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राजस्थान: क्यों अपने ही घर में दो सीटें नहीं जिता पाते अशोक गहलोत?

लाख कोशिशों के बाद भी गहलोत जोधपुर शहर और सूरसागर विधानसभा सीट पर अपने पसंद के प्रत्याशी को पिछले दो चुनाव से जिता नहीं पा रहे हैं.

नई दिल्ली: कांग्रेस के कद्दावर नेता अशोक गहलोत जोधपुर से ताल्लुक रखते हैं. जोधपुर शहर की दो विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना गहलोत के लिए मूंछ का सवाल बन गया है. लाख कोशिशों के बाद भी गहलोत जोधपुर शहर और सूरसागर विधानसभा सीट पर अपने पसंद के प्रत्याशी को पिछले दो चुनाव से जिता नहीं पा रहे हैं.

साल 2008 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी इसके बावजूद जोधपुर शहर की दो सीट जोधपुर सिटी और सूरसागर हाथ से निकल गई थी. इन दोनों सीटों पर जीत दिलाना गहलोत के लिए चुनौती बना हुआ है. गहलोत वक़्त बेवक्त जोधपुर के लोगों के सामने अपनी यह टीस कई बार जता चुके हैं. अब एक बार फिर चुनाव आ गए हैं और दोनों सीटों पर हमेशा की तरह प्रत्याशी कौन होगा इसमें गहलोत की भूमिका रहेगी.

ऐसे में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती ऐसे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की है जो यहां से जीत हासिल कर उनकी प्रतिष्ठा में चार चांद लगा सके. कांग्रेस के जोधपुर के अध्यक्ष सईद अंसारी साल 2008 में सूरसागर से चुनाव लड़ चुके हैं. सईद अंसारी इस बार इस चुनौती से पार पाने की बात कह रहे हैं. वो इस बार जोधपुर शहर की तीनों सीटें जीतने की बात कह रहे हैं.

कांग्रेस जहां इस बार अपनी जीत के दावे कर रही है तो वहीं बीजेपी का दावा है कि वो ना सिर्फ इन दो सीटों पर जीत बरक़रार रखेगी बल्कि अशोक गहलोत की सीट सरदारपुरा पर भी जीत दर्ज करेगी. जोधपुर से मेयर और बीजेपी नेता घनश्याम ओझा कहते हैं कि हम तीनों सीटें जीतेंगे.

ये है सीटों का चुनावी समीकरण बात अब इन सीटों के समीकरण करते हैं. साल 2008 में परिसीमन के बाद सामान्य बनी सूरसागर और जोधपुर सीट पर किसी एक जाति का दबदबा नहीं है. सूरसागर सीट पर 2.45 लाख मतदाताओं वाले इस विधानसभा में सबसे अधिक साठ हजार मुस्लिम हैं. करीब 45 हजार ब्राह्मण मतदाता हैं. इसके अलावा अनुसूचित जाति-जनजाति के भी चालीस हजार मतदाता हैं. साथ ही करीब 70 हज़ार अलग जातियों के मतदाता हैं.

जोधपुर शहर सीट में करीब दो लाख मतदाता हैं. वैश्य मतदाता सबसे अधिक करीब चालीस हजार हैं. इसके बाद तीस हजार मुस्लिम और पच्चीस हजार ब्राह्मण हैं. शेष मतदाताओं में ओबीसी हैं. जोधपुर शहर से बीजेपी के कैलाश भंसाली लगातार दो बार विधायक चुने जा चुके हैं. कांग्रेस ने दोनों बार यहां वैश्य समुदाय के व्यक्ति को ही अपना प्रत्याशी बनाया, लेकिन वे बीजेपी के इस गढ़ को भेद नहीं पाए.

तो वहीं सूरसागर सीट पर पिछले दो चुनाव से कांग्रेस लगातार मुस्लिम उम्मीदवार उतार रही है तो बीजेपी ब्राह्मण समाज की सूर्यकांता व्यास को. दोनों बार सूर्यकांता ने आसान जीत हासिल की. कांग्रेस इस बार ऐसे प्रत्याशी की तलाश में है जो उसे इस सीट पर जीत दिला सके.

दो दशक से शहर सीट से कांग्रेस नहीं जीत पा रही है और करीब ऐसी हालत सूरसागर की भी. वहां भी पिछले तीन चुनावों में वो लगातार हार रही है.

ये है कांग्रेस के हार की वजह हार की वजह क्या है? इसके जवाब में जानकार कहते हैं कि कांग्रेस का टिकिट वितरण उसे हराता है. सूरसागर की सीट पर मुस्लिम उम्मीदवार को उतारा जाता है. वहां चुनाव में ध्रुवीकरण हो जाता है. जोधपुर शहर बीजेपी का गढ़ माना जाता है जो इनके लिए निकालना मुश्किल हो जाता है.

मध्य प्रदेश: नर्मदा में पूजा के साथ सीएम शिवराज ने बुधनी सीट से भरा पर्चा फिलहाल गहलोत को ऐसे चेहरों की तलाश है जो उन्हें यहां से जीत दिला सकें और घर में उनकी प्रतिष्ठा को बढ़ा सकें. इन सीटों के लिए दावेदार खूब हैं लेकिन ये देखने वाली बात होगी कि वो किसे इन सीटों पर उतारेंगे. फिलहाल कांग्रेस ने अभी उम्मीदवारों का एलान नहीं किया है.

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