केसरिया हुआ करीब 70 फीसदी देश, कांग्रेस सिर्फ 2.5 फीसदी आबादी पर सिमटी

नई दिल्ली: देश की सियासत में मोदी के नाम की आंधी अब सुनामी में तब्दील हो गई है. कर्नाटक की जीत के साथ दक्षिण भारत में बीजेपी ने जोरदार दस्तक दी है. दक्षिण में कांग्रेस के आखिरी बड़े किले को मोदी की सुनामी ने ध्वस्त कर दिया हैं. पीएम नरेंद्र मोदी पहले ही सारे राज्यों को केसरिया रंग में रंगने की एलान कर चुके हैं.
देश की 64 फीसदी आबादी पर पहले से ही काबिज एनडीए का देश की 69 फीसदी आबादी पर शासन हो जाएगा. और कांग्रेस पार्टी की सरकार पंजाब, पुडुचेरी और मिजोरम में देश की सिर्फ 2.5 फीसदी आबादी पर रह गई है. कांग्रेस के लिए देश का नक्शा नींद उड़ाने वाला है. देश के इतिहास में कांग्रेस कभी इतना कमजोर नहीं थी.
पीएम मोदी ने इसकी भविष्याणी अपने चुनाव प्रचार के दौरान पहले ही कर दी थी. मिजोरम में साल के अंत में चुनाव होने हैं. अगर कांग्रेस मिजोरम में भी हार गई तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए देश की राजनीति में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए नए सिरे से नीति और रणनीति बनानी होगी.
कर्नाटक के चुनावी नतीजों का सबसे बड़ा साइड इफेक्ट यह है कि कांग्रेस से ज्यादा तो क्षेत्रीय पार्टियों को कद देश में बढ़ गया है. अगर देश की नक्शे पर नजर डालें तो कांग्रेस से ज्यादा पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का देश की 7.5% आबादी पर कब्जा है. जबकि तमिलनाडु में AIADMK का कब्जा 6% आबादी पर है. आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू की TDP का देश की 4% आबादी पर कब्जा है. यानि 2019 के चुनावों से पहले कांग्रेस के सामने क्षेत्रीय पार्टियां बढी चुनौती पेश कर सकती हैं. कांग्रेस का 2.5 फीसदी आबादी पर सिमटना मोदी के कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को साकार करता नजर आ रहा हैं. इसका मतलब 2019 के चुनावों में मोदी मैजिक ही सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा. जिसकी लहर पर सवार होकर बीजेपी जीत की राह बनाने की कोशिश करेगी.
यहां ग्राफिक्स के जरिए समझिए कि यदि कांग्रेस के हाथ से कर्नाटक निकला तो क्या स्थिति होगी


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Source: IOCL















