दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर एक्शन में केंद्र सरकार, गैरकानूनी तरीके से स्ट्रीम करने का आरोप
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर केंद्र सरकार सख्त हो गई है. बिना सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट के फिल्म को ओटीटी पर रिलीज करने के आरोप में मेकर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है.
मशहूर पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब एक बार फिर फिल्म के मेकर्स की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. दरअसल, केंद्र सरकार इस फिल्म की स्ट्रीमिंग को लेकर पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है. सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का दावा है कि फिल्म को नियमों की अनदेखी करते हुए गैरकानूनी तरीके से स्ट्रीम किया गया.
मेकर्स ने नहीं मानी सेंसर बोर्ड की बात
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार अब फिल्म की स्ट्रीमिंग के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है और इसे लेकर कानून एक्सपर्ट्स से राय ले रही है. केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने दावा किया है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म 'सतलुज' को हरी झंडी देने से पहले इसमें 127 कट लगाने का निर्देश दिया था. नियमों के तहत मेकर्स को इन कट्स को लागू करने के बाद ही इसे रिलीज करना था, लेकिन आरोप है कि फिल्म मेकर्स ने सेंसर बोर्ड के नियमों का पालन नहीं किया और अपनी मर्जी से फिल्म स्ट्रीम कर दी.
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बिना सेंसर सर्टिफिकेट के ओटीटी पर रिलीज करने का दावा
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा आरोप ये है कि फिल्म को बिना सेंसर बोर्ड सर्टिफिकेट के ही सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम कर दिया गया. मंत्री के मुताबिक, भारत में किसी भी फिल्म को रिलीज या सार्वजनिक रूप से दिखाने से पहले सेंसर बोर्ड का सर्टिफिकेट जरूरी होता है. ऐसे में बिना सर्टिफिकेट के फिल्म को ओटीटी पर स्ट्रीम करना नियमों का उल्लंघन और पूरी तरह से गैर-कानूनी है.
राज्य सरकारों से एक्शन लेने की अपील
केंद्र सरकार के मंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की भी है. उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में यह फिल्म स्ट्रीम की जा रही है, वहां की सरकारों को इसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. फिलहाल, इस पूरे मामले पर दिलजीत दोसांझ या फिल्म के मेकर्स की ओर से कोई बयान सामने नहीं आया है.
तीन साल तक सेंसर बोर्ड में अटली रही फिल्म
बता दें कि 'सतलुज' तीन साल तक सेंसर बोर्ड में अटकी रही, लेकिन इसे पास नहीं किया गया. ऐसे में हाल ही में मेकर्स ने इसे जी5 पर चुपचाप रिलीज कर दिया था. हालांकि ओटीटी पर आने के 48 घंटों में ही फिल्म को हटा दिया गया था. फिल्म में दिलजीत ने मशहूर सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है. 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौर के दौरान कथित गैरकानूनी हत्याओं और गुप्त अंतिम संस्कारों के मामलों को दुनिया के सामने लाने के बाद जसवंत सिंह खालरा को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली.






















