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Explained : लॉकडाउन के बाद भी भारत में कैसे हो गए कोरोना के एक लाख से ज्यादा केस?

भारत में कोरोना का पहला केस 30 जनवरी को सामने आया था. तब से लेकर अब तक 100 दिन से ज्यादा का वक्त बीत गया है. और भारत में कोरोना के केस की कुल संख्या एक लाख को पार कर गई है.

आखिरकार भारत में भी कोरोना के केस एक लाख को पार कर ही गए. अब भारत के अलावा पूरी दुनिया में सिर्फ 10 ऐसे देश हैं, जहां पर कोरोना का आंकड़ा एक लाख के पार है. कुल कोरोना पॉजिटिव के मामले में भारत से आगे जो देश हैं, उनमें पहले नंबर पर है अमेरिका. वहां केस की संख्या 15 लाख को पार कर गई है. इसके अलावा रूस, स्पेन, ब्राजील, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की और इरान हैं, जहां कोरोना पॉजिटिव केस की संख्या एक लाख को पार कर गई है.

इस संख्या तक पहुंचने के बाद अब कुछ लोग लॉकडाउन पर भी सवाल उठाने लगे हैं. सोशल मीडिया पर इस तरह के मैसेज की बाढ़ आई हुई है कि जब लॉकडाउन नहीं था, तो देश में करीब 500 ही मामले थे और जब चार बार लॉकडाउन लगा तो केस की संख्या एक लाख को पार कर गई है. लेकिन अगर कोरोना की रफ्तार को देखें तो साफ हो जाता है कि अगर लॉकडाउन नहीं लगा होता तो भारत में कोरोना के मरीजों का आंकड़ा अप्रैल के अंत तक ही एक लाख को पार कर गया होगा. यानि कि इस लॉकडाउन की वजह से कोरोना के मरीजों का आंकड़ा एक लाख तक पहुंचने में 21 दिनों का वक्त ज्यादा लगा है.

कोरोना का पहला केस सामने आया था 30 जनवरी को. एक मार्च तक केस की संख्या सिर्फ 3 ही थी और ये सारे केस एक ही जगह यानि कि केरल के थे. एक केस से 100 केस तक पहुंचने में भारत को करीब 43 दिन का वक्त लगा. 14 मार्च को भारत में कोरोना के कुल केस की संख्या 100 पहुंच गई थी. 24 मार्च को जब पहला लॉकडाउन लगा तो भारत में कोरोना के कुल केस की संख्या 536 तक पहुंच गई थी. 29 मार्च को कोरोना के कुल केस की संख्या एक हजार को पार कर गई थी. यानि कि लॉकडाउन के बाद कोरोना के केस एक हफ्ते में दोगुने हो गए थे. एक हजार से 10 हजार पहुंचने में मात्र 15 दिनों का वक्त लगा. 13 अप्रैल को भारत में कोरोना पॉजिटिव के कुल आंकड़े 10 हजार को पार कर गए थे.

यानि कि 15 दिनों में कोरोना के आंकड़ों में 10 गुना का इजाफा हुआ था. अब अगर यही रफ्तार रही होती तो फिर अप्रैल के अंत तक केस की संख्या 1 लाख को पार कर जाती. लेकिन लॉकडाउन था और उसका असर दिखने लगा था तो रफ्तार पर ब्रेक लगा. रफ्तार धीमी हुई, रुकी नहीं. नतीजा ये हुआ कि जो आंकड़ा करीब एक लाख तक पहुंचने वाला था, वो महज 35,000 के आस-पास ही पहुंच पाया था. मोदी सरकार की माने तो लॉकडाउन का मकसद भी यही था कि कोरोना की रफ्तार को धीमा किया जा सके.

रफ्तार धीमी भी हुई, लेकिन चूंकि कोरोना की न तो कोई वैक्सीन है और न ही कोई दवाई तो ये रफ्तार रुक नहीं पाई. वहीं लॉकडाउन में बढ़ी छूट की वजह से भी सोशल डिस्टेंसिंग पहले के मुकाबले कमजोर होती गई. 4 मई से तीसरा लॉकडाउन शुरू हुआ, जो पिछले दो के मुकाबले कमजोर था. चौथे चरण में छूट पहले के मुकाबले बढ गई. इसका नतीजा था कि 4 मई से 18 मई के बीच यानि कि 15 दिनों के अंदर ही करीब 50 हजार नए केस सामने आए. तीन दिनों के अंदर यानि कि 16, 17 और 18 मई को कोरोना के 14 हजार से भी ज्यादा मामले सामने आ गए और इसने भारत में कोरोना के कुल आंकड़े को एक लाख के पार कर दिया.

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