स्कूल की राह फिर से बच्चों के लिए आसान, योगी सरकार की नई योजना; जानें
उत्तर प्रदेश सरकार राज्यभर के करीब 5 लाख वंचित बच्चों तक शिक्षा और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का लाभ पहुंचाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है,जानें क्या है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश सरकार ने 4.92 लाख बच्चों को फिर से स्कूल से जोड़ने और उन्हें DBT के लाभ दिलाने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है. यह मिशन खास तौर पर उन बच्चों के लिए है जो पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं या स्कूल में नामांकित नहीं हैं. आइए जानते हैं सरकार का पूरा प्लान क्या है.
उत्तर प्रदेश में ऐसे करीब 4.92 लाख बच्चे चिन्हित हुए हैं, जिनकी उम्र 6 से 14 साल के बीच है, लेकिन उन्हें अभी तक DBT यानि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर का फायदा नहीं मिला वजह यह है कि ये बच्चे या तो स्कूल में नामांकित नहीं हैं या पढ़ाई बीच में छोड़ चुके हैं इसी वजह से सरकार अब प्रदेश-भर में एक बड़ा अभियान चला रही है, ताकि कोई भी बच्चा सरकारी लाभ से वंचित न रह जाये.
सरकार ने इन बच्चों की पहचान करने के लिए खास तौर पर “जीरो पॉवर्टी पोर्टल” का इस्तेमाल किया है यहां से यह पता चला कि कई बच्चों के परिवारों के बैंक खाते या तो सीड नहीं हैं या बच्चों के दस्तावेज पूरे नहीं हैं ऐसे में DBT का पैसा उनके खातों तक नहीं पहुंच पाया.
यह अभियान क्यों खास है?
राज्य में हजारों ऐसे बच्चे थे जो लाभ से बाहर रह गए थे अब पहली बार उनकी सीधी पहचान हो चुकी है यह सिर्फ DBT का पैसा देने का अभियान नहीं है बल्कि उन बच्चों को फिर से स्कूल जोड़ने का बड़ा मिशन है सरकार चाहती है कि कोई बच्चा आर्थिक या दस्तावेज की कमी के कारण पढ़ाई से दूर न रहे DM और BSA की सीधी जिम्मेदारी तय होने से काम की रफ्तार तेज होगी और जवाबदेही भी बढ़ेगी.
बच्चों को क्या लाभ मिलेगा
बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, जूते, मोजे, स्वेटर और स्टेशनरी के लिए मिलने वाला DBT समय पर मिलेगा स्कूल छोड़ चुके बच्चे फिर से पढ़ाई से जुड़ेंगे गरीब परिवारों पर बोझ कम होगा क्योंकि स्कूल-संबंधी खर्च का बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी आने वाले समय में बच्चों का नामांकन और उपस्थिति दोनों बढ़ेगी शिक्षित बनने से बच्चों का भविष्य सुरक्षित होगा और परिवारों की स्थिति भी सुधरेगी.
क्या होगी DM और BSA की जिम्मेदारी
- जिले के सभी ऐसे बच्चों की सटीक लिस्ट तैयार कराना.
- टीम बनाकर गांव-गांव और मोहल्लों में सत्यापन करवाना.
- बच्चों को नजदीकी सरकारी स्कूलों में नामांकन दिलाना.
- अगर किसी बच्चे का आधार, बैंक खाता या दस्तावेज अधूरा है तो उसे पूरा करवाना.
- यह देखना कि DBT का पैसा सही समय पर बच्चों के खाते में ट्रांसफर हो.
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Source: IOCL



























