गोरखपुर-बस्ती मंडल: बीजेपी की लिस्ट में चल रहा है जोड़-तोड़, किसी का कटा टिकट तो किसी को मिला जीवनदान
बता दें कि यूपी में कुल 80 लोकसभा सीट हैं. किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए इस राज्य में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज करना जरूरी है. इस बार राज्य में कुल 7 चरणों में चुनाव हो रहे हैं.

गोरखपुरः लोकसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो गई है. उम्मीदवारों के नामों की घोषणा के साथ ही पिछली बार जीत का परचम लहराने वाले कई बीजेपी सांसदों की भी सांसें अटकी हुई है. क्योंकि ये तय नहीं है कि उन्हें टिकट मिलेगा कि नहीं. गोरखपुर-बस्ती मंडल की नौ सीटों पर भी कमोबेश ऐसा ही हाल रहा है. छह सीटों पर तो बीजेपी ने पत्ते खोल दिए हैं. लेकिन, वीआईपी कही जाने वाली गोरखपुर, जूताकांड से सियासत गर्माने वाली संतकबीरनगर और देवरिया सीट पर भाजपा ने पत्ते नहीं खोले हैं. वहीं कुशीनगर सीट से सिटिंग एमपी का टिकट कट गया है. बांसगांव और बस्ती सीट पर भी सिटिंग एमपी पर तलवार लटक रही थी. लेकिन, उन्हें जीवनदान मिल गया है.
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गोरखपुर-बस्ती मंडल की कुल नौ लोकसभा सीटों पर भी बीजेपी के टिकट पर साल 2014 में जीत करने वाले सांसदों पर भी तलवार अटकी रही है. ज्यादातर को ये डर सता रहा था कि किन्हीं कारणों से उनका टिकट न कट जाए. मंगलवार को जारी हुई लिस्ट में ज्यादातर के साथ मंगल ही हुआ. लेकिन, कुशीनगर से बीजेपी सांसद राजेश पाण्डेय का टिकट कट गया. उनकी जगह कांग्रेस की खड्डा सीट से पूर्व में एमएलए रहे विजय दुबे को टिकट दिया गया है. ये वही विजय दुबे हैं जिन्होंने राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के पक्ष में क्रास वोटिंग कर सुर्खियां बिटोरी थी. हियुवा से करियर शुरू करने वाले विजय दुबे ने साल 2009 में कांग्रेस का दामन थाम लिया. इसके बाद उन्होंने साल 2012 में कांग्रेस के टिकट पर खड्डा से एमएलए का चुनाव लड़कर जीत हासिल की. माना जा रहा है कि योगी खेमे का होने के कारण उन्हें इस बार टिकट दिया गया है.
गोरखपुर में दो लोकसभा सीटों में पहली गोरखपुर सदर लोकसभा सीट से उपचुनाव में हार के बाद से ही बीजेपी संशय की स्थिति में है. बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ये तय नहीं कर पा रहा है कि सपा से उपचुनाव में सांसद बनकर बीजेपी के हाथों से उनकी तय सीट छीनने वाले संभावित सपा प्रत्याशी प्रवीण निषाद के खिलाफ किसे मैदान में उतारा जाय. हालांकि, ये भी हो सकता है कि सपा-बसपा गठबंधन द्वारा उम्मीदवार की घोषणा का बीजेपी शीर्ष नेतृत्व जोड़-तोड़ के लिए इंतजार कर रहा हो. वहीं बांसगांव लोकसभा सीट पर दो बार से सांसद रहे कमलेश पासवान पर जमीन कब्जा के मामले में मुकदमा होने और सीएम योगी की नाराजगी से उनका टिकट कटने की संभावना जताई जा रही थी. लेकिन, शीर्ष नेतृत्व के पास कोई अन्य विकल्प नहीं होने के कारण फिर से कमलेश पासवान को मैदान में उतारा गया है.
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ऐसा ही हाल बस्ती लोकसभा सीट का भी है. माना जा रहा था कि वर्तमान सांसद हरीश द्विवेदी का इस बार टिकट कट जाएगा. क्योंकि स्थानीय स्तर पर नेताओं और जनता में उन्हें लेकर खासी नाराजगी भी रही है. लेकिन, संतकबीनगर में जूता कांड की सुर्खियों में बीजेपी की साख को बट्टा लगने के कारण बस्ती सीट पर दूसरे उम्मीदवार को उतारने का रिस्क बीजेपी को लेना ठीक नहीं लगा. यही वजह है कि सीट जाने के डर से एक बार फिर सिटिंग एमपी हरीश द्विवेदी पर बीजेपी ने दांव लगाया है.
सियासी जूताकांड से राष्ट्रीय सुर्खियों में आने वाली संतकबीरनगर सीट पर संशय की तलवार लटक रही है. गोरखपुर की तरह यहां के भी उम्मीदवार के नाम की घोषणा शीर्ष नेतृत्व ने अभी नहीं की है. उसका कारण भी साफ है. जूताकांड में बीजेपी की इतनी किरकिरी कर दी है कि सांसद शरद त्रिपाठी का विकल्प खोजा जा रहा है. माना जा रहा है कि उनके पिता रमापति राम त्रिपाठी पर इस बार बीजेपी दांव आजमा सकती है. क्योंकि वे बीजेपी के वरिष्ठ नेता भी हैं. इसके साथ ही उनकी छवि भी साफ-सुथरी है. यही वजह है कि उन्हें मैदान में उतारकर बीजेपी शीर्ष नेतृत्व डैमेज कंट्रोल की रणनीति आजमा सकता है.
सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज सीट पर सिटिंग एमपी जगदंबिका पाल को फिर से टिकट मिला है. साफ-सुथरी छवि और सीएम योगी के हर मंच पर दिखने वाले सांसद जगदम्बिका पाल की जीत की संभावनाओं को देखते हुए इस बार फिर उन्हें टिकट दिया गया है. महराजगंज लोकसभा सीट पर भी शीर्ष नेतृत्व ने सांसद पंकज चौधरी पर भरोसा जताया है. पंकज चौधरी ने अपने क्षेत्र में विकास के कई कार्य करवाए हैं. उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का साथ मिला है. यही वजह है कि इस बार शीर्ष नेतृत्व ने इस सीट पर उन पर भरोसा किया है. लेकिन, सपा ने निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद को टिकट देकर मैदान में उतार दिया, तो उन्हें एड़ी-चोटी का जोर भी लगाना होगा.
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देवरिया सदर लोकसभा सीट पर सांसद कलराज मिश्र ने इस बार चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. बढ़ती उम्र को कारण बताते हुए उनके इंकार करने से इस सीट पर भी अभी संशय बरकरार है. माना जा रहा है कि इस सीट पर बीजेपी युवा चेहरा प्रदेश प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी पर दांव आजमा सकती है. वहीं बीजेपी ने सलेमपुर लोकसभा सीट पर सिटिंग एमपी रविन्द्र कुशवाहा को टिकट दिया है. ऐसे में गोरखपुर-बस्ती मंडल की नौ में चार सीट पर सियासी मुकाबला दिलचस्प होने वाला है. माना जा रहा है कि गोरखपुर, संतकबीरनगर, देवरिया और कुशीनगर सीट पर सियासतदानों के साथ आम आदमी की भी नजर रहेगी. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ये चारों सीटें किसके खाते में जाती है.


















