नेटफ्लिक्स सीरीज 'हेलो बच्चों' पर विनीत कुमार का खुलासा, कहा- 'किरदार सरल लेकिन जिम्मेदारी बड़ी'
Hello Bachchon: नेटफ्लिक्स की आने वाली सीरीज ‘हेलो बच्चों’ शिक्षा के महत्व और हर बच्चे तक इसे पहुंचाने के प्रयासों को दिखाती है. एक्टर विनीत कुमार बताते हैं कि ये कहानी उनके निजी अनुभव से प्रेरित है.

शिक्षा और हर बच्चे तक इसे पहुंचाने की कोशिशों को दिखाने वाली नेटफ्लिक्स की आगामी सीरीज ‘हेलो बच्चों’ इन दिनों काफी चर्चा में है. सीरीज की पहली झलक ही ये साफ कर देती है कि इसमें शिक्षा की ताकत और उसकी जरूरत को बड़े ही असरदार तरीके से दिखाया गया है. इसमें अभिनेता विनीत कुमार सिंह अहम भूमिका में नजर आ रहे हैं. हाल ही में उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में इस शो को लेकर खुलकर बात की और कहा कि शिक्षा हर बच्चे के लिए बेहद जरूरी है.
कहानी से निजी जुड़ाव
सीरीज ‘हेलो बच्चों’ के कॉन्सेप्ट पर बात करते हुए विनीत ने बताया कि ये कहानी उनके दिल के काफी करीब है क्योंकि उन्होंने कोचिंग की दुनिया को बहुत पास से देखा है. उन्होंने कहा कि ये शो उनके अपने जीवन से जुड़ा हुआ है. उनके पिता गणितज्ञ हैं और उन्होंने खुद मेडिकल की पढ़ाई की है और आयुर्वेद में एमडी की डिग्री हासिल की है. ट्रेनिंग और कोचिंग का माहौल उन्होंने बहुत करीब से देखा है. जब उन्हें इस सीरीज का मौका मिला तो उन्हें ऐसा लगा जैसे वो अपने पुराने दिनों में वापस चले गए हों.
माता-पिता और शिक्षकों से जुड़ी कहानी
विनीत का मानना है कि ये शो सिर्फ बच्चों की कहानी नहीं है बल्कि उन माता-पिता और शिक्षकों की भी कहानी है जो उनके पीछे खड़े रहते हैं. उन्होंने कहा कि जब एक शिक्षक किसी छात्र की जिंदगी में आता है तो वो सच में उसकी जिंदगी बदल सकता है. इस पेशे में बहुत ताकत होती है. शो में ऐसी कई भावनाएं और अनुभव दिखाए गए हैं जिनसे लोग खुद को जुड़ा हुआ महसूस करेंगे. कई पल ऐसे होंगे जो लोगों को अपनी जिंदगी की याद दिला देंगे.
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शूटिंग के दौरान भावुक कर देने वाले पल
शूटिंग के अनुभव को याद करते हुए विनीत ने बताया कि कई बार कुछ सीन पढ़ते हुए उन्हें रुकना पड़ा क्योंकि वो भावनाओं में डूब जाते थे. जैसे-जैसे वो किरदार के करीब आते गए उन भावनाओं को और गहराई से महसूस करने लगे थे. कोटा और दूसरी जगहों पर शूटिंग के दौरान उन्हें कई छात्रों से मिलने का मौका भी मिला था. छात्रों ने अपने निजी अनुभव उनके साथ शेयर किए. उनकी बातें सुनकर विनीत को एहसास हुआ कि ये किरदार कितना अहम और जिम्मेदारी भरा है.
किरदार और पढ़ाई के दिनों की यादें
विनीत को बचपन से ही कला से लगाव था लेकिन उन्होंने आर्ट्स छोड़कर बायोलॉजी चुनी थी. अपने स्कूल और कॉलेज के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें इतिहास पढ़ना हमेशा से पसंद था लेकिन वो उसे विषय के तौर पर नहीं ले पाए थे. उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एडमिशन लिया क्योंकि वो राष्ट्रीय विज्ञान और शिक्षा यानी एनएसडी की तरफ जाना चाहते थे. उन्होंने कल्चरल ऑनर्स में पढ़ाई की जिसमें इतिहास और दर्शनशास्त्र शामिल था. हालांकि वो जीव विज्ञान के छात्र थे लेकिन दिल से उन्हें इतिहास, दर्शनशास्त्र और कविता पढ़ना बहुत अच्छा लगता था. सीरीज में अपने किरदार के बारे में बात करते हुए विनीत ने कहा कि ये किरदार ऐसा है जैसे आप उसे पहले से जानते हों. सीधा-सादा और नैचुरल लेकिन उसके साथ बहुत सारी जिम्मेदारियां और उम्मीदें भी जुड़ी हैं. ये सीरीज दिखाती है कि एक साधारण सा इंसान भी आपको चौंका सकता है और प्रेरित कर सकता है. एक शिक्षक अपने समर्पण और ईमानदारी से लाखों लोगों की जिंदगी को छू सकता है और एक बच्चे के भविष्य को पूरी तरह बदल सकता है.
Source: IOCL

























