Maharashtra MBBS Bond: 20 साल बाद खत्म हुआ MBBS बॉन्ड नियम, जानिए महाराष्ट्र सरकार ने क्यों लिया बड़ा फैसला
Maharashtra MBBS Bond: महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, जब 2006 में यह बॉन्ड नीति लागू की गई थी, तब राज्य में करीब 4500 एमबीबीएस सीटें थी. अब यह संख्या बढ़कर 11,000 से ज्यादा हो चुकी है.

Maharashtra MBBS Bond: महाराष्ट्र सरकार ने लगभग दो दशक पुराने उस नियम को खत्म कर दिया है, जिसके तहत एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को 1 साल की अनिवार्य बॉन्ड सेवा करनी होती थी. यह व्यवस्था 2006 में ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के उद्देश्य से लागू की गई थी. अब समय के साथ मेडिकल कॉलेज और एमबीबीएस सीटों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जबकि सरकारी अस्पताल में बॉन्ड सेवा के लिए उपलब्ध पद लगभग सीमित ही रहे. ऐसे में हजारों युवा डॉक्टरों को पोस्टिंग मिलने का लंबा इंतजार करना पड़ता था, जिससे उनकी पढ़ाई और करियर दोनों प्रभावित हो रहे थे. इसी स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने अब इस व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला किया है.
क्यों खत्म किया एमबीबीएस बॉन्ड नियम?
महाराष्ट्र सरकार के अनुसार, जब 2006 में यह बॉन्ड नीति लागू की गई थी, तब राज्य में करीब 4500 एमबीबीएस सीटें थी. अब यह संख्या बढ़कर 11,000 से ज्यादा हो चुकी है. दूसरी और सरकारी विभागों में बॉन्ड सेवा के लिए उपलब्ध पदों की संख्या उसी अनुपात में नहीं बढ़ी. इस वजह से हर साल बड़ी संख्या में एमबीबीएस पास डॉक्टर पोस्टिंग का इंतजार करते रहे. कई छात्रों ने पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए पात्र होने के बावजूद केवल बॉन्ड सेवा पूरी न होने के कारण एडमिशन नहीं ले पाए.
सरकार का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था व्यावहारिक नहीं रह गई थी. इसके अलावा सरकार ने अपने आदेश में कहा कि कई नए एमबीबीएस डॉक्टर केवल पीजी कोर्स में एडमिशन की पात्रता हासिल करने के लिए बॉन्ड सेवा पूरी करते थे. ऐसे में वह अपने कार्य स्थल पर पूरी साक्षता से चिकित्सा सेवा नहीं दे पा रहे थे. इसके अलावा यह भी माना गया की हाल ही में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टरों के मामलों में स्वतंत्र रूप में आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं देने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं होते. इन सभी पहलुओं को देखते हुए बॉन्ड व्यवस्था की समीक्षा की गई और इसे समाप्त करने का फैसला लिया गया
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किन छात्रों को मिलेगा इसका फायदा?
सरकार का यह फैसला सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और नगर निगम के मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने वाले छात्रों पर लागू होगा. इसके अलावा उन प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के छात्र भी इसका लाभ उठा सकेंगे, जिन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ लिया है. वहीं सरकार के आदेश के अनुसार जिन छात्रों को अभी तक बॉन्ड सेवा के लिए पोस्टिंग नहीं मिली, जिन्हें पोस्टिंग मिली लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया या जो किसी कारण से अपनी बंद सेवा पूरी नहीं कर पाए थे, उन्हें अब इस अनिवार्य सेवा से छूट दी जाएगी. हालांकि जिन डॉक्टरों ने सरकार का आदेश जारी होने से पहले अपनी बॉन्ड पोस्टिंग ज्वाइन कर ली है, उन्हें निर्धारित अवधि पूरी करनी होगी. वहीं जिन्होंने पहले बॉन्ड से बचने के लिए जुर्माना जमा किया, उन्हें राशि वापस नहीं मिलेगी.
अब आगे क्या होगा?
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब नई बॉन्ड पोस्टिंग नहीं की जाएगी. इसके साथ ही ऑनलाइन बॉन्ड आमंत्रण पोर्टल को भी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं. इस फैसले के बाद अब एमबीबीएस पास छात्र बॉन्ड पोस्टिंग का इंतजार किए बिना सीधे अपनी आगे की पढ़ाई और करियर की दिशा में कदम बढ़ा सकेंगे. इससे पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में एडमिशन में होने वाली देरी भी कम होने की उम्मीद है.
डॉक्टर और छात्रों ने फैसले का किया स्वागत
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लंबे समय से लंबित सुधार बताया. संगठन का कहना है कि इससे छात्रों को पीजी एडमिशन और करियर की शुरुआत में होने वाली अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी. छात्रों और अभिभावकों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी कहा कि पहले छात्रों को बॉन्ड पूरा करने के लिए सरकारी अस्पतालों में पोस्टिंग मिलने का इंतजार करना पड़ता था. कई बार मेडिकल कॉलेज में भी सभी छात्रों को समय पर अवसर नहीं मिल पाता था, जिससे उन्हें दूसरी जगह पर पोस्टिंग तलाशनी पड़ती थी.
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