हमारी क्रिकेट टीम पोडियम पर गोल्ड मेडल पहनकर तिरंगे के सामने राष्ट्रगान के लिए खड़ी हुई, तो हर देशवासी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि टीम इंडिया के इन क्रिकेटरों को मिलने वाले चमकीले गोल्ड मेडल में आखिर कितना सोना होता है? क्या यह मेडल पूरी तरह शुद्ध सोने का होता है? आइए जानते हैं इस मेडल का पूरा सच.

पूरी तरह सोने का नहीं होता है मेडल

यदि आप सोचते हैं कि एशियन गेम्स में मिलने वाला गोल्ड मेडल पूरी तरह से 24 कैरेट या शुद्ध सोने से बना होता है, तो आप बिल्कुल गलत हैं. खेल इतिहास और विज्ञान के नियमों के अनुसार, किसी भी बड़े खेल आयोजन जैसे ओलंपिक या एशियन गेम्स में शत-प्रतिशत सोने का मेडल नहीं दिया जाता है. जानकारी के मुताबिक, एशियन गेम्स के एक गोल्ड मेडल का कुल वजन लगभग 265 ग्राम होता है. इस 265 ग्राम के मेडल में असली सोना केवल 1 ग्राम ही होता है. यानी पूरे मेडल के कुल वजन का महज 0.38 प्रतिशत हिस्सा ही वास्तविक सोना होता है, बाकी का पूरा हिस्सा किसी दूसरी धातु से तैयार किया जाता है.

सोने के अंदर छुपा है चांदी का राज

बनाने वाले सबसे पहले लगभग 264 ग्राम शुद्ध चांदी को पिघलाकर मेडल का ढांचा तैयार करते हैं. इसके बाद, उस चांदी के मेडल के ऊपर कम से कम 1 ग्राम शुद्ध सोने की एक बेहद पतली परत चढ़ाई जाती है, जिसे वैज्ञानिक भाषा में गोल्ड प्लेटिंग कहते हैं. यही कारण है कि यह मेडल बाहर से बिल्कुल चमकीले सोने जैसा दिखता है, लेकिन इसके अंदर पूरी तरह चांदी भरी होती है. अगर इसके आकार की बात करें, तो यह मेडल 80 मिलीमीटर चौड़ा और 5 मिलीमीटर मोटा होता है.

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कचरे से कंचन बनाने की अनोखी तकनीक

इस बार के एशियन गेम्स के मेडल्स की सबसे खास बात यह है कि इन्हें बनाने के लिए एक बहुत ही शानदार और पर्यावरण के अनुकूल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इन मेडल्स को बनाने के लिए सीधे खदानों से नई धातु नहीं निकाली गई है, बल्कि इसके लिए रीसाइक्लिंग पद्धति को अपनाया गया है. जापान की जनता ने अपने पुराने और खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक कचरे, जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप और पुराने कंप्यूटरों को सरकार को दान किया था. वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इन बेकार पड़े गैजेट्स के अंदरूनी हिस्सों से सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं को निकाला और साफ किया. इसी रीसायकल की गई धातु से एशियन गेम्स के सभी मेडल तैयार किए गए हैं, जो दुनिया को पर्यावरण बचाने का एक बड़ा संदेश देता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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