(Source: ECI/ABP News)
Ujda Chaman Critics Review: गंजेपन से परेशान सनी सिंह ने लगाया कॉमेडी का तड़का, जानें क्या है क्रिटिक्स की राय
Ujda Chaman Critics Review: गंजेपन और बाल झड़ने जैसे मुद्दे को लेकर बनी फिल्म 'उजड़ा चमन' रिलीज होने वाली है. फिल्म की रिलीज से पहले इसकी स्क्रीनिंग रखी गई. फिल्म देखने के बाद क्रिटिक्स के रिएक्शन भी सामने आए हैं. क्रिटिक्स को मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है.

Ujda Chaman Critics Review: गंजेपन और बाल झड़ने जैसे मुद्दे को लेकर बनी फिल्म 'उजड़ा चमन' रिलीज होने वाली है. फिल्म इसी शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. फिल्म की रिलीज से पहले इसकी स्क्रीनिंग रखी गई. फिल्म देखने के बाद क्रिटिक्स के रिएक्शन भी सामने आए हैं. क्रिटिक्स को ये कॉमेडी फिल्म पसंद आ रही है और इस पर मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है.
फिल्म की कहानी की बात करें तो ये फिल्म एक ऐसे शख्स के जीवन के स्ट्रगल पर आधारित है जिसके बेहद कम उम्र में ही बाल झड़ने लगते हैं. फिल्म में सनी भी चमन नाम के ऐसे शख्स के किरदार में हैं जिसके 30 साल की उम्र में ही काफी बाल झड़ गए हैं. गंजेपन के शिकार के कारण उन्हें समाज में उनकी उम्र से काफी बड़ा समझा जाता है.
ऐसे में उन्हें शादी करने में भी काफी समस्याएं होती हैं. इसके बाद उन्हें एक लड़की मिलती है जो थोड़ी मोटी है. लेकिन दोनों एक दूसरे को उनकी कमियों के साथ अपनाने के लिए तैयार हो जाते हैं. इस फिल्म में सनी सिंह के साथ मानवी गगरू और सौरभ शुक्ला भी नजर आएंगे. फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है. फिल्म 1 नवंबर को रिलीज हो रही है.

क्या है क्रिटिक्स की राय?
FirstPost: फिल्म की कहानी और कॉन्सेप्ट दोनों बहुत अच्छे हैं. हालांकि फिल्म में सनी सिंह कई जगह एक्टिंग के कमजोर नमूने पेश करते नजर आते हैं. फिल्म में डाले गए कॉमेडी पंच बहुत ज्यादा नए नहीं हैं, ज्यादातर जोक्स पहले सुने हुए लगते हैं. इसके अलावा निर्देशन में भी कई खामियां हैं. निर्देशक ने कहानी में मॉरल लेक्चर ज्यादा दे दिया है जिससे फिल्म कॉमेडी जॉनरा होने के बाद भी कुछ देर के लिए भारी लगने लग जाती है.
इंडिया TV: अपने रिव्यू में कहा इंडिया टीवी ने कहा कि सनी सिंह के पास ये फिल्म एक बड़ा मौका थी. लेकिन वो इस मौके को कैश करने में कमजोर नजर आए. फिल्म में जहां एक ओर लुक्स और वजन को लेकर बने मुद्दों को उठाने की कोशिश की गई है वहीं, इसमें दूसरी ओर फिल्म के किरदार सेक्सिस्ट जोक्स क्रैक करते नजर आ रहे हैं. फिल्म में 'बाल नहीं तो लड़की नहीं' को मसला बनाया गया है. लेकिन निर्देशक अभिषेक पाठक ने इस बेहतरी कहानी को कमजोर निर्देशन से खराब कर दिया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया: फिल्म अपने फर्स्ट हाफ में काफी फनी लगती है. दिल्ली की लाउड पंजाबी फैमिली को अच्छे से दिखाया गया है. लेकिन सेकेंड हाफ में फिल्म कॉमेडी छोड़ कर फैमिली इमोशनल ड्रामा बन जाती है. सेकेंड हाफ को सोशल मैसेज देने के चक्कर में काफी वीक कर दिया गया है.
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