कर्नाटक चुनाव: यहां समझें पूरा चुनावी नक्शा, जिसपर बीजेपी-कांग्रेस और जेडीएस की है नजर
Karnataka Election 2018: कांग्रेस ने अलग धर्म का कार्ड खेलकर लिंगायतों को अपने पक्ष में कर लिया. वहीं बीजेपी यदुरप्पा के चेहरे पर जीत की उम्मीद लगा रही है. इस बार कर्नाटक चुनाव में पूरे देश की दिलचस्पी है. हम आपको कर्नाटक का पूरा चुनावी नक्शा समझा रहे हैं.

नई दिल्ली: कर्नाटक में 12 मई को विधानसभा 224 सीटों के लिए वोटिंग होगी. 15 जनवरी को प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला होगा. जीत के रथ पर सवार बीजेपी ने कर्नाटक में सरकार बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है. वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी कांग्रेस किसी भी कीमत पर कुर्सी नहीं गंवाना चाहती. इसीलिए अमित शाह और राहुल गांधी कर्नाटक चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.
कांग्रेस ने अलग धर्म का कार्ड खेलकर लिंगायतों को अपने पक्ष में कर लिया. वहीं बीजेपी यदुरप्पा के चेहरे पर जीत की उम्मीद लगा रही है. इस बार कर्नाटक चुनाव में पूरे देश की दिलचस्पी है. हम आपको कर्नाटक का पूरा चुनावी नक्शा समझा रहे हैं.
कर्नाटक का जातिगत गणित कर्नाटक चुनाव में इस बार लिंगायत बड़ा फैक्टर बनकर उभरा है. राज्य में लिंगायतों की आबादी 17 से 19 फीसदी है. लिंगायतों का उत्तरी कर्नाटक की 100 से 120 सीटों पर प्रभाव है. बीजेपी के सीएम उम्मीदवार येदुरप्पा भी लिंगायत समुदाय से हैं. कर्नाटक में अब तक आठ मुख्यमंत्री लिंगायत समुदाय से बने हैं.
दलितों की बात करें तो राज्य में 32 फीसदी दलित आबादी है. इनमें अकेले करुबा जाति की आबादी सात फीसदी है. वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इसी जाति से आते हैं. इन्हें चरवाहा भी कहा जाता है.
राज्यमें 17 फीसदी अल्पसंख्यकों की आबादी 17 फीसदी है जिसमें 13 फीसदी मुसलमान हैं और चार प्रतिशत ईसाई हैं. किसान कहे जाने वाले वोकालिगा समुदाय की आबादी 15 से 17 फीसदी है. इनका प्रभाव दक्षिण कर्नाटक में माना जाता है. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देववेगौड़ा वोकालिगा जाति से आते हैं.
कर्नाटक की सीटों का क्षेत्रवार गणित कर्नाटक में विधनसभा की कुल 224 सीटें हैं. सीटों के हिसाब से कर्नाटक को 6 हिस्सों में बांटा गया है. इनमें हैदराबाद कर्नाटक, बाम्बे कर्नाटक, तटीय कर्नाटक, मध्य कर्नाटक, ओल्ड मैसूर और बेंगलूरु शामिल है.
हैदराबाद कर्नाटक: हैदराबाद कर्नाटक 40 सीटें हैं, ये वो इलाका है जो कभी हैदराबाद स्टेट के तहत आता था. यहां तेलुगु बोलने वालों की बहुलता है. ये कर्नाटक का सबसे पिछड़ा इलाका कहलाता है. हैदराबाद कर्नाटक में मुख्य रूप से कोप्पल, गुलबर्गा, यादगीर, बिदर, रायचूर और बेल्लारी शामिल हैं.
2013 के चुनावों में 40 में से कांग्रेस ने 23, बीजेपी ने 5, जेडीएस ने भी 5 सीटें जीती थी. तीन सीटें येदुरप्पा की केजेपी पार्टी ने जीती थी. उस समय येदुरप्पा को बीजेपी ने निकाल दिया था और उन्होंने अलग से दल बनाया था. लोकसभा चुनाव 2014 के हिसाब से देखा जाए तो बीजेपी 23 सीटों पर आगे थी और कांग्रेस 17 पर आगे थी.
बाम्बे कर्नाटक: इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा 50 सीटें हैं. ये वो हिस्सा है जो कभी बाम्बे प्रेसीडेंसी का हिस्सा हुआ करता था. इस क्षेत्र में मुख्यरूप से धारवाड़, हवेरी, बेलगाम, बीजापुर, बागलकोट और गदघ शामिल हैं. यहां की 50 में से पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 31, बीजेपी ने 13, जेडीएस ने एक सीट जीती थी. लोकसभा चुनाव 2014 के हिसाब से देखा जाए तो बीजेपी 39 पर और कांग्रेस 11 सीटों पर आगे थी.
तटीय कर्नाटक: मैंगलौर तटीय कर्नाटक के अंतर्गत ही आता है. 24 सीटों वाले तटीय कर्नाटक इलाके में मुस्लिम और ईसाई आबादी ज्यादा है. इस इलके में मुख्यरूप से उडीपी, चिकमंगलूर, उत्तर कनाडा और दक्षिण कनाडा शामिल हैं. विधानसभा चुनाव 2013 में कांग्रेस ने 14, बीजेपी ने 5 सीटें और जेडीएस ने दो सीटें जीती थीं. 2014 के लोकसभा चुनावों के हिसाब से देखा जाए तो बीजेपी 20 पर और कांग्रेस केवल चार सीटों पर आगे थी.
मध्य कर्नाटक: मध्य कर्नाटक में विधानसभा की 21 सीटें हैं. मध्य कर्नाटक के प्रमुख इलाके शिमोगा, देंवनगीर और चित्रदुर्ग हैं. 2013 के चुनाव में कांग्रेस को 14, बीजेपी एक और जेडीएस चार पर जीती थी. येदुरप्पा की केजेपी को एक सीट मिली थी शिमोगा में शिकारीपुरा की जहां से वो खुद जीते थे. लोकसभा चुनाव 2014 के हिसाब से देखा जाए तो 19 पर बीजेपी और 9 पर कांग्रेस आगे थी.
ओल्ड मैसूर: इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा 53 सीटें हैं. इस इलाके में तमिल बोलने वालों की संख्या ज्यादा है. एचडी देवेगौड़ा के वोकालिगा जाति का भी असर माना जाता है. 2013 चुनाव में कांग्रेस 24, देवेगौड़ा की पार्टी जेडीएस ने 21 और बीजेपी ने चार सीटों पर कब्जा जमाया था. लोकसभा चुनाव 2014 के हिसाब से कांग्रेस 30 पर जेडीएस 13 और बीजेपी 10 सीटों पर आगे थी.
बेंगलूरु: बेंगलूरु ओल्ड मैसूर में आता है लेकिन इसे अलग से लिया जाता है क्योंकि यहां बेंगलुरु शहर की ही अकेले 28 सीटे हैं. 2013 विधानसभा में कांग्रेस ने 16, बीजेपी ने 12 और जेडीएस ने 7 सीटें जीती थी. 2014 लोकसभा चुनाव के हिसाब से बीजेपी 30 और कांग्रेस सिर्फ 6 पर आगे थी.
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